NSE Market Cap: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने अपनी लिस्टिंग के साथ ही ग्लोबल लेवल पर एक नया मुकाम हासिल कर लिया है. गुरुवार को शेयर बाजार में कदम रखते ही इसका मार्केट कैप 47 अरब डॉलर यानी करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया. इस शानदार आंकड़े के साथ NSE दुनिया का छठा सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज बन गया है. बीएसई पर इसके शेयर 1,818 रुपये के भाव पर बंद हुए. इसका इश्यू प्राइस 1,785 रुपये तय किया गया था, जबकि बाजार में इसकी एंट्री 1,800 रुपये पर हुई. निवेशकों ने इस लिस्टिंग का जोरदार स्वागत किया है. कुल टर्नओवर के मामले में ये देश का सबसे बड़ा एक्सचेंज है.

दुनिया के टॉप एक्सचेंजों से टक्कर

ग्लोबल मार्केट पर नजर डालें तो न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज की पैरेंट कंपनी इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज 87.8 अरब डॉलर के साथ पहले नंबर पर काबिज है. ब्लूमबर्ग के डेटा के मुताबिक, हांगकांग एक्सचेंज का मार्केट कैप 63.6 अरब डॉलर है. वहीं डॉयचे बोर्स 59.5 अरब डॉलर के साथ लिस्ट में तीसरे स्थान पर है. नैस्डैक 53.3 अरब डॉलर के साथ चौथे नंबर पर है. लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप 53 अरब डॉलर के मार्केट कैप के साथ पांचवें नंबर पर मौजूद है. अब इस लिस्ट में भारत के NSE ने अपनी मजबूत जगह बना ली है.

ऊंचे वैल्यूएशन का असली कारण

अगर हम साइज की बात करें तो NSE का मार्केट बेस दुनिया के टॉप एक्सचेंजों से थोड़ा छोटा जरूर है. इसके बावजूद इसका प्राइसटूअर्निंग मल्टीपल सबसे ज्यादा है. NSE फिलहाल 43 गुना के P/E पर ट्रेड कर रहा है. दुनिया के टॉप पांच एक्सचेंज 25 से 30 गुना के मल्टीपल पर ट्रेड करते हैं. वहीं टॉप 10 एक्सचेंजों की रेंज 24 से 34 गुना के बीच है. इस प्रीमियम वैल्यूएशन के पीछे कंपनी का शानदार एबिटा मार्जिन है. NSE का ऑपरेटिंग मार्जिन 66.9 प्रतिशत है. ये दुनिया के टॉप पांच एक्सचेंजों की 5380 प्रतिशत की रेंज में काफी ऊपरी स्तर पर है. निवेशकों को पूरा भरोसा है कि आगे चलकर कंपनी की कमाई में भारी इजाफा होगा.

तेजी से बढ़ने वाला है टर्नओवर

भारत के कैपिटल मार्केट में बड़े स्ट्रक्चरल बदलाव देखने को मिल रहे हैं. लोगों की इनकम लगातार बढ़ रही है. अब आम नागरिक अपनी बचत को सिर्फ बैंक में रखने के बजाय शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं. रिटेल निवेशकों की इस बढ़ती भागीदारी से बाजार को तगड़ा सपोर्ट मिल रहा है. रेडसीर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कैश मार्केट का टर्नओवर बहुत तेजी से बढ़ने वाला है. अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में ये 280 लाख करोड़ रुपये रहेगा. वहीं वित्त वर्ष 2030 तक ये 14 से 16 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़कर 473 से 507 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि NSE का ग्रोथ इंजन आने वाले सालों में पूरी रफ्तार से दौड़ने वाला है.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.
ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं।