
Petrol-Diesel Price Today (24 September 2026): अगर आप यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल सस्ता होगा, तो फिलहाल इस उम्मीद को छोड़ देना ही बेहतर होगा। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुकी हैं। भारत जिस क्रूड बाजार से तेल आयात करता है, उसकी कीमत हाल ही में $117.4 प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जबकि बीते वित्त वर्ष में यह औसतन $66 के आसपास थी। हालांकि वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन तेल की ये बढ़ी हुई दरें घरेलू बाजार में राहत मिलने के सारे रास्ते फिलहाल बंद करती दिख रही हैं।
कंपनियों की जेब पर भारी पड़ रही है कीमतें
देश में लंबे समय से पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं। दिल्ली जैसे बड़े शहरों में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पर बना हुआ है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। दुनिया के कई देश जहां ईंधन की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, वहीं भारत में आम जनता को तो राहत मिली हुई है, लेकिन सरकारी तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) के लिए यह स्थिति बड़ी मुसीबत बन चुकी है। कच्चे तेल के महंगे होने के कारण कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग ₹8 और डीजल पर करीब ₹9 प्रति लीटर का सीधा घाटा सहना पड़ रहा है।
विभिन्न शहरों में पेट्रोल-डीजल
शहर
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)
डीजल की कीमत (प्रति लीटर)
दिल्ली
102.12 रुपए
95.20 रुपए
मुंबई
111.21 रुपए
97.83 रुपए
कोलकाता
113.51 रुपए
99.82 रुपए
चेन्नई
107.78 रुपए
99.56 रुपए
जयपुर
112.69 रुपए
97.78 रुपए
पटना
113.35 रुपए
99.36 रुपए
लखनऊ
101.86 रुपए
95.36 रुपए
अमृतसर
105.56 रुपए
96.20 रुपए
बेंगलुरु
110.82 रुपए
98.77 रुपए
MP-CG में पेट्रोल-डीजल की कीमत
• रायपुर: 108.08 ₹/L पेट्रोल, 101.60 ₹/L डीजल
• बिलासपुर: 108.64 ₹/L पेट्रोल, 101.90 ₹/L डीजल
• भोपाल: 114.57 ₹/L पेट्रोल, 99.64 ₹/L डीजल
• इंदौर: 115.00 ₹/L पेट्रोल, 100.09 ₹/L डीजल
कब तक नुकसान सहेंगी कंपनियां?
आम लोगों को राहत देने का यह सिलसिला सरकारी कंपनियों की बैलेंस शीट पर भारी पड़ रहा है। रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुमानों के मुताबिक, यदि मौजूदा स्थिति ऐसी ही बनी रही तो इन तीनों प्रमुख ऑयल कंपनियों को हर दिन करीब ₹530 करोड़ का घाटा हो सकता है। जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम नीचे नहीं आते, तब तक इन कंपनियों के लिए पेट्रोल-डीजल की खुदरा दरों में कटौती करना लगभग असंभव नजर आ रहा है।
पश्चिम एशिया में तनाव और बातचीत पर संशय बनी मुख्य वजह
कच्चे तेल की कीमतों में आए इस अचानक उछाल के पीछे वैश्विक राजनीति और आपूर्ति में आ रही रुकावटें सबसे बड़ा कारण हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव बाजार को अस्थिर कर रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच किसी सार्थक बातचीत की संभावनाएं धुंधली पड़ गई हैं, क्योंकि ईरान ने दबाव में वार्ता करने से साफ इनकार कर दिया है। इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण ग्लोबल मार्केट में सप्लाई चेन को लेकर डर का माहौल बना हुआ है, जिससे तेल के दाम लगातार चढ़ रहे हैं।
अमेरिका में डीजल का संकट और निर्यात पर पाबंदी की आहट
समस्या सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे तैयार होने वाले ईंधन, खासतौर पर डीजल की कीमतों में भी भारी उछाल देखा जा रहा है। अमेरिका में डीजल के खुदरा दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं। इस संकट से निपटने के लिए अमेरिकी प्रशासन देश से डीजल के निर्यात पर रोक लगाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है। यदि अमेरिका निर्यात पर अंकुश लगाता है, तो वैश्विक स्तर पर डीजल की उपलब्धता और कम हो जाएगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का दबाव और बढ़ सकता है।



