तेहरान। लगभग चार महीने के इंतजार के बाद ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों की अंतिम विदाई का कार्यक्रम आज शुक्रवार, 3 जुलाई से शुरू हो गया।

ईरानी समाचार एजेंसी इरना के मुताबिक नौ जुलाई तक चलने वाले इन कार्यक्रमों को केवल राजकीय शोक तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि इन्हें ईरान अपनी धार्मिक, राजनीतिक और जनसमर्थन की ताकत के प्रदर्शन के रूप में भी पेश कर रहा है।

ईरानी सरकार और धार्मिक नेतृत्व लोगों से बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर खामेनेई को श्रद्धांजलि देने की अपील कर रहे हैं। समारोह में 1.5 से 2 करोड़ लोगों के शामिल होने का अनुमान है।

फिलहाल तेहरान की ग्रैंड मोसाला मस्जिद में खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों के ताबूत रखे गए हैं। इनमें उनके एक दामाद, सबसे बड़ी बेटी, 14 माह की पोती जहरा मोहम्मदी गोलपायेगानी और नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की पत्नी के ताबूत भी शामिल हैं।

खामेनेई के पार्थिव शरीर को ईरानी झंडे में लपेटा गया है, जबकि ताबूत पर ‘या हुसैन’ अंकित लाल झंडा भी रखा गया है। सुरक्षा कारणों से वर्तमान सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक समारोहों में शामिल नहीं होंगे।

तेहरान की सड़कों पर लाखों लोग जुट रहे हैं। पुरुषों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की मौजूदगी के बीच लगातार श्रद्धांजलि और समर्थन के नारे लगाए जा रहे हैं।

ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान के शीर्ष नेता भी मोसाला परिसर पहुंचकर श्रद्धांजलि दे चुके हैं। इनमें राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ, मुख्य न्यायाधीश गोलामहोसैन मोहसेनी एजेई और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मोहसिन रेजाई शामिल हैं।

126 दिनों तक कैसे सुरक्षित रखा खामेनेई का शव?
रॉयटर्स के मुताबिक, खामेनेई के पार्थिव शरीर को फोरेंसिक मोर्चरी के रेफ्रिजरेटेड कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखा गया था। इस्लाम में रासायनिक तरीके से शव संरक्षित करने की अनुमति नहीं होने के कारण केवल कम तापमान का सहारा लिया गया।

शिया परंपरा के अनुसार युद्ध जैसी असाधारण परिस्थितियों में दफन में देरी और ठंडे तापमान में पार्थिव शरीर सुरक्षित रखने की धार्मिक अनुमति ली गई थी।

खामेनेई की अंतिम विदाई का कार्यक्रम
खामेनेई की अंतिम विदाई का पूरा कार्यक्रम तय है। आज 3 जुलाई से कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है और 9 जुलाई को अयातुल्ला अली खामेनेई को सुपुर्दएखाक किया जाएगा।

तेहरान में आज शुक्रवार, 3 जुलाई से श्रद्धांजलि से कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
45 जुलाई के बीच तेहरान स्थित ग्रैंड मोसाला मस्जिद में अली खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों के ताबूत अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि के लिए रहेंगे। इस दौरान कई विदेशी मेहमानों के साथसाथ आम लोग भी खामेनेई के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि दे सकेंगे।
67 जुलाई को खामेनेई की अंतिम यात्रा निकलेगी, जो कि तेहरान के अलगअलग इलाकों से गुजरते हुए कोम पहुंचेगी, जो इस्लाम की शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। खामेनेई ने यहीं तालीम हासिल की थी।
8 जुलाई को इराक के नजफ और कर्बला में सार्वजनिक अंतिम यात्राएं निकाली जाएंगी। नजफ में इमाम अली दरगाह है। कर्बला में इमाम हुसैन और उनके सौतेले भाई अब्बास की दरगाहें भी शिया मुसलमानों के सबसे पवित्र स्थलों में गिनी जाती हैं।
9 जुलाई को अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को वापस ईरान लाया जाएगा। उसी दिन मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में उन्हें सुपुर्दएखाक किया जाएगा।

जनसमर्थन के जरिए दुनिया को संदेश
एएनआइ के अनुसार, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह देश के इतिहास के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में से एक होगा। समारोह में 30 से अधिक देशों के नेता और प्रतिनिधि तथा 90 देशों के धार्मिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

पाकिस्तान, रूस और चीन समेत कई देशों ने अपने प्रतिनिधिमंडल भेजने की पुष्टि की है। शोक अवधि के दौरान खामेनेई के पार्थिव शरीर को ईरान के अलावा इराक के कुछ शहरों में भी ले जाया जाएगा।

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इस अभूतपूर्व जनसमूह और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के जरिए अमेरिका और इजरायल सहित दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि युद्ध के बावजूद उसकी राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था मजबूत बनी हुई है।

माना जा रहा है कि यह शक्ति प्रदर्शन अमेरिका के साथ संभावित शांति वार्ता और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े रणनीतिक मुद्दों पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की कोशिश भी हो सकता है।

सुरक्षा पर विशेष नजर
एपी के अनुसार, करोड़ों लोगों की संभावित मौजूदगी को देखते हुए पूरे देश में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। इससे पहले 1989 में अयातुल्ला रुहोल्ला खोमैनी के अंतिम संस्कार और बाद में जनरल कासेम सोलेमानी के दफन समारोह के दौरान भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति बन चुकी है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। इसी वजह से इस बार सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल भी पहुंचा
भारत सरकार की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गरेटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन अंतिम संस्कार में शामिल होने तेहरान पहुंचे।

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद तथा भारतीय धर्मगुरुओं के प्रतिनिधिमंडल, जिसमें जैन मुनि आचार्य लोकेश भी शामिल हैं, ने भी खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की।

विदेशी नेताओं का जमावड़ा
तेहरान में विदेशी मेहमानों के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, चीन, रूस, ओमान, जार्जिया और इराक के प्रतिनिधिमंडलों के अलावा लेबनान के अमाल मूवमेंट, फलस्तीनी प्रतिनिधियों और अन्य देशों के धार्मिक नेताओं ने भी समारोह में भाग लेने की पुष्टि की है।