जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले सात्विक भोजन ही करते हैं. इसमें ज्यादातर उत्तर भारतीय साबूदाना, कुट्टू का आटा और आलू से बनी चीजें खाते हैं. इन्हें व्रत में सबसे बेस्ट फूड्स माना जाता है. पर कभी सोचा है कि इन्हें एक साथ या ज्यादा खान से सेहत को क्या नुकसान हो सकते हैं? पूरे दिन भूखे पेट रहने के बाद एक साथ ऐसी चीजों को खाने से गैस, अपच या पेट से जुड़ी दूसरी समस्याएं हो सकती हैं.

जन्माष्टमी के मौके पर भगवान कृष्ण की विशेष पूजा की जाती है. उन्हें अलगअलग तरह के भोग लगाए जाते हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। प्रभु की कृपा पाने के लिए भक्त व्रत भी रखते हैं. निर्जला या फलाहार व्रत रखने वाले इसे खोलते समय ऐसे फूड्स खाते हैं. जानें इन्हें गलत तरीके से खाने के नुकसान…

एक्सपर्ट ने क्या कहा?

डायटिशियन गीतिका चोपड़ा कहती हैं कि व्रत का मतलब सिर्फ रोज के खाने की जगह ज्यादा मात्रा में साबूदाना, कुट्टू और आलू खाना नहीं है. ये तीनों चीजें व्रत में आमतौर पर खाई जाती हैं, लेकिन अगर एक ही भोजन में इनकी मात्रा ज्यादा हो जाए, तो भोजन में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ जाती है और प्रोटीन व फाइबर कम रह जाते हैं.

साबूदाना और आलू दोनों ही आसानी से पचने वाले कार्बोहाइड्रेट हैं. इसलिए अगर इन्हें एक साथ ज्यादा मात्रा में खाया जाए, तो ब्लड शुगर जल्दी बढ़ सकता है. इसके कुछ समय बाद भूख, मीठा या कुछ खाने की इच्छा और शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है.

कुट्टू इन दोनों की तुलना में बेहतर ऑप्शन है क्योंकि इसमें फाइबर और पौधों से मिलने वाला प्रोटीन ज्यादा होता है. लेकिन अगर कुट्टू की पूरी या पकौड़ी को ज्यादा तेल में तला जाए तो कैलोरी और फैट की मात्रा काफी बढ़ जाती है. व्रत में खाने की मात्रा और चीजों के सही कॉम्बिनेशन पर खास ध्यान देना चाहिए.

ऐसे खाएं साबूदाना

एक्सपर्ट कहती हैं कि अगर साबूदाना खा रहे हैं, तो उसमें मूंगफली, सब्जियां और थोड़ा दही शामिल कर सकते हैं. कुट्टू की रोटी को दही, पनीर या सब्जी के साथ खाएं. वहीं आलू को पूरे भोजन का मुख्य हिस्सा बनाने के बजाय कम मात्रा में रखना बेहतर है. सबसे जरूरी बात यह है कि व्रत के दौरान सिर्फ फल या सिर्फ कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों पर निर्भर न रहें.

व्रत में भी शरीर को पर्याप्त प्रोटीन, अच्छे फैट, फाइबर और पानी की जरूरत होती है. नारियल पानी, दही, मेवे, बीज, पनीर और मौसमी फलों को सही मात्रा में खाने में शामिल किया जा सकता है.

खाने की मात्रा बैलेंस में रखें, प्रोटीन को शामिल करें, पर्याप्त पानी पिएं और तली हुई चीजों की जगह कम तेल में बनी चीजों को प्राथमिकता दें. इससे व्रत के बाद कमजोरी, ज्यादा भूख लगना और जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने से बचने में मदद मिल सकती है.

व्रत के दिन शरीर को प्रोटीन, गुड फैट और फाइबर का बैलेंस रखने के लिए ऐसा रखें खानपान…

  1. सामक चावल + दही + सब्जियां सामान्य चावल की जगह सामक ले सकते हैं और प्रोटीन के लिए दही शामिल करें.
  2. पनीर टिक्का या पनीर की सब्जी पेट भरने वाला और प्रोटीन से भरपूर विकल्प.
  3. मखाना थोड़े घी में भुना हुआ मखाना अच्छे स्नैक का विकल्प है.
  4. दही + मेवे + बीज जल्दी बनने वाला, पेट भरने वाला और संतुलित विकल्प.
  5. कुट्टू या सामक की रोटी + पनीर/दही + सब्जी रोटी को अकेले खाने के बजाय उसके साथ प्रोटीन जरूर लें.
  6. सिंघाड़े के आटे का चीला इसमें पनीर या दही शामिल करके प्रोटीन की मात्रा बढ़ाई जा सकती है.
  7. साबूदाना खिचड़ी इसमें मूंगफली और सब्जियां डालें और मात्रा को नियंत्रित रखें.
  8. फल + थोड़े मेवे सिर्फ फल खाने के बजाय साथ में थोड़े मेवे लेने से पेट ज्यादा देर तक भरा हुआ महसूस हो सकता है.
  9. दूध या बिना चीनी की लस्सी अगर डेयरी आपको आसानी से पचती है, तो यह प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत हो सकता है.
  10. भुनी हुई मूंगफली, बादाम और अखरोट थोड़ी मात्रा में इन्हें अच्छे फैट वाले स्नैक के रूप में लिया जा सकता है.