जमनालाल बजाज का जीवन एक साधारण परिवार से शुरू होकर एक अमीर कारोबारी द्वारा गोद लिए जाने के बाद पूरी तरह बदल गया। वे महात्मा गांधी के “पांचवें पुत्र” बने और भारतीय उद्योग व स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसकी विरासत आज भी कायम है।

कभीकभी जिंदगी की सबसे बड़ी कहानियाँ जन्म से नहीं, बल्कि एक फैसले से शुरू होती हैं। एक ऐसा ही फैसला था, जब एक साधारण परिवार में जन्मे जमनालाल बजाज को एक अमीर कारोबारी ने गोद लिया। वर्षों बाद इसी घटना को याद करते हुए राजीव बजाज ने कहा कि यह केवल एक फैसला नहीं था, बल्कि किस्मत थी। इससे न सिर्फ एक व्यक्ति का जीवन बदला, बल्कि भारतीय उद्योग जगत और समाज सेवा की दिशा भी बदली। गोद लिए जाने से लेकर महात्मा गांधी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल होने तक, जमनालाल बजाज का सफर किसी प्रेरक कहानी से कम नहीं है।
एक छोटे से गांव से शुरू हुई कहानी
जमनालाल बजाज का जन्म 4 नवंबर 1889 को राजस्थान के सीकर जिले के काशी का बास गांव में एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता कनीराम और माता बिरदीबाई गरीबी में जीवन जी रहे थे। उस समय किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि जमनालाल आगे चलकर भारतीय उद्योग, स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक सुधारों का बड़ा चेहरा बनेंगे।
जब किस्मत ने बदल दी पूरी कहानी
एक बार बचपन में बचपन में जमनालाल घर के बाहर खेल रहे थे। तब उनके पिता के दूर के रिश्तेदार और उद्योगपति सेठ बच्छराज बजाज उनके झोपड़ीनुमा घर रुके थे। घर के बाहर उन्होंने जमनालाल को खेलते देखा और उन्हें लगा कि इस बच्चे में कुछ खास है। उन्होंने जमनालाल को गोद लेने का फैसला किया। बच्छराज, जमानालाल के घर गए और दरवाजा खटखटाया। जमनालाल की माताजी बाहर आईं और उन्हें पीने के लिए पानी दिया। तब बच्छराज ने पूछा कि ये बच्चा किसका है। उन्होंने अपनापन दिखाते हुए मारवाड़ी भाषा में कहा ‘थारो ही ए’ यानी की आपका की है।
बच्छराज ने कहा कि ठीक है, तब मैं इसे अपने साथ ले जा रहा हूं। जमनालाल की माताजी ने उनके पिताजी को बुलाया और सारी बात बताई। जमनालाल के मातापिता उन्हें गोद देने के लिए राजी हो गए और बदले में बच्छराज ने कहा कि मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं? तो जमनालाल के पिता ने कहा कि यहां लोगों को पानी लाने के लिए बहुत दूर जाना पड़ता है। जमनालाल के पिता ने एक कुआं खुदवाने को कहा, जिसे सेठ बच्छराज ने पूरा कर दिया।
‘मैं हो सकता है सिक्योरिटी गार्ड’
इस कहानी पर जमनालाल बजाज के पोते राहुल बजाज के बेटे राजीव बजाज ने बताया था कि वे जमनालाल बजाज पर एक डॉक्यूमेंट्री शूट करने के लिए उसी गांव में गए। उन्हें अपने ग्रेटग्रैंडफादर के घर के पास अपनी कंपनी का सिक्योरिटी गार्ड मिला, जो उस घर के पास ही रहता था, जहां जमनालाल पैदा हुए।
राजीव को जब पता लगा कि ये सिक्योरिटी गार्ड जमनालाल के घर का पड़ोसी है तब उन्होंने किस्मत के बारे में सोचा। उन्होने सोचा कि अगर उस दिन इस सिक्योरिटी गार्ड के ग्रेटग्रैंडफादर घर के बाहर खेल रहे होते और उन्हें बच्छराज गोद ले लेते तो आज हो सकता है कि ये मेरी जगह होता और मैं इसकी जगह बजाज ग्रुप में सिक्योरिटी गार्ड होता।
छोड़ दिया सेठ बच्छराज का घर
जब जमनालाल बजाज 17 साल के थे, तो उनकी अपने गोद लेने वाले दादा, सेठ बच्छराज बजाज से किसी मामले पर जबरदस्त बहस हुई। वे इस बात से नाराज थे कि जमनालाल ने एक पार्टी में महंगे गहने पहनने से मना कर दिया था। विरोध में, जमनालाल ने अपना सामान बांधा, परिवार की संपत्ति पर अपना सारा हक छोड़ने के लिए एक औपचारिक पत्र लिखा और घर छोड़ दिया। बाद में बच्छराज उन्होंने ढूंढकर रेलवे स्टेशन से वापस लाए और अपनी गलती स्वीकार की।
कारोबार से आगे बढ़कर देश सेवा का रास्ता
जमनालाल बजाज ने केवल व्यापार को आगे बढ़ाने तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों को अपनाया और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। गांधीजी उन्हें अपना “पांचवां पुत्र” तक कहते थे। विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार, खादी के प्रचार और स्वदेशी आंदोलन को मजबूत बनाने में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने उद्योग को केवल मुनाफे का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का साधन माना।
विरासत जिसने पीढ़ियों को दी नई पहचान
जमनालाल बजाज द्वारा रखी गई मजबूत नींव पर आगे की पीढ़ियों ने बजाज समूह को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। समय के साथ यह समूह भारतीय उद्योग जगत का एक प्रमुख नाम बना। आज भी बजाज परिवार व्यापार के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों और परोपकार की परंपरा को आगे बढ़ाने की बात करता है। यही विरासत जमनालाल बजाज की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है। आज बजाज ग्रुप की कुल नेटवर्थ करीब 14 लाख करोड़ रुपये है।



