CJP Mumbai Protest : के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मुंबई के शिवाजी पार्क इलाके में स्थानीय लोगों ने विरोध जताया है। को लेकर मंगलवार को CJP कार्यकर्ताओं और कुछ स्थानीय लोगों के बीच तीखी बहस भी हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारबार होने वाले बड़े प्रदर्शनों से इलाके की शांति, ट्रैफिक और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित होती हैं।

CJP ने 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन के मुताबिक, कार्यक्रम शाम 4 बजे गेट नंबर6 के पास होना है। हालांकि, मुंबई पुलिस पहले ही इस प्रदर्शन के लिए अनुमति देने से इनकार कर चुकी है। पुलिस ने वैकल्पिक जगह तलाशने की सलाह दी थी।
स्थानीय लोगों ने कहा प्रदर्शन से ज्यादा जगह और व्यवस्था पर आपत्ति
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्हें किसी संगठन के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से आपत्ति नहीं है, लेकिन शिवाजी पार्क जैसे रिहायशी इलाके में बड़े जमावड़े से परेशानी होती है। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ और हंगामे की वजह से इलाके में कामकाज प्रभावित होता है। स्थानीय लोगों ने ट्रैफिक, शोर और आसपास रहने वाले लोगों की आवाजाही को लेकर भी चिंता जताई है। स्थानीय लोगों ने पुलिस से मांग की है कि अगर बिना अनुमति प्रदर्शन किया जाता है तो पहले से पर्याप्त सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि शिवाजी पार्क के आसपास स्कूल, अस्पताल और रिहायशी इलाके हैं, इसलिए किसी बड़े जमावड़े से आम लोगों को परेशानी हो सकती है।
पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी
मुंबई पुलिस ने CJP के 2 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पुलिस ने शिवाजी पार्क में सभाओं से जुड़े नियमों, ट्रैफिक, शोर और आसपास के इलाकों में लोगों की आवाजाही प्रभावित होने जैसी चिंताओं का हवाला दिया है।
इसके बावजूद CJP संस्थापक अभिजीत डिपके ने प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है। उन्होंने पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बाद ‘जेल भरो आंदोलन’ का ऐलान किया था।
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CJP की क्या हैं प्रमुख मांगें?
CJP ने अपने आंदोलन के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। संगठन ने मतदाता सूची में बदलाव और SIR प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी की मांगों में SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करना और 2025 की मतदाता सूची को बनाए रखना शामिल है।
CJP ने कहा है कि अगर उसकी मांगें पूरी नहीं होती हैं तो आंदोलन को आगे देश के दूसरे हिस्सों तक ले जाया जाएगा। संगठन के मुताबिक, अक्टूबर के अंत में दिल्ली के जंतरमंतर पर भी प्रदर्शन किया जाएगा। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों और दावों पर अलग रुख रखा गया है। इसलिए CJP के आरोपों को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
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