PB Fintech Crash: शेयर बाजार में कभीकभी एक खबर पूरी कंपनी की दिशा बदल देती है. कुछ ऐसा ही पीबी फिनटेक के साथ हुआ है. पॉलिसीबाजार की इस पैरेंट कंपनी के शेयरों में इन दिनों मानो भूचाल आया हुआ है. जो निवेशक कल तक मुनाफे की उम्मीद लगाए बैठे थे, आज वो भारी नुकसान देखकर परेशान हैं. 24 सितंबर को कंपनी का शेयर 36 फीसदी के लोअर सर्किट के साथ धड़ाम हो गया. ये भारी भरकम गिरावट ₹1,207.20 के 52वीक लो पर जाकर रुकी. आज यानी शुक्रवार को भी हालात बहुत अच्छे नहीं हैं. बाजार खुलते ही शेयर में थोड़ी हरियाली दिखी थी. शुरुआती सत्र में शेयर करीब 4% बढ़ा, लेकिन चंद मिनटों में ही ये वापस लाल निशान में आ गया. खबर लिखे जाने तक शेयर करीब 4.34% टूटकर ₹1,146 के आसपास ट्रेड कर रहा है.

निवेशकों के एक दिन में डूबे करोड़ों रुपये
शेयर बाजार में उतारचढ़ाव बेहद आम बात है. लेकिन पीबी फिनटेक में आई ये गिरावट मामूली बिल्कुल नहीं है. सिर्फ एक कारोबारी सत्र में कंपनी का मार्केट कैप ₹31,000 करोड़ से ज्यादा साफ हो गया. कंपनी का कुल मार्केट कैप जो पहले काफी मजबूत दिख रहा था, वो अचानक घटकर सिर्फ ₹55,860 करोड़ रह गया है. इतनी बड़ी बिकवाली ने बाजार के बड़ेबड़े जानकारों को भी हैरान कर दिया है. साल 2026 की शुरुआत से ही इस शेयर पर लगातार दबाव दिख रहा था. इस साल अब तक पीबी फिनटेक का शेयर 33.2 फीसदी टूट चुका है. इसी अवधि में निफ्टी 50 में सिर्फ 11.8 फीसदी की गिरावट आई है. इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि पॉलिसीबाजार के शेयरों में गिरावट बाजार के सामान्य ट्रेंड से कहीं ज्यादा गहरी है.
आईआरडीएआई का वो नया नियम जिससे मचा हड़कंप
अब सबसे बड़ा सवाल उठता है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हो गया जिससे शेयर इस कदर क्रैश हो गए. इसकी मुख्य वजह बीमा रेगुलेटर आईआरडीएआई का एक नया प्रस्ताव है. रेगुलेटर ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन की लिमिट तय करने के लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है. आसान भाषा में समझें तो पॉलिसी बेचने पर कंपनियों को जो कमीशन मिलता है, अब सरकार उस पर लगाम लगाने वाली है.
पॉलिसीबाजार असल में एक एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म है. यहां लोग अलगअलग कंपनियों के इंश्योरेंस प्लान एक ही जगह पर देखते हैं. जब कोई ग्राहक प्लेटफॉर्म से पॉलिसी खरीदता है, तो इंश्योरेंस कंपनी पॉलिसीबाजार को भारी कमीशन देती है. यही कमीशन पीबी फिनटेक की कमाई का सबसे बड़ा जरिया है.
नए प्रस्ताव में हेल्थ इंश्योरेंस पर नई पॉलिसी के लिए 1520% कमीशन तय करने की बात कही गई है. वहीं रिन्यूअल करने या पॉलिसी पोर्ट करने पर कमीशन को घटाकर महज 510% करने का सुझाव है. सिर्फ हेल्थ ही नहीं, मोटर लाइफ इंश्योरेंस में भी कमीशन कैपिंग का प्रस्ताव रखा गया है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। लाइफ इंश्योरेंस में पॉलिसी की अवधि के हिसाब से पहले साल का कमीशन 520% के बीच तय करने का विचार है. अब आप खुद सोच सकते हैं कि अगर इसी कमीशन पर कैंची चल गई, तो कंपनी का मुनाफा कैसे बचेगा. इसी डर ने बाजार में तहलका मचा रखा है.
ब्रोकरेज हाउस ने बुरी तरह घटाया टारगेट
इस बड़े बदलाव की आहट सुनते ही ग्लोबल से लेकर घरेलू ब्रोकरेज हाउस तक ने कंपनी पर अपना रुख बदल लिया है. दिग्गज ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म HSBC ने पीबी फिनटेक की रेटिंग को सीधे तौर पर डाउनग्रेड कर दिया है. उन्होंने इसे ‘होल्ड’ रेटिंग दी है. सबसे बड़ा झटका कंपनी के टारगेट प्राइस में दिया गया है. HSBC ने टारगेट प्राइस को ₹2,100 से सीधे घटाकर ₹1,150 प्रति शेयर कर दिया है. ये 24 सितंबर के बंद भाव से भी करीब 5% नीचे है.
HSBC का साफ मानना है कि नए नियमों के कारण कंपनी की कमाई पर बहुत गहरा असर पड़ेगा. ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2028 के ईपीएस अनुमान में 56% की भारी भरकम कटौती की है. वहीं वित्त वर्ष 2029 के लिए इसमें 17% की कटौती की गई है. ब्रोकरेज का कहना है कि टेकरेट में कमी से कंपनी को सीधा नुकसान होगा. हालांकि, अगर कंपनी अपनी लागत कम करती है तो भविष्य में थोड़ी राहत मिल सकती है.
क्या आगे थमेगी शेयरों में ये भारी गिरावट?
घरेलू ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल ने भी इस पूरे हालात का बारीकी से विश्लेषण किया है. उन्होंने शेयर पर अपनी ‘न्यूट्रल’ रेटिंग बनाए रखते हुए ₹1,150 का टारगेट दिया है. मोतीलाल ओसवाल ने दो तरह के हालात का अनुमान लगाया है. अगर आईआरडीएआई के नए नियम लागू होते हैं, तो वित्त वर्ष 2028 में कंपनी के कोर ऑनलाइन इंश्योरेंस रेवेन्यू में लगभग 30% का सीधा झटका लग सकता है.
अगर पीबी फिनटेक अपने खर्चों में तुरंत कटौती नहीं करती है, तो उसकी नेट इनकम 46% तक गिर सकती है. ऐसी स्थिति में शेयर का वैल्यूएशन 73 गुना के पीई मल्टीपल पर पहुंच जाएगा, जो काफी महंगा साबित होगा. दूसरी स्थिति ये है कि अगर कंपनी अपने कर्मचारियों के साथसाथ विज्ञापन के खर्चों में 20% तक की कमी कर ले, तो मुनाफे में आने वाली इस गिरावट को 30% तक सीमित किया जा सकता है. बाजार के जानकारों का स्पष्ट कहना है कि जब तक आईआरडीएआई अपने अंतिम नियमों का आधिकारिक ऐलान नहीं कर देता, तब तक शेयर में अनिश्चितता बनी रहेगी. निवेशकों को फिलहाल जल्दबाजी में कोई भी फैसला लेने से बचना चाहिए.



