Ayodhya News: राम मंदिर से जुड़े चंदा चोरी मामले के बीच अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं. टीवी9 डिजिटल को मिली श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट डीड की कॉपी में ऐसे प्रावधान सामने आए हैं, जिनमें ट्रस्ट के संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं. हालांकि आरोप है कि इन नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया और तीर्थ क्षेत्र में कई नियुक्तियां तय प्रक्रिया के बजाय सिफारिश के आधार पर की गईं. बताया जा रहा है कि ट्रस्ट डीड में जिन व्यवस्थाओं और जिम्मेदारियों का उल्लेख किया गया है, व्यवहार में उनका अनुपालन नहीं हुआ. इस मामले में अब नियुक्तियों की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आती नजर आ रही है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बना था ट्रस्ट

गौरतलब है कि 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद केंद्र सरकार ने 5 फरवरी 2020 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था. गृह मंत्रालय की ओर से इसकी अधिसूचना जारी की गई थी. ट्रस्ट डीड पर गृह मंत्रालय की तत्कालीन निदेशक बीना यादव और उप सचिव विजय सिंह राणा गवाह के रूप में हस्ताक्षरकर्ता थे. इस ट्रस्ट को राम मंदिर निर्माण, संचालन और उससे जुड़े प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

‘सिफारिश से मिली नौकरी, कोई आईकार्ड तक नहीं बना’

राम मंदिर चंदा चोरी मामले के आरोपी अनुकल्प मिश्रा के एक सहयोगी ने टीवी9 डिजिटल से बातचीत में नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर गंभीर दावे किए हैं. सहयोगी के अनुसार, तीर्थ क्षेत्र में नौकरी पाने के लिए किसी औपचारिक चयन प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता था, बल्कि सिफारिश के आधार पर लोगों को काम पर रखा जाता था. उसने दावा किया कि पहले उसकी मुलाकात ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से कराई गई. इसके बाद उन्हें अनिल मिश्रा से मिलने के लिए कहा गया और फिर नौकरी मिल गई.

सहयोगी के मुताबिक, नियुक्ति के दौरान न तो कोई पहचान पत्र जारी किया गया और न ही किसी औपचारिक नियुक्ति पत्र की प्रक्रिया पूरी की गई. केवल ड्यूटी स्लिप के आधार पर परिसर में प्रवेश मिलता था. वेतन के लिए सिर्फ बैंक खाते का विवरण लिया गया, जिसमें हर महीने सैलरी भेजी जाती थी.

ट्रस्ट डीड में क्या हैं प्रावधान?

टीवी9 डिजिटल को उपलब्ध ट्रस्ट डीड के अनुसार, ट्रस्ट के संचालन के लिए स्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था तय की गई है….

  • डीड के मुताबिक, ट्रस्टी बोर्ड अपने सदस्यों में से एक ट्रस्टी को अध्यक्षप्रबंध ट्रस्टी नियुक्त करेगा, जो ट्रस्ट की बैठकों की अध्यक्षता करेगा और प्रशासनिक निर्णयों का नेतृत्व करेगा.
  • इसी प्रकार बोर्ड अपने सदस्यों में से एक महासचिव नियुक्त करेगा, जिसकी जिम्मेदारी बैठकों का आयोजन, कार्यवृत्त तैयार करना और ट्रस्ट के अभिलेखों का रखरखाव करना होगी. यदि महासचिव बैठक नहीं बुलाता है तो ट्रस्ट द्वारा निर्धारित नियमों के तहत अन्य प्रक्रिया अपनाई जा सकती है.
  • ट्रस्ट डीड में कोषाध्यक्ष नियुक्त करने का भी प्रावधान है, जिसकी जिम्मेदारी खातों का सही रखरखाव, बजट के अनुरूप खर्च सुनिश्चित करना और लागू कानूनों व लेखा मानकों का पालन करना है.
  • इसके अलावा ट्रस्टी बोर्ड आवश्यकता के अनुसार अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति भी कर सकता है और उन्हें समयसमय पर जिम्मेदारियां सौंप सकता है.

‘ट्रस्ट डीड के बजाय मनमाने तरीके से हुआ काम’

अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता तरुण लालजी वर्मा ने टीवी9 डिजिटल से बातचीत में दावा किया कि ट्रस्ट डीड में तय नियमों के अनुरूप कार्य नहीं हुआ. उनका कहना है कि कुछ लोगों ने अपनी मर्जी से व्यवस्थाएं संचालित कीं, जिससे ट्रस्ट डीड की मूल भावना प्रभावित हुई. उन्होंने कहा कि यदि चंदा चोरी और नियुक्तियों से जुड़े आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो ट्रस्ट के सभी संबंधित ट्रस्टी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए और आवश्यक होने पर उन्हें भी कानूनी प्रक्रिया के दायरे में लाया जाना चाहिए.

SIT के रडार पर नियुक्तियां

सूत्रों के अनुसार, तीर्थ क्षेत्र में हुई कई नियुक्तियां अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं. दावा किया जा रहा है कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति सिफारिश के आधार पर हुई थी. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि नियुक्तियों के दौरान ट्रस्ट डीड में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं.