रॉ एजेंट खतना करवाकर पाकिस्तान में बन गया मेजर…बलूचिस्तान, बांग्लादेश-अमेरिका तक हडकंप….!

RAW agent became major in Pakistan after getting circumcised...panic in Balochistan, Bangladesh and AmericaRAW agent became major in Pakistan after getting circumcised...panic in Balochistan, Bangladesh and America

नई दिल्ली: नवंबर, 1975 की किसी रात को एक खुफिया एजेंट को पाकिस्तान भेजा गया। यह एजेंट थे भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी रॉ (RAW) के रवींद्र कौशिक। उन्होंने पाकिस्तान में रहकर वो कारनामे किए कि जिससे भारत सरकार को पाकिस्तान को हर मोर्चे पर मात देने में कामयाबी मिली। रवींद्र कौशिक को पाकिस्तान भेजे जाने से पहले खतना भी किया गया और उन्हें एक मुस्लिम नाम दिया गया, ताकि उनकी पहचान उजागर न हो सके। हाल ही में एक अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने रॉ पर पाबंदी की मांग की है। ट्यूजडे TRIVIA में आज जानते हैं रॉ के एजेंट रवींद्र कौशिक की कहानी। साथ ही यह भी जानेंगे कि रॉ कैसे काम करती है? उसकी अब तक की उपलब्धियां क्या हैं?

चीन का प्रभाव कम करने के लिए बनी थी रॉ
RAW की शुरुआत 1968 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य चीन के प्रभाव को कम करना था। लेकिन धीरे-धीरे इसका ध्यान भारत के दूसरे प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पर चला गया। RAW और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) पिछले तीन दशकों से एक-दूसरे के खिलाफ गुप्त ऑपरेशन कर रहे हैं। कश्मीर में चल रहा विवाद इन टकरावों को और बढ़ा रहा है। लेकिन जानकार मानते हैं कि अफगानिस्तान अब एक नया अखाड़ा बन सकता है। रॉ चीन, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों पर गहरी नजर रखती है।

थिएटर आर्टिस्ट से खुफिया एजेंसी का सफर
1952 में राजस्थान के श्रीगंगानगर के एक पंजाबी परिवार में जन्में कौशिक ने कभी नहीं सोचा था कि वह भारत के इतिहास के सबसे महान जासूस कहलाएंगे। उन्हें किशोरावस्था से ही थिएटर से लगाव था। एक बार थिएटर के दौरान उन पर रॉ अधिकारी की नजर पड़ी। इसके बाद उनकी जिंदगी बदल गई। वह 23 साल की उम्र में हमेशा के लिए पाकिस्तान चले गए। उन पर एक फिल्म भी बनी ‘एक था टाइगर’, जिसमें सलमान खान मुख्य भूमिका में थे।

2 साल की कड़ी ट्रेनिंग और पहला मिशन पाकिस्तान
रवींद्र कौशिक जब थिएटर कर रहे थे तो उस वक्त वह एक इंडियन आर्मी अफसर का रोल निभा रहे थे, जो चीन की सेना के पकड़े जाने के बाद भारत से जुड़ी अहम जानकारी देने से मना कर देता है। उनकी इस परफॉर्मेंस को देखकर रॉ अफसर इतना खुश हुआ कि उसने उन्हें रॉ में आने का ऑफर दे डाला। रॉ में आने के बाद रवींद्र कौशिक को 2 साल की कड़ी ट्रेनिंग दी गई। 1975 वह पहली बार मिशन एक्स के तहत पाकिस्तान भेजे गए।

पाकिस्तान में जब मिला मुस्लिम नाम
रवींद्र को पाकिस्तान में ‘नबी अहमद शाकिर’ के नाम से भेजा गया। यहां उन्होंने सबसे पहले कराची की ‘लॉ यूनिवर्सिटी’ में दाखिला लिया। वहां से ग्रेजुएट होने के बाद उन्हें पाकिस्तान सेना में कमीशन अफसर के रूप में नौकरी मिल गई। बाद में रवींद्र कौशिक को पाकिस्तान सेना के मेजर पोस्ट पर पदोन्नति भी मिली। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें ‘ब्लैक टाइगर’ नाम दिया था।

पाकिस्तानी बनकर रहे, मुस्लिम लड़की से की शादी
रविंद्र कौशिक ने पाकिस्तान में एक स्थानीय लड़की से शादी भी की। वह एक बेटी के पिता भी बने। वहां उन्होंने उर्दू सीखी। 1979 से 1983 तक उन्होंने पाकिस्तान से अहम जानकरियां भेजीं, जिसकी वजह से रॉ को भारत की डिफेंस रणनीति को मजबूत करने में काफी मदद मिली। इस दौरान पाकिस्तान के हर कदम पर भारत भारी पड़ता था क्योंकि उसकी सभी योजनाओं की जानकारी कौशिक की ओर से भारतीय अधिकारियों को दे दी जाती थी।

एक भारतीय जासूस ने खोल दिया था राज
रॉ ने एक दूसरे जासूस को कौशिक से मिलने पाकिस्तान भेजा था जिसे पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी ने पकड़ लिया। दरअसल, 1983 में जब भारतीय जासूस इनायत मसीहा बॉर्डर क्रॉस करने के दौरान पाकिस्तानी सेना के हत्थे चढ़ गई। उन्होंने पाकिस्तानी सेना से पूछताछ में रवींद्र कौशिक का राज खोल दिया। जासूसी के आरोप में कौशिक को गिरफ्तार करके उन्हें मुल्तान की जेल में डाल दिया गया।

पाकिस्तान ने दिया लालच, पर नहीं खोला मुंह
पाकिस्तान सेना को कभी ये अहसास ही नहीं हुआ कि रवींद्र कौशिक जैसा एक भारतीय जासूस उनके बीच काम कर रहा है। रवींद्र कौशिक को लालच दिया गया कि अगर वो भारतीय सरकार से जुड़ी गोपनीय जानकारी दे दें तो उन्हें छोड़ दिया जाएगा। मगर, कौशिक ने अपना मुंह नहीं खोला। पाकिस्तान में कौशिक को 1985 में मौत की सजा सुनाई गई, जिसे बाद में उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया। उन्हें पाकिस्तान की कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई, मगर बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा घटाकर उम्रकैद कर दी। 2001 में मियांवाली जेल में रवींद्र का दिल के दौरा पड़ने से मौत हो गई।

रॉ पर बलूचिस्तान में अलगाववादियों को बढ़ावा देने का आरोप
रॉ पर हमेशा से पड़ोसी देशों के मामलों में दखल देने के आरोप लगते रहे हैं। पाकिस्तान को लगता है कि अफगानिस्तान में भारत की बढ़ती राजनयिक गतिविधियां RAW एजेंटों के लिए एक छलावा हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि RAW अफगानिस्तान की सीमा से लगे पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववादियों को ट्रेनिंग और हथियार दे रहा है। RAW इन आरोपों से इनकार करता है। वहीं, रॉ ने ISI पर जुलाई 2008 में काबुल में भारतीय दूतावास पर बमबारी करने का आरोप लगा चुका है।

चीन के हमले को देखते हुए बनी थी रॉ
1968 तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) भारत की आंतरिक खुफिया जानकारी के साथ-साथ विदेशों की खुफिया जानकारी भी संभालता था। लेकिन 1962 में चीन के साथ सीमा युद्ध में भारत के खराब प्रदर्शन के बाद एक अलग विदेशों के लिए खुफिया एजेंसी की जरूरत महसूस हुई। रॉ में काम कर चुके मेजर जनरल वीके सिंह ने अपनी 2007 में छपी किताब “इंडियाज एक्सटर्नल इंटेलिजेंस: सीक्रेट्स ऑफ रिसर्च एंड एनालिसिस विंग” में लिखा है-हमारी खुफिया जानकारी हमले के लिए चीनी तैयारी का पता लगाने में विफल रही।” इसका मतलब है कि हमारी खुफिया एजेंसी को पता ही नहीं चला कि चीन हमला करने वाला है।

पीएम के साथ बदल जाती है रॉ की भूमिका
RAW को विदेशों में भारत के प्रभाव को बढ़ाने का श्रेय दिया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि RAW की ताकत और भारत की विदेश नीति में इसकी भूमिका अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के समय में बदलती रही है। RAW का दावा है कि इसने कई विदेश नीति सफलताओं में योगदान दिया है।

अमेरिकी आयोग ने क्यों की रॉ पर पाबंदी की मांग
अमेरिका के यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) ने 2025 की वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। रॉ पर प्रतिबंध लगाने की मांग इसी रिपोर्ट का हिस्सा है। हालांकि, भारत ने यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट को खारिज करते हुए इसे ‘पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित’ बताया है। इसमें कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग और कनाडा सरकार की खुफिया जानकारी ने रॉ के एक अधिकारी और छह राजनयिकों के न्यूयॉर्क में 2023 में एक अमेरिकी सिख अलगाववादी की हत्या के प्रयास से जुड़े आरोपों की पुष्टि की है। संस्था ने अमेरिकी सरकार से रॉ पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। अमेरिका के न्याय मंत्रालय ने 17 अक्टूबर को भारतीय नागरिक विकास यादव के खिलाफ भाड़े पर हत्या और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करने की घोषणा की।