Jhansi News: पानी की कमी और सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड के किसानों के लिए अब राहत की उम्मीद जगी है. उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष प्रयासों से झांसी जिले के गंगावली गांव में ‘इंडियाइजरायल बुंदेलखंड वाटर प्रोजेक्ट’ के तहत आधुनिक इजरायली तकनीक से खेती की शुरुआत हो गई है. इस परियोजना का उद्देश्य कम पानी में अधिक उत्पादन हासिल करना और किसानों की आय बढ़ाना है. खरीफ सीजन में 10 हेक्टेयर भूमि पर धान, मूंगफली और मक्का की बुवाई के साथ इस पायलट प्रोजेक्ट की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है.

कम पानी में अधिक पैदावार पर रहेगा फोकस

बुंदेलखंड लंबे समय से जल संकट और अनियमित बारिश की समस्या से जूझ रहा है. ऐसे में किसानों के लिए पारंपरिक खेती करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है. इसी चुनौती को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इजरायल के जल संसाधन मंत्रालय और वहां की एक विशेषज्ञ फर्म के साथ महत्वपूर्ण समझौता किया है. इस साझेदारी के जरिए इजरायल की आधुनिक सिंचाई तकनीकों को बुंदेलखंड में लागू किया जा रहा है, जिससे कम पानी में भी बेहतर उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके.

ड्रिप और माइक्रो इरिगेशन से बदलेगी खेती की तस्वीर

परियोजना के तहत ड्रिप इरिगेशन , माइक्रो इरिगेशन और पॉली हाउस जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा. इन तकनीकों की मदद से पानी की बर्बादी कम होगी और फसलों को आवश्यकता के अनुसार ही सिंचाई मिल सकेगी. इससे उत्पादन बढ़ने के साथसाथ खेती की लागत में भी कमी आने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहा तो बुंदेलखंड जैसे जल संकट वाले क्षेत्रों में खेती का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है.

विशेष तालाब बनेगा परियोजना की रीढ़

सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए गंगावली गांव में एक विशेष तालाब का भी विकास किया गया है. यह तालाब पूरे वाटर प्रोजेक्ट का प्रमुख जल स्रोत होगा और ड्रिप व माइक्रो इरिगेशन प्रणाली के लिए आवश्यक पानी उपलब्ध कराएगा. इससे वर्षा जल के बेहतर संरक्षण और भूजल पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी.

25 गांवों तक पहुंचेगी आधुनिक तकनीक

भूगर्भ जल विभाग झांसी के नोडल अधिकारी मनीष कनौजिया के अनुसार, इजरायली विशेषज्ञों द्वारा तैयार मिनी पायलट प्रोजेक्ट को प्रशासन की मंजूरी मिल चुकी है. उन्होंने बताया कि इस पूरी परियोजना का खर्च उत्तर प्रदेश सरकार वहन कर रही है. फिलहाल झांसी के बड़ागांव ब्लॉक के 25 गांवों को इस परियोजना में शामिल किया गया है. पहले चरण में गंगावली गांव में इसकी सफलता का मूल्यांकन किया जाएगा. यदि परिणाम सकारात्मक रहे तो इसी मॉडल को शेष 24 गांवों में भी लागू किया जाएगा.

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

कृषि विशेषज्ञों की निगरानी में संचालित यह परियोजना केवल पानी बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, खेती की लागत कम करना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना भी है. विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक सिंचाई तकनीकों के इस्तेमाल से भूजल स्तर में सुधार होगा और बुंदेलखंड के किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन का लाभ मिलेगा. यदि यह परियोजना सफल होती है तो यह पूरे क्षेत्र के लिए कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति साबित हो सकती है.