पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विरोधप्रदर्शन चल रहे हैं. सुरक्षाबलों की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं. पाकिस्तान पर सच छिपाने का आरोप भी लग रहा है. इस बीच खबरें हैं कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समाचार वेबसाइट अलजजीरा समेत कई डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म्स को बैन कर दिया है. मुस्लिम समुदाय और इस्लामिक देशों में मुद्दे उठाने वाले प्लेटफॉर्म अलजजीरा पर रोक लगाने की खबरों ने सवाल उठाए हैं. हालांकि पाकिस्ताान ने आधिकारिक तौर पर प्रतिबंध की पुष्टि नहीं की है.

इस बीच पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अल जज़ीरा की रिपोर्टिंग की आलोचना करते हुए मीडिया संगठन पर चुनावों और मतदान प्रक्रिया को “गलत तरीके से प्रस्तुत करने” का आरोप लगाया है. लिखा “हमने आज मुज़फ़्फ़राबाद के चुनिंदा मतदान केंद्रों से अल जज़ीरा की चुनिंदा रिपोर्टिंग का संज्ञान लिया है. चैनल ने सावधानीपूर्वक चुने गए समय और चुनिंदा व्यक्तियों के सुनियोजित बयानों के माध्यम से चुनावों और मतदान प्रक्रिया को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है.” मंत्रालय ने ब्रॉडकास्टर पर “येलो जर्नलिज़्म” में शामिल होने का आरोप भी लगाया और कहा कि उसकी खबरों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चुनाव प्रक्रिया की गलत तस्वीर पेश की. अब सवाल है कि क्या है यलो जर्नलिज्म? कहां से आया यह शब्द?

क्या है यलो जर्नलिज्म?

यलो जर्नलिज्म पत्रकारिता की वह शैली है जिसमें सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग की बजाय सनसनी, खबरों को बढ़ाचढ़ाकर बताया जाता है. भावनात्मक असर को प्राथमिकता दी जाती है. इसका मकसद पाठकों या दर्शकों को सच्चाई बताना नहीं, बल्कि ज्यादा से ज्यादा ध्यान खींचना होता है, भले ही इसके लिए तथ्यों से समझौता करना पड़े.

कहां से आया यह शब्द?

यलो जर्नलिज्म 1890 के दशक के अमेरिका से जुड़ा है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। न्यूयॉर्क शहर में उस दौर में दो बड़े अखबार मालिक थे. जोसेफ पुलित्जर और विलियम रैंडोल्फ हर्स्ट . दोनों के बीच अखबार के सर्कुलेशन को बढ़ाने की जबरदस्त होड़ थी. इसके लिए दोनों अखबार ज्यादा से ज्यादा सनसनीखेज खबरें छापने लगे.

उसी दौर में दोनों अखबारों में एक लोकप्रिय कॉमिक कैरेक्टर छपता था जिसे “यलो किड” कहा जाता था. इसी कैरेक्टर के नाम से इस सनसनीखेज पत्रकारिता शैली को “यलो जर्नलिज्म” नाम मिल गया.

इसका सबसे चर्चित उदाहरण है 1898 का स्पेनिशअमेरिकी युद्ध. कहा जाता है कि दोनों अखबारों की भड़काऊ रिपोर्टिंग ने अमेरिकी जनमत को युद्ध के पक्ष में मोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई थी.

Just confirmed from Islamabad: The @AJEnglish website https://t.co/hEKFp7y0jE has been restricted in Pakistan following its coverage of recent events in Pakistanadministered Kashmir.
Silencing independent media will not hide the truth.#RightsMovementAJK #PressFreedom

— Sohaib Khan August 2, 2026

पाकिस्तान में क्या हैं हालात?

इस दौरान ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ पाकिस्तान अधिकृत जम्मूकश्मीर के नए आंकड़े सामने आए हैं, जिनके मुताबिक PoJK में अब तक कुल 80 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं. इनमें 27 जुलाई से पहले 33 आम नागरिकों की जान गई थी, जबकि 27 जुलाई के बाद रावलकोट, मीरपुर और मुजफ्फराबाद में हुई हिंसा में 43 और लोगों की मौत हुई। मृतकों में 4 पुलिसकर्मी भी शामिल बताए गए हैं.

Massive protest is happening in Pakistan 🇵🇰. pic.twitter.com/djeqNuVPC1

— Ananda Nepali August 3, 2026

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अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान अभिव्यक्ति की आजादी को और सीमित कर सकता है. टीवी और प्रिंट मीडिया पहले से ही भारी बंदिशों में हैं, ऐसे में सोशल मीडिया ही वह चंद बचे मंचों में से एक है जहां आम जनता खुलकर बहस कर सकती है और असहमति जता सकती है.