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नई दिल्ली। आज के समय में किसी दुकान की सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे, ताले और दुकानदार की मौजूदगी आम बात है। लेकिन भारत के पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में इससे बिल्कुल अलग तस्वीर देखने को मिलती है। यहां कई जगह ऐसी दुकानें हैं, जहां न कोई दुकानदार बैठता है, न सामान की निगरानी के लिए कैमरे लगाए जाते हैं और न ही दुकान बंद करने के लिए ताला लगाया जाता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं।

इसके बावजूद लोग अपनी जरूरत का सामान खरीदते हैं और उसकी कीमत खुद चुकाकर चले जाते हैं। इन दुकानों को स्थानीय स्तर पर ‘नघाह लोह डॉर’ कहा जाता है, जिसका मतलब है ‘बिना दुकानदार की दुकान’। ग्रामीण इलाकों में सड़क किनारे और हाईवे के पास ऐसी दुकानें देखने को मिलती हैं। किसान और स्थानीय लोग अपने खेतों से लाई गई ताजी सब्जियां और फल यहां रख देते हैं और फिर अपने काम पर चले जाते हैं।

खुद सामान चुनते हैं ग्राहक
इन दुकानों पर फल और सब्जियों के साथ उनकी कीमत भी लिखी होती है। ग्राहक अपनी जरूरत के मुताबिक सामान चुनता है और निर्धारित रकम पास रखे बॉक्स में डाल देता है। इसके लिए किसी कैशियर या दुकानदार की जरूरत नहीं पड़ती।
कई जगहों पर सामान खरीदने की पूरी प्रक्रिया ग्राहक खुद ही पूरी करता है। यानी सामान लेना, उसकी कीमत तय करना और भुगतान करना—सब कुछ भरोसे के आधार पर होता है।


चोरी रोकने के लिए नहीं, भरोसे के लिए पहचान
इन दुकानों की सबसे खास बात यह है कि यहां सुरक्षा के लिए आम दुकानों जैसी व्यवस्था नजर नहीं आती। स्थानीय लोगों के अनुसार, लंबे समय से चली आ रही इस परंपरा की पहचान आपसी विश्वास और ईमानदारी से जुड़ी है।
कई बार ग्राहक निर्धारित कीमत से अधिक पैसे भी छोड़ जाते हैं। यही वजह है कि ये दुकानें केवल खरीदारी की जगह नहीं, बल्कि स्थानीय सामाजिक भरोसे की मिसाल के तौर पर भी चर्चा में रहती हैं।


कैश बॉक्स से QR कोड तक पहुंची परंपरा
समय के साथ इन दुकानों के भुगतान का तरीका भी बदल रहा है। पहले ग्राहक सामान लेने के बाद केवल कैश बॉक्स में पैसे डालते थे। अब कई जगहों पर QR कोड के जरिए डिजिटल पेमेंट की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
भुगतान का तरीका भले ही आधुनिक हो गया हो, लेकिन इस व्यवस्था की बुनियाद आज भी वही है—ग्राहक और दुकानदार के बीच विश्वास।


मिजोरम की ये बिना दुकानदार वाली दुकानें दिखाती हैं कि तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था के दौर में भी सामाजिक भरोसा किसी समुदाय की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा हो सकता है।