Ram Mandir Donation Controversy: राम मंदिर की दान राशि में कथित गड़बड़ी के मामले की जांच जैसेजैसे आगे बढ़ रही है, नए तथ्य सामने आते जा रहे हैं। विशेष जांच दल को जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ किए जाने की आशंका जताई जा रही है। माना जा रहा है कि दान राशि से जुड़ी गतिविधियों के सबूत मिटाने के लिए रिकॉर्डिंग में बदलाव किया गया हो सकता है। हालांकि अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी मामले में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से भी लंबी पूछताछ की गई है।

CCTV फुटेज से छेड़छाड़
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार एसआईटी को ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे यह संदेह पैदा हुआ है कि सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ की गई थी। जांच एजेंसी इस पहलू की गहराई से पड़ताल कर रही है। वहीं मंदिर परिसर की निगरानी व्यवस्था से जुड़े कुछ जिम्मेदार लोग एसआईटी के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं। इससे जांच का दायरा और बढ़ गया है।
टिन्नू यादव से हुई विस्तृत पूछताछ
जांच एजेंसी ने रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से कई दौर की पूछताछ की है। इसके अलावा राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारियों और संबंधित लोगों से भी लगातार सवालजवाब किए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, गोपाल राव और अन्य लोगों से भी पूछताछ की गई है।
बताया जा रहा है कि कई महत्वपूर्ण सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहे हैं, जबकि कुछ मामलों में जवाब अस्पष्ट या गोलमोल बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि जांच को पूरा करने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।
200 लोगों की सूची तैयार
एसआईटी को दान से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के दौरान भी कई सवाल मिले हैं। सूत्रों के अनुसार उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड में कई जानकारियां स्पष्ट नहीं हैं, जिससे जांच एजेंसी पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। SIT ने करीब 200 लोगों की सूची तैयार की है, जिनसे पूछताछ की जानी है। इनमें से लगभग 125 लोगों से पूछताछ हो चुकी है। कुछ लोगों को अलगअलग चरणों में एक से अधिक बार भी बुलाया गया है।
पांच संदिग्धों के बयान से सामने आए नए नाम
मामले में पकड़े गए पांच संदिग्धों से भी एसआईटी ने पूछताछ की है। इनके पास से कथित तौर पर रकम भी बरामद हुई थी। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान इन लोगों ने कई अन्य नामों का उल्लेख किया है, जिन्हें इस पूरे मामले से जुड़ा बताया गया है। जांच एजेंसी अब इन बयानों का सत्यापन करने में जुटी हुई है। इसी के साथ यह सवाल भी बना हुआ है कि क्या जांच के दौरान एफआईआर दर्ज होगी या पूरी जांच के बाद कोई कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बैंक की भूमिका भी जांच के घेरे में
दान राशि की गिनती में बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी महत्वपूर्ण मानी जाती है। जांच के दौरान बैंक की भूमिका को लेकर भी कुछ सवाल खड़े हुए हैं। शुरुआती जांच में बैंक स्तर पर लापरवाही के संकेत मिलने की बात सामने आई है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार बैंक कर्मचारी कई मामलों में ट्रस्ट पदाधिकारियों के दबाव में काम करते थे, जिसके कारण वे प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर पाते थे। एसआईटी इस पहलू की भी जांच कर रही है।
पूर्व डीजीपी की केस दर्ज की मांग
मामले को लेकर देश के कई पूर्व पुलिस महानिदेशकों ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा कि राम मंदिर में प्रतिदिन लाखों और करोड़ों रुपये का दान आता है। इसके अलावा श्रद्धालु सोना, चांदी, रत्न और हीरे जड़े आभूषण भी चढ़ाते हैं। उनके अनुसार यदि दान राशि में गड़बड़ी हुई है तो यह बेहद गंभीर मामला है।
पूर्व डीजीपी ए.के. जैन ने भी कहा कि यदि दान राशि के गबन के आरोप सही साबित होते हैं तो यह स्पष्ट रूप से आपराधिक मामला है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
सुरक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च फिर भी सेंध
जांच के दौरान ट्रस्ट के वित्तीय दस्तावेजों से यह जानकारी भी सामने आई है कि मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर 11 महीनों में करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। यह विवरण 21 मार्च को हुई ट्रस्ट की बैठक में प्रस्तुत आयव्यय रिपोर्ट में शामिल था।
रिपोर्ट के अनुसार यह खर्च एक अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच किया गया। मंदिर परिसर में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे, निजी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद दान पेटियों से कथित धन और आभूषणों की चोरी के आरोप सामने आने के बाद सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
जमीन खरीद को लेकर गंभीर आरोप
इस बीच उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने राम मंदिर ट्रस्ट पर जमीन खरीद में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि ट्रस्ट ने कुछ जमीनों की खरीद बाजार मूल्य और सरकारी मूल्यांकन से कई गुना अधिक कीमत पर की है। उन्होंने मांग की है कि जमीन खरीद से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।


