देश में लगातार बन रहे एक्सप्रेसवे और हाईवे की गुणवत्ता को लेकर अब सड़क निर्माण की शुरुआती तकनीकी तैयारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं. कानपुरलखनऊ एक्सप्रेसवे में सड़क के खराब होने, दिल्लीदेहरादून एक्सप्रेसवे पर गड्ढे और गंगा एक्सप्रेसवे के टूटने जैसे उदाहरण सामने आने के बाद इसकी एक बड़ी वजह कमजोर डीपीआर को माना जा रहा है. चौंकाने वाली बात यह है कि डीपीआर तैयार करने वाले करीब 50 हजार कंसल्टेंट में पिछले चार वर्षों में सिर्फ 690 ने ही जरूरी प्रशिक्षण लिया है.

जानकारी के मुताबिक, सड़क निर्माण की पूरी योजना डीपीआर पर आधारित होती है. इसी के आधार पर सड़क की डिजाइन, निर्माण तकनीक, इस्तेमाल होने वाली सामग्री, मिट्टी की क्षमता, जल निकासी, मौसम, यातायात का दबाव और भविष्य में वाहनों की संख्या बढ़ने जैसी तकनीकी जरूरतों का अध्ययन किया जाता है. यदि शुरुआती स्तर पर ही इन पहलुओं का सही आकलन नहीं हो तो सड़क बनने के बाद उसकी गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ सकता है.

कानपुरलखनऊ से गंगा एक्सप्रेसवे तक…

रिपोर्ट में कानपुरलखनऊ एक्सप्रेसवे, दिल्लीदेहरादून एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे को उदाहरण के तौर पर सामने रखा गया है. कानपुरलखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क के समय से पहले खराब होने, दिल्लीदेहरादून एक्सप्रेसवे पर गड्ढे होने और गंगा एक्सप्रेसवे पर सड़क टूटने जैसी समस्याओं ने शुरुआती तकनीकी योजना और डीपीआर की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.

जानकारों के मुताबिक, सड़क परियोजना की शुरुआत में तैयार होने वाली डीपीआर में अगर वास्तविक परिस्थितियों का सही अध्ययन नहीं किया गया तो निर्माण के दौरान लागत और तकनीकी दिक्कतें बढ़ सकती हैं. इसका असर सड़क की मजबूती और उसकी उम्र पर भी पड़ सकता है.

50 हजार में सिर्फ 690 ने लिया प्रशिक्षण

नोएडा के सेक्टर62 स्थित भारतीय राजमार्ग अभियंता अकादमी के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 से 2026 के बीच डीपीआर तैयार करने का प्रशिक्षण लेने वाले कंसल्टेंट की संख्या महज 690 रही. अधिकारियों के मुताबिक, यह आंकड़ा करीब 50 हजार कंसल्टेंट के मुकाबले बेहद कम है.

भारतीय राजमार्ग अभियंता अकादमी के निदेशक आलोक पांडे ने बताया कि कंसल्टेंट के लिए अकादमी से प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है. हर साल प्रशिक्षण का कैलेंडर जारी किया जाता है, लेकिन प्रशिक्षण लेने वालों की संख्या कम है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ही प्रमाण पत्र दिया जाता है.

अब ऐसे में सवाल यह है कि जब देश में हजारों करोड़ रुपये की लागत से एक्सप्रेसवे और हाईवे बनाए जा रहे हैं, तो उनकी बुनियादी तकनीकी योजना तैयार करने वाले कंसल्टेंट पर्याप्त प्रशिक्षण क्यों नहीं ले रहे हैं? सड़क की मजबूती और लंबी उम्र सुनिश्चित करने के लिए डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया और प्रशिक्षण व्यवस्था को और प्रभावी बनाना जरूरी नजर आ रहा है.