मां नहीं बन पा रही महिलाओं के लिए आईवीएफ की तकनीक किसी वरदान जैसी है. इसने वर्षों से बच्चे के लिए प्रयास कर रहे कई कपल्स की जिंदगी में खुशियां लाने में मदद की है. वैसे तो आईवीएफ के लिए बहुत ज्यादा शर्तें नहीं होती हैं, लेकिन कुछ मामलों में आईवीएफ कराने से मना किया जाता है. कुछ मेडिकल कंडीशन ऐसी होती हैं, जिनमें अगर आईवीएफ कराना हो, तो बहुत सतर्कता की जरूरत होती है.

आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. कृति तिवारी बताती हैं कि इस मामले अगर बात की जाए, तो सबसे पहले आती हैं दिल या फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का सामना कर रही महिलाएं. ऐसी महिलाओं को आईवीएफ की सलाह नहीं दी जाती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ऐसे मामले में खतरा बढ़ जाता है.
इसी तरह किडनी या लिवर फेल्योर स्टेज में भी आईवीएफ कराना जानलेवा हो सकता है. वहीं, अगर किसी महिला की बच्चेदानी में बहुत ज्यादा परेशानी हो, या बच्चेदानी न हो या बच्चेदानी में बहुत ज्यादा झिल्लियां हों, तो आईवीएफ संभव ही नहीं हो पाता है.
इसके अलावा भी अगर कोई अनकंट्रोल्ड डिसऑर्डर हो, तो भी आईवीएफ की सलाह नहीं दी जाती है. जैसे डायबिटीज या ब्लड प्रेशर अनकंट्रोल्ड हो या थायरॉयड डिसऑर्डर अनकंट्रोल्ड हो, तो आईवीएफ कराने से मना किया जाता है.
इस तरह की स्थिति में पहले डिसऑर्डर को कंट्रोल करने की सलाह दी जाती है. उसके बाद पूरी जांच के बाद आईवीएफ के बारे में सोचा जाता है. ऐसे मामलों में बहुत ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत होती है.
इसके अलावा अगर किसी महिला को कैंसर हो और रेडियोथेरेपी या कीमोथेरेपी होने वाली हो, तो भी आईवीएफ की सलाह नहीं दी जाती. ऐसे स्थिति में कहा जाता है कि ट्रीटमेंट से पहले फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन कराया जाए. ऐसे में सरोगेसी जैसे अन्य विकल्पों के बारे में सोचा जा सकता है.



