AIIMS Police Station Gorakhpur Theft: इश्क में लोग मजनू, दीवाने और शायर बन जाते हैं और जब दिल टूट जाता है तब देवदास भी बन जाते है। और तन्हाई दूर करने के लिए शराब का सहारा भी लेते है। मगर यहां तो सब कुछ उल्टा हो गया है। गोरखपुर के इन युवकों को इश्क, प्यार और मोहब्बत कुछ इस कदर था कि माशूकाओं के शौक पूरे करने के लिए वे चोर बन गए।

इश्क ने बनाया चोर: प्रेमिकाओं को महंगे मोबाइल दिलाने के लिए वैगनआर से चोरी; गोरखपुर में दो युवक गिरफ्तार​
इश्क ने बनाया चोर: प्रेमिकाओं को महंगे मोबाइल दिलाने के लिए वैगनआर से चोरी; गोरखपुर में दो युवक गिरफ्तार​

जी हां अकसर पुलिस चोरी की घटना को एक सामान्य अपराध मानती है और अक्सर आपने और हमने भी चोरी की तमाम घटनाएं देखी और सुनी है। लेकिन आज हम आपको जिस घटना के बारे में बताने जा रहे हैं वास्तव में उसे जानने के बाद आपको दुख तो अवश्य होगा लेकिन घोर आश्चर्य भी होगा।

अक्सर चोर अपने शौक या फिर अपने परिवार के भरण पोषण के लिए चोरी जैसी वारदात को अंजाम देते है। लेकिन क्या कभी आपने देखा या सुना है कि कोई युवक अपनी माशूका की फरमाइश पूरी करने के लिए अपने भविष्य को दांव पर लगा रहा हो।

माशूकाओं को महंगा और कीमती फोन दिलाने के लिए की चोरी

दरअसल यूपी के गोरखपुर में ऐसा ही हुआ है। यहां दो युवकों ने अपने इश्क में मर मिटने के बजाय चोरी करके अपनी माशूकाओं की महंगी फरमाइश पूरी करना ही मुनासिब समझा। गोरखपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार इन युवकों ने अपनी माशूकाओं को महंगा और कीमती फोन दिलाने के लिए न सिर्फ अपना भविष्य दांव पर लगाया बल्कि साधन के रूप में अपने परिजनों की वैगनार कार का भी इस्तेमाल किया और अब वह कार भी पुलिस थाना परिसर में सीज कर दी गई है।

माशूकाओं ने की कीमती और महंगे मोबाइल की डिमांड

इतना ही नहीं इन दो दोस्तों को भी बड़े दरबार की यात्रा करनी पड़ गई है। दोनों दोस्त के एम्स थाना अंतर्गत नंदा नगर इलाके के निवासी हैं। गलती से या सौभाग्य से इन दोनों दोस्तों को अपनी हम उम्र फैशनपरस्त दो बालाओं से इश्क हो गया। दोनों की जब आपस में बात बढ़ी तो उनकी कुछ उम्मीदें भी बढ़ीं। बातचीत में उन युवतियों ने कीमती महंगे मोबाइल की मांग कर डाली। अब इन जुझारू युवकों के पास कोई चारा नहीं था हालांकि बजट और पॉकेट अलाऊ नहीं कर रहा था, लेकिन अब बात तो प्रतिष्ठा की थी।

सरिया, सीमेंट, गिट्टी और बालू की करते थे चोरी

उन्होंने प्लानिंग की और एक योजना के तहत घनी आबादी से दूर जहां कुछ नए मकान बनाए जा रहे थे वहां उन्होंने पहले रेकी की। दरअसल शहर से थोड़ा हटकर खेतों में मेड़ों पर या सड़क के किनारे तमाम मकान बनने शुरू हुए हैं जहां आबादी भी नहीं है। दोनों युवक अपनी वैगनआर कार लेकर वहां पहुंचे और प्लाट होल्डरों द्वारा सरिया, सीमेंट, गिट्टी या बालू उन्हें बोरियों में भरकर रातोंरात ले आए और दिन भर कस्टमर खोज कर उन्हें बेचकर पैसे कमाए। अब वे यही काम हर रोज रात में करने लगे।

लेकिन बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाती। मामले की भनक पुलिस को लगी और एक रात अचानक पुलिस उनके घर पर पहुंच गई और इन दोनों युवकों को पकड़ लिया। में कुछ घंटे के भीतर ही दोनों टूट गए और अपनी कहानी पुलिस के अधिकारियों को सुनाई। एम्स थाने के जिम्मेदारों से नवभारत की टीम से बातचीत में यह कहानी सामने आई।