नई दिल्‍ली: अमेरिका अगर अपने नए ‘जबरन मजदूरी रोकने वाले नियम’ के तहत प्रस्तावित रेसिप्रोकल टैरिफ लागू करता है तो वहां होने वाले भारत के लगभग 4 अरब डॉलर के एक्सपोर्ट को एशियाई देशों के एक्सपोर्टर्स से कड़ी टक्कर मिल सकती है। मनीकंट्रोल के एक विश्‍लेषण में यह जानकारी दी गई है।

ये प्रस्तावित टैरिफ ‘यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव’ के ‘सेक्शन 301’ के तहत की गई जांच का नतीजा हैं। इस जांच में पाया गया कि भारत समेत 60 देशों ने जबरन मजदूरी से बने सामान के इंपोर्ट पर या तो रोक नहीं लगाई या फिर नियमों को ठीक से लागू नहीं किया।

10% या 12.5% का एडिशनल टैरिफ लगाने का प्रस्ताव
USTR ने इन देशों से होने वाले इंपोर्ट पर 10% या 12.5% का एडिशनल टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है। यह दर उसके रेगुलेटरी सिस्टम की मजबूती पर निर्भर करेगी। अंतिम फैसला लेने से पहले USTR ने लोगों से राय भी मांगी है। उम्मीद है कि मलेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश और इंडोनेशिया पर 10% की कम ड्यूटी लगेगी। जबकि भारत पर 12.5% की ड्यूटी लग सकती है।

अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं तो जिन देशों में टैरिफ दरें कम हैं या जिनका अमेरिका के साथ खास व्यापारिक समझौता है, वे कई प्रोडक्ट कैटेगरी में मार्केट शेयर हासिल कर सकते हैं। इन कैटेगरी में वे सीधे तौर पर भारतीय एक्सपोर्टर्स से मुकाबला करते हैं।

मलेशिया, बांग्लादेश और पाकिस्तान को होगा फायदा
मनीकंट्रोल की एनालिसिस से पता चलता है कि मलेशिया को सबसे ज्‍यादा फायदा हो सकता है। कारण है कि भारत का 3.93 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट कम प्रतिस्पर्धी हो सकता है। इसके बाद इंडोनेशिया का नंबर आता है , जबकि बांग्लादेश को भारत के 1.19 अरब डॉलर के एक्सपोर्ट और पाकिस्तान को लगभग 761 मिलियन डॉलर के एक्सपोर्ट के बराबर फायदा हो सकता है।

ये जोखिम ज्‍यादातर उन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हैं जहां बहुत ज्‍यादा मजदूरों की जरूरत होती है। प्रतिस्पर्धी एक्सपोर्टर्स की अमेरिकी बाजार में पहले से ही मजबूत मौजूदगी है।

पाकिस्तान को जर्सी और पुलओवर के मामले में फायदा हो सकता है, जहां भारत के लगभग 430 मिलियन डॉलर के एक्सपोर्ट को कड़ी टक्कर मिलने के आसार हैं। पाकिस्तान ‘बेड लिनन’ के मामले में भी भारत का कड़ा प्रतिस्पर्धी है। 2024 में भारत ने अमेरिका को 49.1 मिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया, जबकि पाकिस्तान ने 40.9 मिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया। दोनों के बीच सिर्फ 16.7% का अंतर है।

इंडोनेशिया को इस तरह फायदा
उम्मीद है कि मलेशिया को इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स के मामले में सबसे ज्‍यादा प्रतिस्पर्धी फायदा मिलेगा। भारत के इलेक्ट्रिक स्टैटिक कन्वर्टर्स के लगभग 62.7 करोड़ डॉलर के एक्सपोर्ट पर दबाव आ सकता है। 2024 में इस कैटेगरी में मलेशिया का अमेरिका को एक्सपोर्ट भारत के मुकाबले सिर्फ 10% कम था। भारत के लकड़ी के फर्नीचर के एक्सपोर्ट का 35.2 करोड़ डॉलर का हिस्सा भी मलेशियाई सप्लायर्स से कॉम्पिटिशन का सामना कर रहा है।

इंडोनेशिया जर्सी, झींगे जैसी कैटेगरी में मार्केट शेयर हासिल कर सकता है। इन कैटेगरी में 2024 में अमेरिका को भारत का कुल एक्सपोर्ट लगभग 85 करोड़ था।

बांग्लादेश को मुख्य रूप से गारमेंट्स और टेक्सटाइल्स में फायदा हो सकता है। जर्सी और पुलओवर के अलावा, वह टीशर्ट, शर्ट और कॉफीचाय से बने प्रोडक्ट्स में भी भारत को कड़ी टक्कर देता है। इन प्रोडक्ट्स में टैरिफ में मामूली फायदा भी उसे अमेरिकी मार्केट में ज्‍यादा कॉम्पिटिटिव बना सकता है।