स्टारलिंक ने कहा कि उसने भारत में रेगुलेटर्स, इंडस्ट्रीज और ऑपरेटर्स के साथ 5 साल से अधिक समय तक काम किया है और देश में जरूरी सरकारी मंजूरियों के साथ एक समर्पित इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है. एलन मस्क की कंपनी ने भारत में हाईस्पीड इंटरनेट सेवाएं देने के लिए अपनी तैयारी का दावा किया है.

‘X’ पर स्टारलिंक की पोस्ट में रिलायंस इंडस्ट्रीज के उस बयान को भी टैग किया गया, जो शुक्रवार को ही जारी हुआ था. मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस ने कहा कि वह सैटेलाइट कम्युनिकेशन के सेक्टर में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है, लेकिन साथ ही जोर दिया कि सभी कंपनियों को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा.
स्टारलिंक ने ‘X’ पर जवाब देते हुए कहा कि हमने भारत में नियामकों, उद्योग और ऑपरेटरों के साथ 5 साल से अधिक समय तक मिलकर काम किया है. हमने देश के भीतर ही समर्पित सिस्टम, गेटवे और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर का एक नेटवर्क तैयार किया है, ताकि भारतीय ट्रैफिक को सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से सेवाएं दी जा सकें और यह सब जरूरी सरकारी मंजूरियों के साथ किया गया है. स्टारलिंक ने आगे कहा कि वह भारत को हाईस्पीड इंटरनेट से जोड़ने के लिए तैयार है.
We have worked closely with regulators, industry and operators in India for 5+ years, and built a network of dedicated systems, gateways, and other infrastructure all incountry to exclusively serve Indian traffic safely and securely – and all with the requisite government approvals.
Starlink is ready to connect India with highspeed internet.
— Starlink October 16, 2026
रिलायंस का आया था बयान
शुक्रवार को हुई यह बातचीत भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन मार्केट में प्रतिस्पर्धा को लेकर चल रही सार्वजनिक बहस के बीच सामने आई है. एलन मस्क ने भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन माहौल की आलोचना की थी और यहां के प्रतिस्पर्धी माहौल पर सवाल उठाए थे. रिलायंस ने कहा कि वह एक प्रतिस्पर्धी बाजार को इस बात की असली परीक्षा मानती है कि कौन सी कंपनी ग्राहकों को सबसे अच्छी सेवा देती है.
साथ ही, रिलायंस ने जोर देकर कहा कि भारत में काम करने वाली हर कंपनी को कानून का पालन करना ही होगा. मस्क की हालिया टिप्पणियों के जवाब में, रिलायंस ने शुक्रवार को कहा कि वह “तथ्यों को सबके सामने” रख रही है. कंपनी ने अपने बयान में कहा कि रिलायंस में, हम कभी भी प्रतिस्पर्धा से नहीं डरे हैं. हम इसे इस बात की सबसे बड़ी परीक्षा मानते हैं कि कौन ग्राहकों को सबसे अच्छी सेवा देता है.
रिलायंस ने अपने रुख के समर्थन में जियो के रिकॉर्ड का हवाला दिया. कंपनी ने बताया कि 2016 में जब जियो भारत के पहले से ही भरे हुए टेलीकॉम मार्केट में एक नई कंपनी के तौर पर उतरी थी, तब उसके पास एक भी ग्राहक नहीं था. लेकिन महज 10 साल के भीतर, इसने 530 मिलियन से अधिक ग्राहकों का भरोसा जीता है. जियो ने भारतीयों को दुनिया का बेहतरीन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सबसे सस्ता डेटा उपलब्ध कराया है.
Statement from Reliance Industries
In light of recent remarks about Reliance and the Indian market, we wish to place the facts on record.
Like every Indian enterprise, Reliance has grown in an India that welcomes investment and innovation, homegrown or international, that improve the lives of the people.
That openness rests on the rule of law. As the Government of India has stated, it applies the same process to every applicant, Indian or foreign. Jio’s own satellite services await clearances.
At Reliance, we have never feared competition. We see it as the truest test of who serves the customer best. Jio itself entered India’s crowded telecom market in 2016 as the newest player, with not a single customer. In just ten years, Jio has earned the trust of over 530 million customers and given Indians some of the best digital infrastructure and most affordable data in the world.
We welcome competition in satellite communications, including Starlink. Every player, Jio included, must serve the people of India and abide by the laws and policies of the land.
— Reliance Industries Limited October 16, 2026
कंप्टीशन का करते हैं स्वागत
रिलायंस के बयान में कहा गया कि हम सैटेलाइट कम्युनिकेशन में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करते हैं, जिसमें स्टारलिंक भी शामिल है. हर कंपनी को जिसमें जियो भी शामिल है भारत के लोगों की सेवा करनी चाहिए और देश के कानूनों व नीतियों का पालन करना चाहिए. इसमें आगे कहा गया है कि निवेश और इनोवेशन के प्रति भारत का खुलापन ‘कानून के शासन’ पर टिका है.
कंपनी ने कहा कि हर भारतीय उद्यम की तरह, रिलायंस भी ऐसे भारत में विकसित हुआ है जो निवेश और इनोवेशन का स्वागत करता है—चाहे वह घरेलू हो या अंतरराष्ट्रीयजो लोगों के जीवन को बेहतर बनाते हैं. यह खुलापन कानून के शासन पर आधारित है. रिलायंस ने कहा कि जैसा कि सरकार का भी कहना है, वह हर आवेदक के लिए एक जैसी प्रक्रिया अपनाती है. कंपनी ने यह भी जोड़ा कि जियो की अपनी सैटेलाइट सेवाओं को भी अभी मंजूरियों का इंतजार है.
स्टारलिंक और मस्क के हालिया दावों से जुड़े विवाद पर सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत में काम करने वाली किसी भी कंपनी को देश के कानूनों का पालन करना होगा. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का रुख शुरू से ही स्पष्ट और एक जैसा रहा है. सूत्रों ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि सरकार का रुख बहुत साफ रहा हैऔर उस समय भी यही था जब उन्होंने आवेदन किया था—कि अगर आप भारतीय कानूनों का पालन नहीं करते हैं, तो आप यहां कारोबार नहीं कर सकते… इसलिए, यहां कारोबार करने के लिए आपको भारतीय कानूनों का पालन करना ही होगा.
एयरटेल स्टारलिंक से काफी आगे
हाल ही में ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026’ में, भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील मित्तल ने कहा कि उनका सैटेलाइट कम्युनिकेशन वेंचर ‘यूटेलसैट वनवेब’ , भारत में सेवाएं शुरू करने की कतार में एलन मस्क की ‘स्टारलिंक’ से काफी आगे है. उनके इस बयान ने देश के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में रेगुलेटरी मंजूरियों और प्रतिस्पर्धा को लेकर चल रहे सार्वजनिक विवाद में एक नया मोड़ ला दिया है. मित्तल ने कहा कि मुझे लगता है कि मैं इस कतार में उनसे काफी आगे हूं. मैंने पांच साल पहले आवेदन किया था. उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास अभी अनुमति नहीं है, इसलिए अगर हमें उनसे कुछ दिन पहले भी यह अनुमति मिल जाती है, तो हमें बहुत खुशी होगी. मित्तल ने बताया कि ‘वनवेब’ का ग्राउंड नेटवर्क तीन साल से तैयार है और इसके सैटेलाइट पांच साल से भारत के ऊपर मौजूद हैं, लेकिन कंपनी को अभी भी कमर्शियल कामकाज शुरू करने की अनुमति का इंतजार है.
#WATCH | Delhi | Bloomberg New Economy Forum | Over Elon Musk’s tweet on Starlink, Bharti Enterprises Chairman Sunil Bharti Mittal says, “We are all awaiting our approvals. I am significantly ahead of him in the queue. I applied five years back. I have had my ground network ready for the last three years. My satellites have been hovering over India for the last five years. We don’t have the permission. So, we will be very happy to get it at least a few days before him.”
— ANI October 14, 2026
संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बयान
संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि तीन कंपनियों मस्क की ‘स्टारलिंक’, रिलायंस की ‘जियो सैटकॉम’ और भारती समर्थित ‘यूटेलसैट वनवेब’ को सैटेलाइट कम्युनिकेशन लाइसेंस मिल चुके हैं. उन्होंने कहा कि अमेज़न के ‘प्रोजेक्ट कुइपर’ ने भी दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन उन्हें तय प्रक्रिया का पालन करना होगा. सिंधिया ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा रेवेन्यूआधारित चार्जिंग फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने और ऑपरेटरों द्वारा सुरक्षा शर्तों को पूरा करने के बाद ही स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण और दूरसंचार विभाग सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की कीमत तय करने के फैसले के काफी करीब हैं. इस विवाद का मुख्य बिंदु लाइसेंस और ऑपरेशनल अप्रूवल के बीच का अंतर है: सिर्फ लाइसेंस मिल जाने से ही कोई कंपनी कमर्शियल सेवाएं शुरू नहीं कर सकती. स्पेक्ट्रम का आवंटन और सुरक्षा शर्तों को पूरा करना अभी भी जरूरी कदम हैं.
#WATCH | Delhi: Union Minister Jyotiraditya Scindia says, “…Let me be very clear. India does not allow monopoly in any sector. Therefore, even as far as SATCOM is concerned, there is not a single licensee that has been chosen. Licenses have been given to everyone who wants to provide these services. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। Today, there are three licenses that are out there. There is a lot of conversation about a particular party, but there are three parties that have got licenses: there is Reliance Jio, there is OneWeb, and there is Starlink. And there is another party that is also interested in procuring a license—and that process has to be followed by that party, which is Amazon Project Kuiper. Now, three parties have already got a license. Once the revenue charges system is finalized, and once each one of these parties—party A, B, and C—all three individually based on their achievement or milestones with regard to security concerns and prerequisites have fulfilled the requirements, then obviously they can start operations. But that has to be a compliance that is done by each one of them individually.”
— ANI October 9, 2026
आ रहा है रिलायंस का आईपीओ
यह विवाद रिलायंस के लिए एक अहम समय पर सामने आया है. कंपनी अपने डिजिटल सर्विस बिजनेस, ‘जियो प्लेटफॉर्म्स’ का आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है. जियो ने 27 करोड़ नए शेयरों के लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. इसमें ‘ऑफर फॉर सेल’ शामिल नहीं है. प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर, इस बिक्री से लगभग 30,213 करोड़ रुपये जुटेंगे. यह अक्टूबर 2024 में हुई हुंडई मोटर इंडिया की 27,870 करोड़ रुपये की शेयर बिक्री से अधिक है, जो अब तक की सबसे बड़ी बिक्री थी. इस कीमत के हिसाब से कंपनी का मार्केट वैल्यूएशन लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये बैठता है, जो कंपनी द्वारा पहले बताए गए 11 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य से कुछ कम है. इसके लिए बोलियां 21 से 23 अक्टूबर तक लगाई जा सकेंगी, जबकि एंकर निवेशक 19 अक्टूबर को बोली लगा सकेंगे. उम्मीद है कि 28 अक्टूबर से शेयरों की ट्रेडिंग शुरू हो जाएगी.
ये भी है रिलायंस का प्लान
रिलायंस अपने सैटेलाइट प्रोजेक्ट पर भी काम कर रही है. इसमें ‘लोअर्थऑर्बिट’ में लगभग 1,600 सैटेलाइट्स का एक नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव है, जिसका मकसद 600,000 गांवों तक इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाना है. इससे जियो का सीधा मुकाबला स्टारलिंक से होगा. स्टारलिंक भी एक ऐसे बड़े बाजार में अपनी पहुंच बनाना चाहती है, जहां सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के जरिए उन दूरदराज के इलाकों और समुदायों तक इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है, जहां सामान्य नेटवर्क की पहुंच बहुत कम या न के बराबर है. दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल रिलायंस और स्पेसएक्स के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें जियो के रिटेल नेटवर्क के जरिए भारतीय ग्राहकों तक स्टारलिंक की सेवाएं पहुंचाने के तरीकों पर विचार किया जाना था.



