Teejan Bai Tribute: छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की पहचान पद्म विभूषण और पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को रविवार 5 जून को रायपुर एम्स से अंतिम दर्शन के लिए बाहर लाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एम्स पहुंचे। यहां से पार्थिव शरीर को उनके पुस्तैनी गांव गनियारी ले जाया गया और राजकीय सम्मान के अंतिम संस्कार किया गया।

प्रख्यात पंडवानी कलाकार तीजन बाई जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उन्होंने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली उपस्थिति और अनोखी प्रस्तुति से महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत किया। अपनी विलक्षण प्रतिभा, समर्पण और वर्षों की साधना से उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध पंडवानी परंपरा को…

— President of India July 5, 2026

तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीएम विष्णुदेव साय, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और मप्र के सीएम मोहन यादव ने श्रद्धाजलि अर्पित की है। 70 साल की तीजन बाई के निधन से कला जगत में शोक की लहर है।

सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और…

— Narendra Modi July 5, 2026

मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

रविवार सुबह मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एम्स रायपुर पहुंचे और तीजन बाई को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उनके साथ विधायक पुरंदर मिश्रा सहित कई जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और आमजन ने भी अंतिम दर्शन कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ समेत, पूरे देश के कला और संस्कृति जगत में शोक है।

#WATCH | Nava Raipur | Chhattisgarh CM Vishnu Deo Sai says, “Teejan Bai has passed away, who was honoured with the Padma Vibhushan and Padma Shri. She had brought glory to Chhattisgarh across the entire country and the world. We pay humble tribute to her…” pic.twitter.com/SxnGhFRMKh

— ANI July 5, 2026

पंडवानी गायिकी को दुनिया में पहचान दिलाई

तीजन बाई ने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से पंडवानी गायिकी को देश से लेकर विदेशों तक नई पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को मंच पर प्रस्तुति की कला ने उन्हें भारतीय लोक संस्कृति की सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में सुमार किया।

भारतीय लोक कला में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया।

सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका, ‘पद्म विभूषण’ डॉ. तीजन बाई जी का निधन अत्यंत दुःखद है। विनम्र श्रद्धांजलि।

उन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिभा, सशक्त अभिव्यक्ति और संगीत साधना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा ‘पंडवानी’ को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। भारतीय लोक कला एवं सांस्कृतिक…

— Yogi Adityanath July 5, 2026

जानें, तीजन बाई के बारे में

  • छत्तीसगढ़ के भिलाई के गांव गनियारी में जन्मी तीजन बाई के पिता का नाम हुनुकलाल परधा और माता का नाम सुखवती था।

  • तीजन अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियां गातेसुनाते देखतीं थीं और धीरेधीरे उन्हें ये याद होने लगी।

  • उनकी अद्भुत लगन और प्रतिभा को देखकर उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें अनौपचारिक प्रशिक्षण भी दिया।

  • 13 साल की उम्र में तीजन बाई ने अपनी पहली मंच प्रस्तुति दी।

  • 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2007 में नृत्य शिरोमणि से भी सम्मानित किया गया।

  • एक दिन प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उन्हें सुना और तभी से तीजन बाई का जीवन बदल गया।

  • तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी समेत कई लोगों के सामने देशविदेश में उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन किया।

  • उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की और मॉरीशस सहित 17 से अधिक देशों में छत्तीसगढ़ की समृद्ध पंडवानी गायिका का डंका बजाया।

लंबे समय से चल रहीं थीं बीमार 

तीजन बाई जीवन के आखिरी पड़ाव में काफी कठिन दौर से गुजरीं। बड़े बेटे की मौत के सदमे के बाद उन्होंने अपनी ब्लड प्रेशर की दवाई लेना बंद कर दिया था, जिसके कारण साल 2024 में उन्हें अचानक पैरालिसिस यानी लकवा मार गया। तब से वह लगातार बीमारी चल रही थीं, जिसके कारण उनका शरीर बहुत कमजोर हो गया था और वह लंबे समय से बिस्तर पर थीं।
हाल ही में फेफड़ों में पानी भरने, निमोनिया और लो ब्लड प्रेशर की शिकायत होने के बाद उन्हें 27 मई को एम्स रायपुर के क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान शनिवार, 4 जुलाई की रात 3:15 बजे उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।

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