शेयर बाजार में निवेश करते समय लार्जकैप शेयरों को सबसे भरोसेमंद दांव माना जाता है. निवेशकों को लगता है कि बड़ी कंपनियों में पैसा लगाने से जोखिम कम होता है. लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता. निफ्टी में शामिल 6 ऐसी दिग्गज कंपनियां हैं, जिन्होंने पिछले 5 सालों में निवेशकों को सिर्फ निराशा दी है. इन कंपनियों ने अपने निवेशकों को निगेटिव रिटर्न दिया है. इस लिस्ट में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज , इन्फोसिस, हिंदुस्तान यूनिलीवर , एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस, एशियन पेंट्स से लेकर एचडीएफसी बैंक जैसे बड़े नाम शामिल हैं. ये सभी कंपनियां अपनेअपने सेक्टर की मार्केट लीडर हैं, फिर भी ग्रोथ, वैल्यूएशन समेत अन्य सेक्टर आधारित समस्याओं के कारण इनका प्रदर्शन काफी खराब रहा है.

आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों का बुरा हाल

इस लिस्ट में सबसे खराब प्रदर्शन TCS का रहा है. पिछले 5 साल में इस शेयर में 37% की गिरावट आई है. इन्फोसिस का हाल भी कुछ ऐसा ही है, जिसके शेयरों में 34% की गिरावट दर्ज की गई है. इन दोनों कंपनियों को आईटी सर्विसेज के पुराने ग्रोथ मॉडल के दबाव में आने से भारी नुकसान उठाना पड़ा है. ग्लोबल क्लाइंट्स ने फिलहाल टेक्नोलॉजी पर अपना खर्च कम कर दिया है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव ने ट्रेडिशनल आउटसोर्सिंग सर्विस की मांग पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्राहकों की तरफ से कम कीमत की मांग के कारण भारतीय आईटी कंपनियों को अपने बिजनेस मॉडल पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. निफ्टी आईटी इंडेक्स ने इस साल अपनी मार्केट वैल्यू का 73 अरब डॉलर गंवा दिया है.

कंपनी का नाम 5 साल का रिटर्न
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज 37
इन्फोसिस 34
हिंदुस्तान यूनिलीवर 23
एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी 18
एशियन पेंट्स 13
एचडीएफसी बैंक 6

एफएमसीजी से लेकर पेंट सेक्टर तक दबाव

सिर्फ आईटी ही नहीं, बल्कि कंज्यूमर सेक्टर की मजबूत कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर भी निवेशकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है. 5 साल में इसके शेयर 23% तक गिरे हैं. ग्रामीण इलाकों में कमजोर मांग, महंगाई के कारण बढ़ती लागत ने कंपनी के मार्जिन पर गहरा असर डाला है. दूसरी तरफ एशियन पेंट्स के शेयरों में भी 13% की गिरावट देखी गई है. डेकोरेटिव पेंट सेक्टर में मांग घटने, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के साथसाथ बिड़ला ओपस जैसी नई कंपनियों की एंट्री से कॉम्पीटिशन काफी बढ़ गया है. इन कंपनियों ने कीमतें जरूर बढ़ाईं, लेकिन कच्चे माल की महंगाई के चलते मार्जिन का दबाव लगातार बना हुआ है.

वित्तीय क्षेत्र के दिग्गज भी पिछड़े

इंश्योरेंस सेक्टर में एचडीएफसी लाइफ ने 5 साल में 18% का निगेटिव रिटर्न दिया है. धीमी ग्रोथ के कारण कंपनी के मुनाफे के मेट्रिक्स पर दबाव पड़ा है. वहीं, बैंकिंग सेक्टर के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले एचडीएफसी बैंक के शेयरों में 6.47% की गिरावट आई है. एचडीएफसी लिमिटेड के साथ हुए मर्जर के बाद बैंक की बैलेंस शीट तो बड़ी हो गई, लेकिन डिपॉजिट बेस अपेक्षाकृत छोटा रहने के कारण इसके मार्जिन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. जानकारों के मुताबिक ऊंचे क्रेडिटडिपॉजिट रेशियो के कारण बैंक को महंगे डिपॉजिट पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

लंबी अवधि के निवेशकों को क्या करना चाहिए

इन 6 शेयरों का एक ही सच है कि निवेशकों ने स्थिरता के नाम पर इनकी भारी कीमत चुकाई थी. जब ग्रोथ धीमी हुई तो इन शेयरों के पास संभलने का मौका बहुत कम था. हालांकि, तमाम निराशाओं के बावजूद लार्जकैप शेयरों को अभी भी लंबी अवधि के लिए सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है. राइट होराइजन्स पीएमएस के एमडी अनिल रेगो का कहना है कि वैल्यूएशन आधारित गिरावट का सबसे बुरा दौर शायद अब बीत चुका है. भारतीय शेयर बाजार अब कमाई के आधार पर आगे बढ़ रहा है. ऐसे में निवेशकों को सही बिजनेस मॉडल वाली कंपनियों की तलाश करनी चाहिए.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.