Pratapgarh News: बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन भले ही कभी अपने पैतृक गांव नहीं पहुंचे, लेकिन ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के मंच पर एक बार फिर उनका अपने वतन के प्रति प्रेम और मलाल छलका है. रियलिटी शो में प्रतापगढ़ के प्रतियोगी चंद्र प्रकाश तिवारी से बातचीत के दौरान बिगबी ने अपने पैतृक गांव बाबूपट्टी और आसपास के लोगों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी. अमिताभ बच्चन ने गांव वालों को आश्वस्त करते हुए कहा, “आप लोग घबराइए नहीं, जल्द ही लाइब्रेरी शुरू होगी.”

इस घोषणा के बाद एक तरफ जहां बाबूपट्टी के ग्रामीणों में उम्मीद जगी है. वहीं दूसरी तरफ 20 साल से बिना किताबों के जर्जर हो रही लाइब्रेरी की इमारत प्रशासनिक व पारिवारिक उपेक्षा का सच बयान कर रही है. KBC में प्रतापगढ़ की पट्टी तहसील स्थित डड़वा महोखरी निवासी चंद्र प्रकाश तिवारी हॉटसीट पर पहुंचे थे. बातचीत के दौरान जब बाबूपट्टी का जिक्र आया, तो अमिताभ बच्चन भावुक हो गए.
उन्होंने कहा, “ये हमारे पूर्वजों का जन्मस्थान था. बाबूजी वहीं से आए थे. हम वहां कुछ करना चाह रहे थे, लेकिन उसमें रुकावट आ गई. वहां के लोग हमसे बहुत नाराज हैं. प्रतापगढ़ और बाबूपट्टी के लोगों से हम हाथ जोड़कर माफी चाहते हैं.”
2006 में जया बच्चन ने किया था उद्घाटन
अमिताभ बच्चन के पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन का पैतृक गांव रानीगंज तहसील का बाबूपट्टी है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। बच्चन परिवार की गांव में जो पुश्तैनी जमीन थी, उसे दान दे दिया गया था. उसी जमीन पर लाइब्रेरी निर्माण की योजना बनी थी. साल 2004 में तत्कालीन सपा सांसद स्वर्गीय सी.एन. सिंह ने सांसद निधि से 22 लाख जारी कर लाइब्रेरी भवन बनवाया था.
5 मार्च 2006 को जया बच्चन और स्वर्गीय अमर सिंह ने गांव पहुंचकर भवन का लोकार्पण किया था. तब जया बच्चन ने मंच से वादा किया था कि वे बेटे अभिषेक बच्चन की शादी के बाद बहू ऐश्वर्या राय और पति अमिताभ बच्चन को लेकर गांव आएंगी. साथ ही गांव में गर्ल्स डिग्री कॉलेज खुलवाने की बात भी कही थी.
20 साल का सूखा: किताबें आईं न खिड़कीदरवाजे बचे
लोकार्पण के करीब 20 साल बीत जाने के बाद भी लाइब्रेरी में आज तक एक भी किताब नहीं पहुंची. रखरखाव के अभाव में लाइब्रेरी की इमारत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. खिड़कीदरवाजे टूट चुके हैं और दीवारें बदहाल हैं. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अमिताभ बच्चन को सिर्फ केबीसी के मंच पर ही गांव की याद आती है. पहले भी कई बार वादे किए गए, लेकिन धरातल पर कोई काम शुरू नहीं हुआ.
फिर भी कायम है ग्रामीणों का विश्वास
अतीत की उपेक्षा और जर्जर भवन के बावजूद बाबूपट्टी के बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं को महानायक पर अब भी अटूट विश्वास है. गांव के पुरुषोत्तम द्विवेदी ने हरिवंश राय बच्चन की कालजयी रचना ‘मधुशाला’ की पंक्तियों “मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला…” का जिक्र करते हुए कहा कि वादे पूरे न होने पर मन में थोड़ी व्यथा जरूर है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि सही समय आने पर अमिताभ अपने गांव जरूर आएंगे.
गांव के ऋषभ द्विवेदी और अमिताभ श्रीवास्तव ने बताया कि ग्रामीणों ने अस्पताल व स्कूल के लिए अपनी जमीनें तक देने की इच्छा जताई है. उन्हें उम्मीद है कि इस बार केबीसी में किया गया वादा जरूर पूरा होगा.



