Varanasi News: उत्तर प्रदेश में वाराणसी के लक्सा थाना क्षेत्र के एक होम स्टे 9 और 10 अगस्त को मुखर्जी परिवार के तीन सदस्यों की मौत ने लोगों को झकझोर के रख दिया था. लेकिन उससे भी कष्टदायक खबर मुखर्जी परिवार के अंतिम संस्कार से जुड़ी है. मुखर्जी परिवार के अंतिम संस्कार में उनका कोई भी रिश्तेदार शामिल नहीं हुआ. पुलिस ने कई सगे0संबंधियों ने संपर्क कर जानकारी दी लेकिन कोई आने को तैयार नहीं हुआ, सभी ने आने से इनकार कर दिया.

जानकारी के मुताबिक, मूल रुप से प्रयागराज के रहने वाले विशाल मुखर्जी की बहन और कई दूसरे रिश्तेदारों से पुलिस ने संपर्क किया लेकिन सभी ने आने से मना कर दिया.रिश्तेदारों में कोई प्रोफेसर तो कोई अफसर है लेकिन सभी ने पल्ला झाड़ लिया. प्रयागराज के कर्नलगंज निवासी बहन और बहनोई से लक्सा पुलिस ने बीते बृहस्पतिवार को संपर्क किया था. तब बहन ने पुलिस को फोन पर बताया कि भैया और भाभी से 12 साल पहले ही उनका संबंध टूट चुका था.
तीन दिन तक पुलिस करती रही इंतजार
कुछ रिश्तेदारों ने बताया कि प्रयागराज के कर्नलगंज के मूल निवासी विशाल मुखर्जी 15 साल पहले सीमेंट फैक्ट्री में काम करने महाराष्ट्र गए थे और वहीं बस गए. माता पिता को भी साथ ले गए. रिश्तेदारों से पुलिस को मालूम हुआ कि विशाल मुखर्जी ने बड़े अमाउंट का कर्ज ले रखा था. पिता के दोस्तों से भी पैसे उधार पर लिए थे. किसी को लौटाते नहीं थे.
बेटे ईशान ने दोस्तों से भी कर्ज ले रखे थे. गंभीर बीमारी में ज्यादा पैसा खर्च हुआ. विशाल की पत्नी जया की भी तबीयत ठीक नहीं रहती थी उनका भी उपचार जारी था. महाराष्ट्र के रायगढ़ से सात अगस्त को मुखर्जी परिवार वाराणसी पहुंचा था. 55 वर्षीय विशाल मुखर्जी उनकी 52 वर्षीय पत्नी जया मुखर्जी और 27 वर्षीय ईशान मुखर्जी तीनों लक्सा थाना क्षेत्र के वाची गेस्ट हाउस में ठहरे थे. 9 अगस्त की रात विशाल की तबीयत खराब हुई और बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में मौत हो गई. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। 10 अगस्त की देर शाम होम स्टे में मांबेटे ने जहर खाकर जान दे दी.
हरिश्चन्द्र घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
दाह संस्कार करने वाले अमन कबीर ने कहा कि ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और कष्टदायक है कि रिश्तेदारों में कोई अफसर है तो कोई प्रोफेसर, लेकिन मुखर्जी परिवार के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए कोई रिश्तेदार नहीं आया.
तीन दिनों तक लक्सा पुलिस ने इंतजार किया लेकिन मुखर्जी परिवार का शव लेने कोई नहीं आया. बहन ने रिश्ते खत्म होने की बात की तो रिश्तेदारों ने दूरी बनाए रखने की बात कही. तीन दिन के बाद बीते शुक्रवार को हरिश्चन्द्र घाट पर मुखर्जी परिवार का दाह संस्कार हुआ. दाह संस्कार समाजेवी संस्थान अमन कबीर ट्रस्ट की तरफ से अमन कबीर ने किया.
लक्सा पुलिस की देखरेख में अंतिम संस्कार कराया गया. मुखर्जी परिवार के तीनों सदस्यों के लिए एक ही चिता सजाई गई थी. एक साथ जब तीनों शवों को मुखाग्नि दी गई तो माहौल गमगीन हो गया. लोगों ने कहा कि जीते जी भी और मरने के बाद भी मुखर्जी परिवार अपनों के लिए तरस गया.



