उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन सियासी बिसात बिछने लगी है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 22 अक्टूबर को रामपुर पहुंचेंगे. यहां वह जिला जेल में बंद पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात करेंगे. इसके बाद आजम खान के घर जाकर उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और परिवार के दूसरे सदस्यों से मिलेंगे. अखिलेश यादव जौहर विश्वविद्यालय भी जाएंगे.

अखिलेश यादव का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी रामपुर में रैली करके सपा और अखिलेश यादव पर मुस्लिम नेताओं की अनदेखी करने के आरोप लगा चुके हैं. दूसरी तरफ, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम और कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं. ऐसे में आजम खान से अखिलेश की मुलाकात, उनके राजनीतिक रिश्तों और पश्चिमी यूपी में सपा की रणनीति पर नजर रहेगी.

22 अक्टूबर को रामपुर पहुंचेंगे अखिलेश

समाजवादी पार्टी की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक, अखिलेश यादव 22 अक्टूबर को लखनऊ से रामपुर पहुंचेंगे. वह सुबह 11 बजे अमौसी एयरपोर्ट से निजी विमान से रवाना होंगे और करीब 11 बजकर 45 मिनट पर बरेली एयरपोर्ट पहुंचेंगे. यहां से हेलीकॉप्टर के जरिए जौहर विश्वविद्यालय पहुंचने का कार्यक्रम है. दोपहर करीब 12 बजकर 20 मिनट पर विश्वविद्यालय पहुंचने के बाद अखिलेश यादव सड़क मार्ग से रामपुर जिला जेल जाएंगे.

दोपहर करीब 12 बजकर 45 मिनट पर उनकी आजम खान से मुलाकात तय है. जेल में मुलाकात के बाद अखिलेश यादव आजम खान के आवास पहुंचेंगे और उनके परिवार से मिलेंगे. इसके बाद वह दोबारा जौहर विश्वविद्यालय पहुंचकर बरेली के लिए रवाना होंगे. तय कार्यक्रम के मुताबिक, अखिलेश यादव करीब ढाई घंटे रामपुर में रहेंगे. आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा इससे पहले लखनऊ में अखिलेश यादव से मुलाकात कर चुकी हैं.

आजम खान की सियासत और सपा में उनकी भूमिका

आजम खान, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं. वह रामपुर से कई बार विधायक और सांसद रह चुके हैं. साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे हैं. एक दौर में पश्चिमी यूपी, खासकर रामपुर और आसपास के इलाकों में आजम खान का काफी राजनीतिक प्रभाव था. सपा में उनकी भूमिका सिर्फ एक वरिष्ठ नेता की नहीं थी, बल्कि क्षेत्र में पार्टी के संगठन और उम्मीदवारों के चयन में भी उनकी राय अहम मानी जाती थी.

पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर उम्मीदवार तय करने में आजम खान की पसंदनापसंद काफी मायने रखती थी. आजम खान लंबे समय तक सपा के बड़े मुस्लिम चेहरों में गिने जाते रहे हैं. रामपुर में उनकी राजनीतिक पकड़ के साथसाथ मुरादाबाद और आसपास के क्षेत्रों में भी उनके समर्थकों का नेटवर्क रहा है. हालांकि, कानूनी मामलों में घिरने और जेल जाने के बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियां सीमित हो गईं.

आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम रामपुर की जिला जेल में बंद हैं. दोनों को पैन कार्ड से जुड़े दो मामलों में अदालत ने सातसात साल की सजा सुनाई थी. आजम खान 17 नवंबर 2025 से जेल में हैं. ऐसे में अखिलेश यादव का जेल जाकर उनसे मिलना पार्टी के वरिष्ठ नेता के साथ बातचीत का मौका होगा. मुलाकात के बाद आजम खान के परिवार से मिलने का कार्यक्रम भी रखा गया है.

2022 में आजम खान और अब्दुल्ला दोनों जीते थे चुनाव

आजम खान का चुनावी प्रभाव 2022 के विधानसभा चुनाव में भी दिखाई दिया था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। आजम खान ने रामपुर सदर सीट से जीत दर्ज की थी. यह उनकी इस सीट से दसवीं जीत थी. उनके बेटे अब्दुल्ला आजम ने स्वार विधानसभा सीट से चुनाव जीता था. अब्दुल्ला आजम को 1 लाख 26 हजार 162 वोट मिले थे और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 61 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. आजम खान के करीबी माने जाने वाले नसीर अहमद खान ने भी चमरौआ विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी. उस चुनाव में रामपुर जिले की पांच विधानसभा सीटों में से तीन पर समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की थी.

हालांकि, बाद में अब्दुल्ला आजम की विधानसभा सदस्यता रद्द होने के बाद स्वार सीट पर उपचुनाव हुआ और वहां सपा को हार का सामना करना पड़ा. इन चुनावी नतीजों के बीच आजम खान की भूमिका को लेकर सपा के भीतर चर्चा होती रही है. आने वाले विधानसभा चुनाव में रामपुर और आसपास की सीटों पर उम्मीदवारों के चयन के दौरान स्थानीय नेताओं की राय और आजम खान के समर्थकों की भूमिका भी अहम मुद्दा हो सकती है.

ओवैसी की रैली के बाद अखिलेश का रामपुर दौरा

अखिलेश यादव के रामपुर दौरे से पहले एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 19 अक्टूबर को रामपुर में रैली की थी. इस रैली में ओवैसी ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर मुस्लिम नेताओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मुस्लिम नेताओं के जेल जाने पर सपा की प्रतिक्रिया दूसरे नेताओं के मामलों जैसी नहीं होती. ओवैसी लगातार मुस्लिम नेतृत्व और सपा की राजनीति को लेकर सवाल उठा रहे हैं.

रामपुर और पश्चिमी यूपी के कई इलाकों में मुस्लिम मतदाता चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ऐसे में ओवैसी की रैली के बाद अखिलेश यादव का रामपुर पहुंचना अहम है. इस दौरे में आजम खान से मुलाकात और उनके परिवार से मिलने के कार्यक्रम पर सपा के कार्यकर्ताओं और समर्थकों की नजर रहेगी.

पश्चिमी यूपी के जिलों में मुस्लिम आबादी कितनी?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी कई जिलों में बड़ी संख्या में है. 2011 की जनगणना के मुताबिक, रामपुर में मुस्लिम आबादी करीब 50.57 फीसदी है. सहारनपुर में 41.95 फीसदी, मुजफ्फरनगर में करीब 41.1 फीसदी, बिजनौर में 43.04 फीसदी और अमरोहा में 40.78 फीसदी मुस्लिम आबादी है. मुरादाबाद में मुस्लिम आबादी करीब 47 फीसदी थी.मेरठ में मुस्लिम आबादी करीब 34.4 फीसदी और बागपत में करीब 28 फीसदी है.

बरेली में यह आंकड़ा 34.54 फीसदी है. अलीगढ़ में मुस्लिम आबादी करीब 19.85 फीसदी और बुलंदशहर में करीब 22.22 फीसदी दर्ज है. इन जिलों में मुस्लिम आबादी के साथसाथ स्थानीय जातीय समीकरण, किसान राजनीति, उम्मीदवारों की छवि और गठबंधन भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं. आजम खान लंबे समय तक इसी क्षेत्र में सपा के प्रमुख नेताओं में रहे हैं, ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले अखिलेश यादव के रामपुर दौरे को पश्चिमी यूपी में पार्टी की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है.

आजम से मिलने पहुंचे थे शिवपाल यादव

आजम खान से मुलाकात के लिए अगस्त में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव रामपुर जेल पहुंचे थे. उन्होंने आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से मुलाकात की थी. इसके बाद शिवपाल यादव, आजम खान के घर गए और उनकी पत्नी तंजीन फातिमा तथा परिवार के दूसरे सदस्यों से भी मिले. वह जौहर विश्वविद्यालय भी पहुंचे थे. जेल से बाहर आने के बाद शिवपाल यादव ने कहा था कि अगर 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो आजम खान को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी.