न्यूयॉर्क/नई दिल्ली। फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के अदम्य साहस और सूझबूझ की गूंज अब संयुक्त राष्ट्र तक पहुंच गई है। गांधी जयंती और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कैप्टन स्मित के साहस का उल्लेख करते हुए उनके कार्य को महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत का सच्चा उदाहरण बताया।

जानलेवा हमले के बीच भी नहीं खोया धैर्य
कैप्टन स्मित मच्छार उस समय चर्चा में आए जब फ्लाईदुबई की उड़ान के दौरान उनके ही कोपायलट ने कॉकपिट में उन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्मित ने स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की और विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उनके प्रयासों और अन्य क्रू व यात्रियों की मदद से विमान को सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतारा जा सका।
यूएन में पीएम मोदी की बातचीत का किया जिक्र
हरीश पर्वतनेनी ने संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैप्टन स्मित के बीच हुई वीडियो बातचीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने गांधी जयंती और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के संदर्भ में स्मित के धैर्य और दूसरों की जान बचाने के प्रयास को अहिंसा के सिद्धांत से जोड़ा।
गांधी के विचारों को बताया आज भी प्रासंगिक
यूएन में अपने संबोधन के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि मौजूदा वैश्विक तनाव, संघर्ष और अस्थिरता के दौर में महात्मा गांधी के शांति, अहिंसा, सत्य, न्याय और मानवीय गरिमा के विचारों की प्रासंगिकता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि गांधी के लिए अहिंसा केवल हिंसा से दूर रहने का विचार नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता थी।
कैप्टन स्मित के साहस की पीएम मोदी भी कर चुके हैं सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कैप्टन स्मित मच्छार के साहस की सार्वजनिक रूप से सराहना की है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, उन्होंने कहा कि गंभीर खतरे और चोट के बावजूद स्मित ने असाधारण साहस दिखाया और बड़ी त्रासदी को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अहिंसा दिवस पर साहस की नई मिसाल
कैप्टन स्मित की घटना को संयुक्त राष्ट्र में अहिंसा दिवस के कार्यक्रम के दौरान याद किया जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि इसमें संकट की घड़ी में धैर्य, जिम्मेदारी और दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का संदेश सामने आया। भारत के प्रतिनिधि ने गांधी के विचारों को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों से जोड़ते हुए शांति और अहिंसा को संघर्ष के बीच रास्ता दिखाने वाला सिद्धांत बताया।
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