Death Certificate New Rules: किसी व्यक्ति का बर्थ सर्टिफिकेट ) जितना जरुरी है, उतनी ही जरुरी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना है। 1  2026 यानी की आज से डेथ सर्टिफिकेट बनाने को लेकर नए नियम लागू कर दिए गए हैं। आमतौर पर डेथ सर्टिफिकेट और बर्थ सर्टिफिकेट 21 दिनों के अंदर बनाना जरुरी होता है, लेकिन अगर किसी वजह से डेथ सर्टिफिकेट बनाने में देरी होगी। तो उन्हें अदालत और अधिकारी की मंजूरी लेनी पड़ेगी। ऐसे में आइए जाने क्या हैं, क्या हैं नए नियम…

Death Certificate बनवाने के बदले नियम

अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद सीमित समय पर नहीं बनवाते तो 1 अक्टूबर यानी आज से नए नियम लागू कर दिए गए है, जिसके तहत अगर मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में 1 साल या उससे ज्यादा समय लगता है, तो ऐसे में जिला मजिस्ट्रेट, सबडिविजनल मजिस्ट्रेट या अधिकृत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट का आदेश लेना होगा।

वहीं अगर Death Certificate बनवाने में 2 साल से ज्यादा देरी करते है, तो यह मामला प्रथम श्रेणी के जूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने जाएगा। फिर मृत्यु से जुड़ी जानकारी और डॉक्यूमेंट की जांच के बाद जूडिशियल मजिस्ट्रेट का आदेश मिलेगा। फिर निर्धारित शुल्क जमा करनी होगी। इसके बाद ही मृत्यु प्रमाण पत्र  बनवा सकेंगे।

21 दिन के अंदर Death Certificate बनवाना सरल

में जन्म और मृत्यु का सर्टिफिकेट बनवाना जरूरी होता है, सामान्य रुप से किसी भी व्यक्ति के मृत्यु के 21 दिन के अंदर ही उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लेना चाहिए। इससे Death Certificate बनवाने में किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होगी और ना ही कोई शुल्क देना होगा।

Death Certificate पत्र बनवाना क्यों है जरुरी?

मृत्यु प्रमाण पत्र महज एक पत्र नहीं बल्कि यह एक बहुत जरुरी सरकारी डॉक्यूमेंट है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यह बीमा क्लेम, बैंक अकाउंट, निवेश, पीएफ, म्यूचुअल फंड, शेयर या डीमैट अकाउंट, प्रॉपर्टी ट्रांसफर और टैक्स जैसे जुड़े मामलों में Death Certificate की जरुरत पड़ सकती है। इसलिए किसी भी व्यक्ति के मृत्यु के बाद उसका डेथ सर्टिफिकेट बनवाना जरुरी होता है।

Death Certificate बनवाने के लिए जरूरी दस्तावेज

  • किसी भी मृत व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट की जरुरत पड़ती है। आइए जाने…
  • हॉस्पिटल की ओर से जारी किए गए Medical Certificate या cause of death certificate 
  • मृत व्यक्ति की पर्सनल इंफार्मेशन जैसे नाम, जन्म तिथि, मृत्यु की डेट , जगह, मृत्यु का कारण, सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान, निर्धारित फॉर्म।
  • आवेदन करने से पहले संबंधित नगर निगम, नगरपालिका, पंचायत या रजिस्ट्रार कार्यालय की आवश्यकताएं जांचना जरूरी है।