आगरा में 10 तेंदुओं की खाल और प्रतिबंधित शिकार उपकरणों के साथ बीते दिनों पुलिस ने एक शिकारी को अरेस्ट किया था. शुरू में इसने अपना नाम सलीम बताया था. लेकिन पुलिस की जांच में आरोपी का नाम भगवान सिंह पता चला है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित फर्जी पहचान किसने तैयार की, उसे किस आधार पर उपलब्ध कराया गया और इसका इस्तेमाल वन्यजीव तस्करी से जुड़े नेटवर्क में कैसे किया गया.

अधिकारियों का आरोप है कि इस पहचान का इस्तेमाल किसी कार्रवाई की स्थिति में मामले को सांप्रदायिक रंग देने और जांच की दिशा प्रभावित करने के लिए किया जा सकता था. वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पहचान को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसके स्रोत का पता लगाने की कोशिश की जा रही है.
Wildlife SOS तक पहुंची जांच
मामले में Wildlife SOS का नाम सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है. मध्य प्रदेश की प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. समिता राजोरा के अनुसार, आरोपी के कथित कबूलनामे और डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच की जा रही है. जांच एजेंसियां संस्था की कथित भूमिका और उसके कुछ लोगों के संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं. जांच अब संगठन के सहसंस्थापक और CEO कार्तिक सत्यनारायण तक पहुंच चुकी है. वन विभाग और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की ओर से उन्हें पूछताछ के लिए समन जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है.
तीन अहम सवालों पर जांच
जांच अधिकारियों के सामने फिलहाल तीन प्रमुख सवाल हैं. पहला, भगवान सिंह को सलीम नाम की कथित पहचान किसने उपलब्ध कराई. दूसरा, इस पहचान का इस्तेमाल वन्यजीव तस्करी से जुड़े किन मामलों या सौदों में किया गया. तीसरा, क्या इस कथित पहचान के जरिए कानूनी कार्रवाई से बचने की कोई व्यवस्था तैयार की गई थी.
इसके साथ ही जांच एजेंसियां आरोपी के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस, मध्य प्रदेश वन विभाग और WCCB की टीमें मामले से जुड़े संपर्कों और संभावित नेटवर्क की जानकारी जुटा रही हैं.
दूसरी ओर, Wildlife SOS ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. संगठन का कहना है कि वह देशभर में वन्यजीवों के बचाव और पुनर्वास के लिए पारदर्शी तरीके से काम करता है.
CEO कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि संगठन के प्रत्येक इंटेलिजेंस ऑपरेशन का आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद है. उन्होंने आशंका जताई कि यदि वैध एंटीपोचिंग अभियानों को अपराध के तौर पर पेश किया गया तो इससे वन्यजीव अपराधों की सूचना देने वाले मुखबिरों का मनोबल प्रभावित हो सकता है. संगठन ने जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने की बात कही है.
10 तेंदुओं की खाल बरामद
मामले में आरोपी भगवान सिंह के पास से 10 तेंदुओं की खाल और कथित अवैध शिकार में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए गए हैं. अब जांच एजेंसियां बरामदगी के साथसाथ आरोपी की पहचान, उसके संपर्कों और कथित वन्यजीव तस्करी नेटवर्क के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही हैं. फिलहाल डिजिटल साक्ष्यों और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है.



