ऊपर से जंगल का इलाका बिल्कुल सामान्य नजर आ रहा था, लेकिन जमीन के नीचे प्लास्टिक में लपेटकर हथियारों का जखीरा छिपाया गया था. बिहारझारखंड सीमा से सटे गयाजी जिले के धनगांई थाना क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान इस छिपे ठिकाने का पता लगाया. तिलेटाड़ से हिसीर जाने वाले रास्ते पर हुई इस कार्रवाई में 9 एमएम कार्बाइन, मैगजीन, देशी राइफल, कट्टा, पिस्तौल और 92 कारतूस बरामद किए गए. मौके से एक वॉकीटॉकी भी मिला है.

बुधवार को एसएसबी और जिला पुलिस की संयुक्त टीम बिहारझारखंड सीमा से लगे जंगलों में सर्च ऑपरेशन चला रही थी. इलाका घना और दुर्गम होने के कारण जवानों ने कई स्थानों पर गहन तलाशी ली. इसी दौरान जमीन के एक हिस्से पर सुरक्षाबलों को संदेह हुआ.

जगह की बारीकी से जांच करने के बाद वहां खुदाई कराई गई. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कुछ गहराई में प्लास्टिक में पैक सामान मिला. पैकेट खोलने पर उसमें हथियार और कारतूस देखकर सुरक्षाबल सतर्क हो गए. इसके बाद आसपास के इलाके में भी तलाशी अभियान तेज कर दिया गया.

कार्बाइन से लेकर पिस्तौल तक बरामद

सर्च ऑपरेशन में 9 एमएम कार्बाइन के साथ उसकी दो मैगजीन बरामद हुई हैं. इसके अलावा एक देशी भरमार राइफल, एक कट्टा और एक पिस्तौल भी मिली है. हथियारों के साथ बड़ी संख्या में कारतूस बरामद होने से सुरक्षा एजेंसियां इसे गंभीर बरामदगी मान रही हैं.

बरामद कारतूसों में 9 एमएम के 79 और 7.62 एमएम के 13 कारतूस शामिल हैं. इस तरह कुल 92 कारतूस मिले हैं. हथियारों के साथ एक वॉकीटॉकी भी बरामद किया गया है, जिसकी जांच की जा रही है.

हथियार किसने और क्यों छिपाए, जांच शुरू

बरामदगी के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन के नीचे हथियार किसने छिपाए थे. जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि हथियार जंगल तक कब और किस रास्ते से पहुंचाए गए. इसके अलावा इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था, इसकी भी पड़ताल की जा रही है.

प्रारंभिक तौर पर हथियारों के नक्सली गतिविधियों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि, पुलिस की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. जांच एजेंसियां बरामद हथियारों के आधार पर इलाके में सक्रिय संदिग्धों और पुराने नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही हैं.

बड़े नेटवर्क से जुड़े होने की भी जांच

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या हथियारों को किसी बड़े नेटवर्क के लिए जंगल में सुरक्षित ठिकाने के तौर पर जमा किया गया था. बरामदगी से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच कर सुरक्षाबल पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं.

अभियान का नेतृत्व एसएसबी के उप कमांडेंट रवि भूषण ने किया. कार्रवाई में धनगांई थानाध्यक्ष श्रवण राम और एसएसबी 29वीं वाहिनी के धनगांई कैंप के सहायक कमांडेंट सनोज कुमार की अहम भूमिका रही. बिहारझारखंड सीमा के जंगल से जमीन के नीचे दबे हथियारों की बरामदगी को नक्सल विरोधी अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.