टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने वित्त वर्ष 2026 में कमाल का प्रदर्शन किया है. दुनिया भर में चल रही अनिश्चितता और भूराजनीतिक तनाव के बावजूद, कंपनी ने शानदार वापसी करते हुए करीब 32,000 करोड़ रुपये का अनुमानित शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है. वहीं, इस दौरान कंपनी की कुल आय लगभग 42,000 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई. यह मुनाफा सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि टाटा का बिजनेस मॉडल विपरीत परिस्थितियों में भी कितना मजबूत है. सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी ने अपने मुख्य शेयरधारक ‘टाटा ट्रस्ट्स’ को दिए जाने वाले डिविडेंड में भी भारी इजाफा किया है. यह रकम दोगुनी होकर 3,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है.बता दें कि टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है.

एक साल में ही बदल गई पूरी तस्वीर
पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में यह एक बहुत बड़ी छलांग है. पिछले साल टाटा संस की आमदनी 12 प्रतिशत गिरकर 38,834 करोड़ रुपये रह गई थी, जबकि मुनाफा 24 प्रतिशत टूटकर 26,231 करोड़ रुपये पर आ गया था. उस मुश्किल दौर में भी कंपनी ने अपना डिविडेंड दोगुना किया था. लेकिन इस साल की ग्रोथ कहानी पूरी तरह अलग है. जब कोई इतनी बड़ी कंपनी इस तरह से बाउंस बैक करती है, तो इसका सीधा असर बाजार और अर्थव्यवस्था के भरोसे पर पड़ता है. आपको बता दें कि टाटा संस के छाते के नीचे 323 सब्सिडियरी, 39 सहयोगी कंपनियां और 32 जॉइंट वेंचर काम करते हैं, जो भारतीय बाजार का एक बहुत बड़ा हिस्सा कवर करते हैं.
मुनाफे की असली वजह छिपी है इन कंपनियों में
इस भारी भरकम मुनाफे के पीछे ग्रुप की कई प्रमुख कंपनियों का पसीना और उनकी मजबूत ग्रोथ है. टीसीएस , टाटा मोटर्स, टाटा पावर, टाटा कैपिटल, टाटा कंज्यूमर, टाइटन, टाटा स्टील और इंडियन होटल्स जैसी कंपनियों ने पूरे साल शानदार प्रदर्शन किया. इन स्थापित कंपनियों से टाटा संस को करीब 32,500 करोड़ रुपये का मजबूत डिविडेंड फ्लो मिला है. हालांकि, आईटी दिग्गज टीसीएस ने डेटा सेंटर और नए अधिग्रहण जैसी बड़ी निवेश योजनाओं पर फोकस करने के लिए अपने पेआउट को थोड़ा सीमित रखा है. कुल मिलाकर, रोजमर्रा के साबुन से लेकर स्टील तक, हर क्षेत्र में टाटा की पकड़ और मजबूत हुई है.
नए बिजनेस में भी दिख रहा है टाटा का जलवा
सिर्फ पुरानी कंपनियां ही नहीं, टाटा के नए कारोबार भी तेजी से अपने पैर जमा रहे हैं. कंपनी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का कामकाज काफी बड़े स्तर पर पहुंच गया है. वहीं, टाटा डिजिटल धीरेधीरे मुनाफे की ओर कदम बढ़ा रही है. इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेल चेन क्रोमा ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए परिचालन मुनाफा दर्ज किया है. सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि एयर इंडिया का घाटा अब धीरेधीरे काबू में आ रहा है. ये सभी नए कारोबार अभी अपने निवेश के शुरुआती दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन इनका प्रदर्शन उम्मीद से कहीं बेहतर है.
चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का विजन
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इसी साल जनवरी में कर्मचारियों को लिखे एक खत में साफ किया था कि दुनिया भर में आर्थिक मंदी का माहौल है, फिर भी भारत एक मजबूत स्थिति में है. चीन की उम्मीद से बेहतर ग्रोथ और यूरोप में महंगाई कम होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को थोड़ी राहत जरूर मिली है. चंद्रशेखरन का मानना है कि भारत इस दशक में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है. हालांकि, 2026 को लेकर उन्होंने पहले ही आगाह किया था कि यह साल भी उतारचढ़ाव भरा हो सकता है. उन्होंने कर्मचारियों को एक सीधा मंत्र दिया था, जब दुनिया में अनिश्चितता हो, तो शानदार एग्जीक्यूशन, बेहतरीन टीमवर्क और साहसिक फैसले ही कंपनी को स्थिरता देते हैं.



