दिल्ली स्थित आकाशवाणी भवन में करीब 8 घंटे चले धरने के बाद पुलिस ने राहुल और प्रियंका गांधी समेत करीब 250 नेताओं को हिरासत में ले लिया. जिसके तुरंत बाद चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया आई. ईसीआई की तरफ से जारी बयान में दावा किया गया है कि मंगलवार शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से आयोग से मुलाकात के लिए समय नहीं मांगा था. आयोग ने यह स्पष्टीकरण उस सूचना के बाद दिया, जिसमें कुछ सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के साथ मिलने की बात सामने आई थी.

चुनाव आयोग के अनुसार, शाम करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस से सूचना मिली कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना और ज्ञापन सौंपना चाहता है. आयोग ने बताया कि राजनीतिक दलों के साथ बैठक के लिए 2025 में एक निर्धारित प्रक्रिया बनाई गई थी. इसके तहत अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से बैठक का अनुरोध किया जाता है और दोनों पक्षों की सहमति से समय तय होता है.

संसद भवन एनेक्सी में बैठक का प्रस्ताव

चुनाव आयोग ने कहा कि जब वह सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के प्रस्ताव पर विचार कर रहा था, तब दिल्ली पुलिस के डीसीपी ने बताया कि बैठक 240 सांसदों के समूह के साथ संसद भवन एनेक्सी में प्रस्तावित थी. आयोग ने इसे असामान्य अनुरोध बताते हुए कहा कि निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार ऐसी बैठक आयोग के परिसर में ही होनी चाहिए.

वरिष्ठ अधिकारी को भेजने का प्रस्ताव भी ठुकराया

आयोग ने सांसदों का ज्ञापन लेने के लिए अपने सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी को बैठक स्थल पर भेजने का प्रस्ताव भी दिया. आयोग ने इसे अपने स्तर पर एक अभूतपूर्व कदम बताया, लेकिन सांसदों की ओर से इस प्रस्ताव को भी स्वीकार नहीं किया गया.

प्रक्रिया के तहत किसी भी दल से मुलाकात संभव

चुनाव आयोग ने कहा कि वह देश की संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के साथसाथ अपने प्रोटोकॉल और परंपराओं का भी सम्मान करता है. आयोग के मुताबिक कोई भी राजनीतिक दल किसी भी समय मुलाकात का अनुरोध कर सकता है. साथ ही समय की उपलब्धता के अनुसार आयोग बैठक की तारीख और समय तय कर सकता है.

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