Badrinath Dhaam DJ Army Notice: उत्तराखंड में देहरादून से बड़ी खबर है। जहां हुए एक सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर सेना को नोटिस भेजा गया है। पूरा मामला मामला बद्रीनाथ धाम में हुए एक सांस्कृतिक कार्यक्रम से जुड़ा है। सबसे बड़ी बात जहां धार्मिक मान्यता के अनुसार शंख भी नहीं बजाया जाता वहां सेना के कार्यक्रम में डीजे बजा दिया गया। इस मामले में सेना को नोटिस भी भेज दिया गया है।

कुछ दिन पहले हुआ था कार्यक्रम
आपको बता दें कुछ दिन पहले एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में जहां हजारों लोगों मौजूद रहे वहीं तेज आवाज में डीजे बजाया गया। इसके साथ ही स्थानीय कलाकारों ने भी गाने गाए। जैसे ही इस कार्यक्रम का वीडियो वायरल हुआ उसके बाद जमकर कार्यक्रम का विरोध शुरू हो गया। देखते ही देखते सोशल मीडिया पर यह कार्यक्रम ट्रेंड करने लगा।
सेना से मांगा जबाव
अब सभी सरकार से सवाल कर रहे हैं कि आखिर बद्रीनाथ जैसी जगह है जहां पर भगवान बद्री विशाल विराजमान है और हिंदू ग्रंथों के अनुसार वहां पर शंख भी नहीं बजाया जाता इसके साथ ही स्थानीय कुत्ते भी वहां पर भोंकते नहीं है ऐसे में इतने बड़े कार्यक्रम का आयोजन के परमिशन किसने दी? इसके साथ ही वो पूरा क्षेत्र ईको सेंसटिव जोन भी है। सोशल मीडिया पर जॉब सरकार के ऊपर इस कार्यक्रम को लेकर सवाल किए गए तो अब जाकर जिला अधिकारी ने सेना को एक नोटिस जारी कर दिया है। उनका कहना है की सेना द्वारा यह कार्यक्रम कराया गया जिसकी परमिशन नहीं ली गई।
केंद्रीय मंत्री ने जताया विरोध
आपको बता दें विवाद की शुरुआत तब हुई जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने सोशल मीडिया पर इस आयोजन की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम में शांति और संयम की परंपरा रही है, यहां तक कि शंख बजाना भी वर्जित है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। जोशी ने कहा, ‘हिमालय देवात्मा है, भगवान शंकर का निवास है. देवभूमि को बाजारू संस्कृति में बदलना और इसे नाच घर बनाना करोड़ों भारतीयों की आस्था पर गहरा आघात है।’ उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से ऐसे आयोजनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
शंकराचार्य मठ और पुरोहितों ने जताया कड़ा विरोध
चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने कहा कि महोत्सव के नाम पर धाम की मर्यादा के विपरीत फूहड़ कार्यक्रम पेश किए गए। इसी के साथ्ज्ञ ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम के शंकराचार्य मठ के प्रभारी स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि ने भी इसे सांस्कृतिक प्रदूषण करार देते हुए कहा कि जहां भगवान ब्रह्मकमल भी विशेष शुद्धता के साथ चढ़ाया जाता है, वहां डीजे और नाचगाने का शोर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।



