बिहार सरकार ने राज्य में नई महिला यूनिवर्सिटी खोलने का फैसला किया है. हाल ही में सीएम सम्राट चौधरी ने इसकी घोषणा की है. हालांकि, अभी यह फैसला होना बाकी है कि यह यूनिवर्सिटी कहां बनेगी लेकिन स्टूडेंट्स से लेकर वाइस चांसलर तक महिला ही होंगी. यह राज्य सरकार ने तय कर दिया है. निश्चित ही यह एक सराहनीय पहल है. आइए, इसी बहाने जानते हैं कि दुनिया में वुमन यूनिवर्सिटी का कॉन्सेप्ट कहां से आया, दुनिया में कहांकहां स्थापित हैं महिला यूनिवर्सिटीज? भारत में पहला महिला विश्वविद्यालय कौन सा?

महिलाओं की शिक्षा का इतिहास बहुत पुराना है. प्राचीन भारत में गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषियों का उल्लेख मिलता है. वे दार्शनिक चर्चाओं में भाग लेती थीं. प्राचीन चीन में बान झाओ ने महिलाओं की शिक्षा पर लिखा. मिस्र और यूनान में भी कुछ महिलाओं को ज्ञान और चिकित्सा की शिक्षा मिली. हालांकि, यह शिक्षा आम महिलाओं के लिए उपलब्ध नहीं थी. यह अधिकतर राजघरानों, धार्मिक संस्थानों या संपन्न परिवारों तक सीमित थी.
महिलाओं द्वारा स्थापित उच्च शिक्षा का एक प्रारंभिक उदाहरण मोरक्को के फेज शहर में मिलता है. फातिमा अलफिहरी ने 859 ईस्वी के आसपास अलकराविय्यीन नामक शिक्षण केंद्र की स्थापना की. यह बाद में विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुआ. इसे दुनिया के सबसे पुराने लगातार चलने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों में गिना जाता है. यह महिलाविशेष विश्वविद्यालय नहीं था. फिर भी, इससे यह साबित होता है कि उच्च शिक्षा के निर्माण में महिलाओं की भूमिका बहुत पुरानी है.
आधुनिक महिला विश्वविद्यालय का जन्म
आधुनिक अर्थ में महिला विश्वविद्यालय का विकास मुख्य रूप से 19वीं शताब्दी में हुआ. उस समय यूरोप और अमेरिका के अधिकतर विश्वविद्यालय पुरुषों के लिए थे. महिलाओं को विश्वविद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जाता था. कई जगहों पर उन्हें परीक्षा देने की अनुमति भी नहीं थी. इस स्थिति ने महिला कॉलेजों की जरूरत पैदा की. पहले ऐसे संस्थान लड़कियों के स्कूल या महिला सेमिनरी के रूप में शुरू हुए. बाद में वे कॉलेज और विश्वविद्यालय बने.
19वीं शताब्दी में महिलाओं को विश्वविद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जाता था. फोटो: AI Generated
अमेरिका में 19वीं शताब्दी के मध्य में महिला कॉलेजों की संख्या बढ़ी. माउंट होलीओक फीमेल सेमिनरी वर्ष 1837 में शुरू हुई. यह आगे चलकर माउंट होलीओक कॉलेज बना. इसे महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा देने वाले सबसे पुराने सक्रिय संस्थानों में माना जाता है. वेल्सली कॉलेज, स्मिथ कॉलेज और ब्रायन मावर कॉलेज भी इसी दौर में बने. इन संस्थानों ने महिलाओं को साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा, राजनीति और सामाजिक सेवा की शिक्षा दी. अमेरिका में महिला कॉलेजों का विकास उस समय हुआ, जब अच्छे पुरुष विश्वविद्यालय महिलाओं को प्रवेश नहीं देते थे. इसलिए महिला कॉलेज केवल शिक्षा के केंद्र नहीं थे. वे समानता और अधिकारों के आंदोलन का हिस्सा भी बने.
यह सूची किसी वैश्विक रैंकिंग पर आधारित नहीं है. ये संस्थान इतिहास, प्रभाव, प्रतिष्ठा और महिला शिक्षा में योगदान के कारण प्रमुख माने जाते हैं.
ब्रिटेन में महिला उच्च शिक्षा का हाल
ब्रिटेन में भी महिलाओं को विश्वविद्यालय से शिक्षा पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा. कैम्ब्रिज में गिरटन कॉलेज वर्ष 1869 में शुरू हुआ. यह महिलाओं को डिग्री स्तर की शिक्षा देने वाला प्रमुख संस्थान था. न्यून्हम कॉलेज की स्थापना 1871 में हुई. ऑक्सफोर्ड में लेडी मार्गरेट हॉल और सोमरविल हॉल 1879 में शुरू हुए. इन संस्थानों में महिलाएं पढ़ सकती थीं. लेकिन उन्हें लंबे समय तक विश्वविद्यालय की आधिकारिक डिग्री नहीं मिलती थी. ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने महिलाओं को औपचारिक रूप से डिग्री देने की अनुमति वर्ष 1920 में दी. इससे पता चलता है कि महिलाओं को उच्च शिक्षा तक पहुंच मिलने में कितना लंबा समय लगा.
एशिया में महिला विश्वविद्यालयों का विकास
एशिया में महिला शिक्षा का विकास सामाजिक और धार्मिक सुधार आंदोलनों से जुड़ा रहा. कोरिया में इव्हा वुमन्स यूनिवर्सिटी की शुरुआत 1886 में हुई. इसकी शुरुआत मिशनरी मैरी स्क्रैंटन की छोटी कक्षा से हुई थी. यह संस्थान आगे चलकर दक्षिण कोरिया का प्रमुख महिला विश्वविद्यालय बना. जापान में जापान वुमन्स यूनिवर्सिटी की स्थापना 1901 में हुई. टोक्यो वुमन्स मेडिकल यूनिवर्सिटी ने महिलाओं को चिकित्सा शिक्षा का अवसर दिया.
फिलीपींस में फिलीपीन वुमन्स यूनिवर्सिटी की स्थापना 1919 में हुई. इसे एशिया के शुरुआती महिला विश्वविद्यालयों में गिना जाता है. बांग्लादेश में एशियन यूनिवर्सिटी फॉर वुमन ने 21वीं शताब्दी में नया मॉडल प्रस्तुत किया. इसका उद्देश्य एशिया के अलगअलग देशों की छात्राओं को उच्च शिक्षा देना है.
कोरिया की इव्हा वुमन्स यूनिवर्सिटी.
भारत में महिला शिक्षा की पृष्ठभूमि
भारत में महिलाओं की शिक्षा का इतिहास भी सामाजिक सुधार आंदोलनों से जुड़ा है. 19वीं शताब्दी में राजा राममोहन राय, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, सावित्रीबाई फुले और ज्योतिराव फुले ने महिला शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण काम किया. सावित्रीबाई फुले ने पुणे में लड़कियों के लिए स्कूल शुरू किया. यह कदम उस समय बहुत साहसिक था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। समाज के एक बड़े वर्ग का मानना था कि महिलाओं को पढ़ाना परंपरा के विरुद्ध है. बंगाल में बेथ्यून स्कूल और बाद में बेथ्यून कॉलेज ने महिलाओं की शिक्षा को आगे बढ़ाया. बेथ्यून कॉलेज की स्थापना 1879 में हुई. यह दक्षिण एशिया के पुराने महिला कॉलेजों में से एक है.
भारत का पहला महिला विश्वविद्यालय
भारत का पहला महिला विश्वविद्यालय श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरे महिला विद्यापीठ है. इसे सामान्य रूप से एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय कहा जाता है. इसकी स्थापना समाज सुधारक महर्षि धोंडो केशव कर्वे ने वर्ष 1916 में की. शुरुआत में इसका नाम इंडियन वुमन्स यूनिवर्सिटी था. बाद में इसका नाम श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरे के नाम पर रखा गया. इस विश्वविद्यालय की शुरुआत पुणे में हुई थी. बाद में इसका मुख्यालय मुंबई में स्थापित हुआ.
भारत का पहला महिला विश्वविद्यालय एसएनडीटी वूमेन्स यूनिवर्सिटी.
विश्वविद्यालय ने महिलाओं को कला, विज्ञान, शिक्षा, वाणिज्य, कानून और अन्य विषयों में उच्च शिक्षा का अवसर दिया. एसएनडीटी की स्थापना का महत्व बहुत बड़ा था. उस समय भारत में महिलाओं के लिए अलग विश्वविद्यालय की कल्पना असाधारण थी. महर्षि कर्वे का मानना था कि महिलाओं की शिक्षा पूरे परिवार और समाज को मजबूत बनाती है. शुरुआती दौर में विश्वविद्यालय के पास संसाधन बहुत सीमित थे. छात्राओं की संख्या भी कम थी. फिर भी, इस संस्था ने महिला शिक्षा के लिए एक स्थायी रास्ता बनाया. आज एसएनडीटी भारत में महिला उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है.
महिला विश्वविद्यालयों की आवश्यकता क्यों पड़ी?
महिला विश्वविद्यालयों की स्थापना के पीछे कई कारण थे. पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को सामान्य संस्थानों में बमुश्किल प्रवेश मिलता था. बेटियों की सुरक्षा भी एक बहुत बड़ा कारण बनी. कई परिवार अपनी बेटियों को पुरुषों के साथ पढ़ने भेजने के लिए तैयार नहीं थे. महिला शिक्षकों और डॉक्टरों की आवश्यकता भी समाज ने महसूस की. लड़कियों के स्कूलों, अस्पतालों और सामाजिक संस्थानों में महिला पेशेवरों की मांग बढ़ रही थी. उच्च शिक्षा ने महिलाओं को नौकरी, प्रशासन, कानून, चिकित्सा और राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर दिया.
बदलते समय में महिला विश्वविद्यालयों की भूमिका
महिला विश्वविद्यालयों की भूमिका समय के साथ बदली है. पहले इनका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को विश्वविद्यालय में प्रवेश दिलाना था. आज इनका उद्देश्य नेतृत्व, शोध, रोजगार और सामाजिक बदलाव से जुड़ गया है. इन संस्थानों ने महिलाओं को विज्ञान, तकनीक, चिकित्सा, कानून और राजनीति में आगे बढ़ाया है. इन्होंने छात्राओं में आत्मविश्वास भी पैदा किया है. हालांकि, कई देशों में सहशिक्षा के विस्तार के बाद महिला कॉलेजों की संख्या कम हुई है. अमेरिका में 1960 के दशक में महिला कॉलेजों की संख्या बहुत अधिक थी. बाद में कई संस्थान सहशिक्षा वाले कॉलेज बन गए. फिर भी, महिला विश्वविद्यालयों की जरूरत पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है. आज भी कई छात्राएं ऐसे वातावरण को उपयोगी मानती हैं, जहां उन्हें नेतृत्व करने, बोलने और प्रयोग करने के अधिक अवसर मिलते हैं.



