भारत में डिजिटल पेमेंट का तरीका तेजी से बदल रहा है. दुकानों और कारोबारियों को पैसे देने के लिए लोग अब क्रेडिट और डेबिट कार्ड की तुलना में UPI का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. इसका असर डिजिटल मर्चेंट पेमेंट मार्केट में साफ दिखाई दे रहा है. UPI की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है, जबकि कार्ड से होने वाले पेमेंट का हिस्सा घट रहा है.

इक्विरस की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में दुकानदारों और कारोबारियों को किए गए डिजिटल पेमेंट में UPI की हिस्सेदारी बढ़कर 77.3% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. एक साल पहले जुलाई में यह आंकड़ा 74.9% था. वहीं, जून में UPI की हिस्सेदारी 77.1% रही थी. यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब भारत का डिजिटल मर्चेंट पेमेंट बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है. जुलाई में यह बाजार सालाना आधार पर 19.6% बढ़कर 11.7 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. यानी डिजिटल पेमेंट का पूरा बाजार बढ़ रहा है और इस बढ़त का बड़ा हिस्सा UPI के खाते में जा रहा है.
क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी में गिरावट
दूसरी तरफ, क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी में गिरावट आई है. जुलाई में मर्चेंट पेमेंट में क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी 17.7% रही. एक साल पहले यह 19.8% थी. पिछले 12 महीनों का औसत भी करीब 19% रहा है. डेबिट कार्ड को इससे भी ज्यादा नुकसान हुआ है. जुलाई में मर्चेंट पेमेंट में डेबिट कार्ड की हिस्सेदारी घटकर 3.2% रह गई, जबकि एक साल पहले यह 3.9% थी. यानी जो खर्च पहले लोग सीधे बैंक खाते या डेबिट कार्ड से करते थे, उसका एक हिस्सा अब UPI पर जा रहा है.
UPI तेजी से आगे बढ़ा
पूरे रिटेल पेमेंट बाजार में भी UPI तेजी से आगे बढ़ा है. CareEdge Analytics & Advisory के अनुसार, FY23 में रिटेल पेमेंट ट्रांजैक्शन में UPI की हिस्सेदारी 73.6% थी, जो FY27 की जून तिमाही में बढ़कर 86.8% हो गई. अब UPI के सामने अगली चुनौती इसके सिस्टम को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने की है. CareEdge के मुताबिक, सरकार कुछ बड़े मर्चेंट पेमेंट पर मामूली MDR यानी पेमेंट शुल्क लगाने की व्यवस्था कर सकती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। हालांकि आम ग्राहकों के UPI पेमेंट और सभी व्यक्तिसेव्यक्ति पेमेंट मुफ्त रहने की उम्मीद है.
मर्चेंट पेमेंट की हिस्सेदारी 29%
CareEdge के अनुसार, कुल UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू में मर्चेंट पेमेंट की हिस्सेदारी 29% है. इनमें 2,000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट की हिस्सेदारी 67.2% है. FY26 के आंकड़ों के आधार पर कुल UPI वैल्यू का करीब 19.5% हिस्सा संभावित MDR दायरे में आ सकता है. अगर MDR 0.25% से 0.50% रखा जाता है, तो इससे सालाना 15,000 से 30,000 करोड़ रुपये तक की कमाई का मौका बन सकता है. हालांकि रोजमर्रा के छोटे पेमेंट और व्यक्तिसेव्यक्ति UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रखने की बात कही गई है.



