G7 देशों ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने आपातकालीन भंडार से 10 करोड़ बैरल डीजल और कच्चा तेल जारी करने पर सहमति जताई है. इन देशों ने कहा कि हम आने वाले हफ्तों में 10 करोड़ बैरल तेल और ईंधन उत्पाद जारी करने की योजना बना रहे हैं. इसकी शुरुआत काफी मात्रा में डीजल जारी करके की जाएगी, क्योंकि हाल ही में अमेरिका में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं.

इमरजेंसी रिजर्व से 10 करोड़ बैरल तेल-डीजल होगा जारी, G7 देशों का बड़ा फैसला​

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि डीज़ल जारी करने का काम तुरंत शुरू होगा. उन्होंने G7 के उस वादे को दोहराया, जिसके तहत अगले 20 दिनों के भीतर डीजल की बड़ी मात्रा जारी करने का काम तुरंत शुरू किया जाएगा और बाकी डीजल चार महीनों में जारी किया जाएगा.

बढ़ती कीमतों से निपटने का दबाव

ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी पर 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले बढ़ती कीमतों से निपटने का दबाव है. ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर इस कदम की घोषणा की. APNORC के एक सर्वे के अनुसार, अर्थव्यवस्था के मामले में राष्ट्रपति की अप्रूवल रेटिंग नए निचले स्तर पर पहुंच गई है, क्योंकि ईरान युद्ध और उनके व्यापारिक विवादों के कारण अमेरिका में तेल और अन्य सामानों की कीमतें बढ़ गई हैं.

आठ महीने लंबे युद्ध के दौरान अमेरिका और विदेशों में गैस की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं. ट्रंप ने बारबार कहा है कि यह कीमत चुकाना सही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर पाए. AAA के अनुसार, शुक्रवार को अमेरिका में एक गैलन डीजल की राष्ट्रीय औसत कीमत 6.37 अमेरिकी डॉलर थी, जबकि 22 सितंबर को यह रिकॉर्ड 6.52 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई थी. यूरोप में भी डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं.

एनर्जी पॉलिसी रिसर्च फाउंडेशन के डिस्टिंग्विश्ड फेलो माइकल लिंच ने कहा कि यूरोप में डीजल जारी करने का मतलब अमेरिका से डीज़ल का निर्यात कम होना हो सकता है, जिससे कुछ हफ़्तों के बाद कीमतें प्रति गैलन 2550 सेंट तक कम हो सकती हैं.

इस फैसले से कीमतें कम होनी चाहिए: मैक्रों

G7 ग्रुप की बारीबारी से मिलने वाली प्रेसिडेंसी अभी फ्रांस के पास है. मैक्रों की अध्यक्षता में हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद जारी एक बयान में यह घोषणा की गई. G7 देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, UK और US शामिल हैं, साथ ही EU का प्रतिनिधित्व भी है.

यह बयान मार्च में की गई उस घोषणा के बाद आया है जिसमें इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के सदस्य देशों ने तेल बाज़ार को स्थिर करने के लिए 426 मिलियन बैरल तेल और उससे बने उत्पादों को जारी करने की बात कही थी. यूरोपीय संघ के देशों ने लगभग 92 मिलियन बैरल देने का वादा किया था, जिसमें मुख्य रूप से कच्चे तेल से बने रिफाइंड उत्पाद शामिल थे. मैक्रों ने कहा, इस साझा फैसले और एकता से कीमतें कम होनी चाहिए. हम जो मात्रा जारी कर रहे हैं, उससे बाजार में लिक्विडिटी भी बढ़ेगी और कीमतें कम होंगी.

निर्यात पर रोक लगाने का फैसला

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के अलावा, रूस द्वारा अपनी रिफाइनरियों पर यूक्रेन के ड्रोन हमलों के कारण निर्यात पर रोक लगाने का फैसला भी एक वजह है. यूरोप रूस से डीजल का आयात नहीं करता है, लेकिन रूस से डीजल खरीदने वाले अन्य देशों को अब उपलब्ध बैरल के लिए यूरोप से मुकाबला करना होगा.

इस बीच, युद्ध से हुए नुकसान और निर्यात के रास्ते बंद होने के कारण फारस की खाड़ी के उत्पादक देशों से रिफाइंड उत्पादों की शिपमेंट में कमी आई है. इस बयान के बाद US में तेल की कीमतें 2 प्रतिशत गिर गईं, लेकिन रेमंड जेम्स के इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी एनालिस्ट पावेल मोल्चानोव ने कहा, एक अहम सवाल पर स्पष्टता न होने के कारण इसका असर कम हो गया. उन्होंने पूछा कि क्या 100 मिलियन बैरल की यह मात्रा मार्च में तय की गई मात्रा के अतिरिक्त है, या यह मौजूदा वादे का आखिरी हिस्सा है?

निर्यात पर रोक लगाने का कोई विचार नहीं: G7

अमेरिका में कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने मांग की थी कि ट्रंप घरेलू कीमतें कम करने के लिए अमेरिका से डीजल के एक्सपोर्ट पर रोक लगाएं. लेकिन G7 के बयान में कहा गया कि ग्रुप एकदूसरे को एनर्जी एक्सपोर्ट सीमित न करने पर सहमत हुआ है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ऑयल मार्केट के जानकारों का कहना है कि अमेरिका द्वारा एक्सपोर्ट पर रोक लगाने से कुछ समय के लिए कीमतें कम हो सकती हैं, लेकिन बाद में इसके उल्टे नतीजे हो सकते हैं क्योंकि गैसोलीन की सप्लाई कम हो सकती है. ऐसा इसलिए है क्योंकि रिफाइनरी के कुल प्रोडक्शन को कम किए बिना डीजल का प्रोडक्शन कम नहीं किया जा सकता.

हम एक्सपोर्ट पर रोक नहीं लगाने जा रहे हैं: ट्रंप

शुक्रवार को अमेरिका द्वारा एक्सपोर्ट पर संभावित रोक के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, हम ऐसा कभी नहीं करने वाले थे. ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा, हम एक्सपोर्ट पर रोक नहीं लगाने जा रहे हैं. हम वही करेंगे जो हमें करना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि यूरोप दुनिया में बड़ा योगदान दे रहा है, और हम भी ऐसा ही कर रहे हैं. जानकारों का कहना है कि इस रणनीति में जोखिम हैं.

राइस यूनिवर्सिटी के बेकर इंस्टीट्यूट में एनर्जी रिसर्च फेलो जिम क्रेन ने कहा कि इमरजेंसी में स्टॉक जारी करना एक शॉर्टटर्म समाधान हो सकता है, लेकिन इससे लंबे समय में नुकसान भी हो सकता है. क्रेन ने कहा, स्टॉक खाली करने से कुछ समय के लिए रिटेल फ्यूल की कीमतें कम हो जाएंगी, लेकिन इसकी कीमत यूरोप के लिए इमरजेंसी कवर कम होने के तौर पर चुकानी होगी.

स्ट्रैटेजिक रिजर्व को फिर से भरना होगा

भविष्य में कभी न कभी यूरोप और बाकी G7 देशों को अपने स्ट्रैटेजिक रिजर्व को फिर से भरना होगा. आम तौर पर वे कीमतें कम होने पर ऐसा करने की कोशिश करते हैं. किसी को नहीं पता कि ऐसा कब होगा. यह एक जोखिम है. क्रेन ने कहा कि दो युद्ध चल रहे हैं, जिनमें रिफाइनरियों और एक्सपोर्ट पर हमले हो रहे हैं, ऐसे में अपने इमरजेंसी स्टॉक को बर्बाद करने का यह सबसे अच्छा समय नहीं है. खासकर तब जब भविष्य की कीमतों या शांति समझौतों के बारे में कोई स्पष्टता न हो.