भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की अक्टूबर बैठक से पहले ब्याज दरों को लेकर बाजार में हलचल बढ़ गई है. Business Standard के पोल में शामिल 10 अर्थशास्त्रियों में से 8 ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान जताया है. इससे रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो सकता है.

5 से 7 अक्टूबर तक होगी MPC बैठक
RBI की छह सदस्यीय MPC की बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 तक होगी. बैठक के बाद 7 अक्टूबर को पॉलिसी का ऐलान किया जाएगा. RBI ने पिछली चार बैठकों में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है. इससे पहले 2025 में रेपो रेट में कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई थी.
अगर अक्टूबर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी होती है, तो यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार होगा जब RBI रेपो रेट बढ़ाएगा. फरवरी 2023 में रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 6.50% किया गया था.
महंगाई ने बढ़ाई RBI की चिंता
रेपो रेट बढ़ने की संभावना के पीछे महंगाई एक बड़ी वजह है. अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% हो गई, जो लगातार तीसरे महीने RBI के 4% के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर रही. खाद्य और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी ने महंगाई पर दबाव बढ़ाया है.
थोक महंगाई भी अगस्त में बढ़कर 9.92% हो गई, जबकि जुलाई में यह 9.78% थी. महंगे कच्चे तेल और भूराजनीतिक तनाव से आगे भी महंगाई का दबाव बढ़ने की चिंता है.
मजबूत ग्रोथ भी RBI के फैसले में अहम
दूसरी ओर, भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है. ऐसे में RBI के सामने महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखने के बीच संतुलन की चुनौती है. Business Standard के पोल में अर्थशास्त्रियों ने इसी वजह से अक्टूबर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है.
रुपये और विदेशी ब्याज दरों का भी असर
इस साल भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 6% कमजोर हुआ है. अमेरिका सहित कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों में बदलाव से भारत और अमेरिका के बीच ब्याज दर का अंतर भी RBI के लिए महत्वपूर्ण हो गया है. विदेशी निवेश के प्रवाह और रुपये की स्थिरता पर इसका असर पड़ सकता है.
लोन और EMI पर क्या असर पड़ेगा?
अगर RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकिंग सिस्टम में कर्ज की लागत बढ़ सकती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। खासकर रेपोलिंक्ड फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और दूसरे कर्ज पर इसका असर पड़ सकता है. हालांकि वास्तविक EMI में बदलाव बैंक की ब्याज दर और लोन की शर्तों पर निर्भर करेगा.



