1 अप्रैल 2027 से कार कंपनियों के लिए इलेक्ट्रिक कारें और भी खास हो सकती हैं. इसकी वजह CAFEIII के नए नियम हैं. इन नियमों में एक इलेक्ट्रिक कार को कंपनी की फ्यूल एफिशिएंसी की गणना में 3 कारों के बराबर गिना जा सकता है.

लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कंपनी ने 1 EV बेचकर 3 कारें बेच दीं. कंपनी ने असल में सिर्फ 1 कार ही बेची है. तीन कारों की गिनती सिर्फ सरकारी नियमों के तहत हिसाब लगाने के लिए होगी.

एक EV की गिनती 3 क्यों होगी?

का पूरा नाम Corporate Average Fuel Economy है. आसान भाषा में समझें तो सरकार कार कंपनियों की गाड़ियों का औसत देखती है कि वे कितना ईंधन इस्तेमाल करती हैं और कितना CO2 छोड़ती हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अगर किसी कंपनी के पास ज्यादा पेट्रोल और डीजल कारें हैं, तो उसका औसत ज्यादा हो सकता है. ऐसे में इलेक्ट्रिक कारें कंपनी के औसत को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं.

नए नियमों में अलगअलग गाड़ियों के लिए अलगअलग गिनती तय की गई है.

  • बैटरी वाली EV और रेंजएक्सटेंडेड EV: 3 गुना
  • प्लगइन हाइब्रिड और फ्लेक्सफ्यूल एथेनॉल हाइब्रिड: 2.5 गुना
  • सामान्य स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड: 1.6 गुना
  • फ्लेक्सफ्यूल एथेनॉल कार: 1.1 गुना

यानी EV को सबसे बड़ा फायदा मिलेगा

एक आसान उदाहरण से समझिए

मान लीजिए किसी कार कंपनी ने 90 सामान्य कारें और 10 EV बेचीं. असल में कंपनी ने कुल 100 कारें ही बेची हैं. लेकिन CAFE के हिसाब से 10 EV को 3 गुना गिना जाएगा. इसलिए हिसाब लगाते समय इन 10 EV को 30 कारों के बराबर माना जा सकता है. इससे कंपनी को अपने औसत फ्यूल इस्तेमाल और CO2 का हिसाब बेहतर रखने में मदद मिल सकती है. ध्यान रहे, कंपनी के बिक्री आंकड़े नहीं बदलेंगे. कंपनी ने 100 कारें ही बेची हैं, 120 या 130 नहीं.

हर साल नियम होंगे और सख्त

में कार कंपनियों के लिए नियम FY2028 से FY2032 तक धीरेधीरे सख्त होंगे. 1,229 किलो के रेफरेंस फ्लीट वेट वाली कंपनी के लिए तय औसत सीमा FY2028 में 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर होगी. FY2032 तक यह घटकर 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर हो जाएगी. यानी कंपनियों को समय के साथ अपनी कारों की फ्यूल एफिशिएंसी बेहतर करनी होगी.

सिर्फ EV ही रास्ता नहीं

नए नियमों में कंपनियों को सिर्फ इलेक्ट्रिक कारें बेचने के लिए नहीं कहा गया है. हाइब्रिड, प्लगइन हाइब्रिड, CNG और एथेनॉल जैसी तकनीकों से भी मदद मिल सकती है.

E20 या उससे ज्यादा एथेनॉल वाले ईंधन के लिए कुछ पेट्रोल कारों को 8% कार्बनन्यूट्रैलिटी फैक्टर मिलेगा. CNG कारों के लिए यह 5% है.कुछ खास तकनीकों के लिए अतिरिक्त क्रेडिट और कंपनियों के बीच क्रेडिट की खरीदबिक्री का रास्ता भी रखा गया है.

शोरूम में ज्यादा दिख सकती हैं EV और हाइब्रिड

इन नियमों का असर आने वाले समय में कारों पर भी दिख सकता है. जिन कंपनियों की EV बिक्री अच्छी है, उन्हें CAFE नियमों का हिसाब संभालने में मदद मिलेगी. वहीं, पेट्रोल और डीजल कारों पर ज्यादा निर्भर कंपनियां EV, हाइब्रिड और कम ईंधन खर्च वाली कारों पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं. इसलिए अगले 12 से 18 महीनों में कई कंपनियां नए EV, हाइब्रिड और कम खपत वाले मॉडल पेश कर सकती हैं. यानी CAFEIII सिर्फ सरकारी हिसाबकिताब का नियम नहीं है, इसका असर आने वाली नई कारों पर भी पड़ सकता है.