महान पार्श्व गायिका एस. जानकी के निधन पर रविवार को केरल में विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने शोक जताया। फिल्म जगत की हस्तियों, संगीतकारों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा भारतीय फिल्म संगीत में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया।
जानकी का शनिवार को मैसुरु के एक निजी अस्पताल में वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। वह 88 वर्ष की थीं।
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार शुक्रवार रात सांस लेने में तकलीफ होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां शनिवार को उनका निधन हो गया।

फिल्मी हस्तियों ने जताया शोक
पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने कहा कि जानकी का निधन भारतीय सिनेमा और संगीत के एक गौरवशाली युग के अंत का प्रतीक है।
विजयन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘वह भले ही किसी दूसरे राज्य से थीं, लेकिन उनकी आवाज हर मलयाली के दिल में बसती थी। उन्होंने अपने हर गीत के जरिए हमारी गहरी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी और हमारी यादों एवं जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गईं।’’विजयन ने कहा कि जानकी का संगीत आने वाली पीढ़ियों तक गूंजता रहेगा और उनकी असाधारण विरासत सदैव जीवित रहेगी।
अभिनेता मोहनलाल ने फेसबुक पर एक पोस्ट में जानकी को ‘‘भारत की बुलबुल’’ बताते हुए कहा कि मलयालम, हिंदी और कई अन्य भाषाओं में उनके भावपूर्ण गीतों ने एक पूरे युग को परिभाषित किया।
उन्होंने कहा कि जानकी ने उनकी पहली फिल्म ‘मंजिल विरिंजा पूक्कल’ के गीत गाए थे और इसके लिए वह जीवनभर उनके ऋणी रहेंगे।
मोहनलाल ने कहा कि गायिका ने अपनी जादुई आवाज से खुशी, दुख और मासूमियत सहित हर मानवीय भावना को स्वर दिया। उन्होंने कहा कि वह स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि जानकी द्वारा गाए गए अनेक गीतों में उन पर फिल्मांकन हुआ।
अभिनेता ने जानकी को शांत, स्नेहिल और सभी के साथ समान व्यवहार करने वाला व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उनके साथ उनका घनिष्ठ व्यक्तिगत संबंध था।
उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
अभिनेता ममूटी ने सोशल मीडिया पर जानकी का एक चित्र साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
अभिनेत्री मंजू वारियर ने भी फेसबुक पर उनकी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, ‘‘कला अमर रहती है।’’
पार्श्व गायक जी. वेणुगोपाल ने कहा कि संगीत के स्वर्णिम दौर में जानकी द्वारा गाए गए मधुर गीत हमेशा जीवित रहेंगे।
पार्श्व गायक एम. जी. श्रीकुमार ने जानकी की गायन शैली को ‘‘संगीत के हर विद्यार्थी के लिए एक पाठ्यपुस्तक’’ बताया।
संगीतकार एम. जयचंद्रन ने कहा कि जानकी पवित्रता, विनम्रता, प्रेम और समर्पण की प्रतिमूर्ति थीं।
अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए प्रसिद्ध जानकी ने 20 से अधिक भाषाओं में 48,000 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए। इनमें कन्नड़, तमिल, तेलुगु और मलयालम भाषाओं के गीत प्रमुख हैं।



