मध्य प्रदेश के इंदौर में पानी का भयानक संकट पैदा होने वाला है. भूगर्भ जल काफी नीचे चला गया है. हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने शहर से लेकर गांव तक नई बोरिंग पर रोक लगा दी है. यहां तक कि शासकीय नलकूपों की भी खुदाई नहीं हो सकेगी. इस नियम के उल्लंघन पर आरोपी व्यक्ति पर दो हजार रुपये का जुर्माना और दो साल की सजा होगी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। आदेश के अनुपालन के लिए जिलाधिकारी ने पुलिस, नगर निगम और राजस्व विभाग को पर्याप्त अधिकार दिए हैं.

अधिकारियों के मुताबिक भूगर्भ जल की स्थिति डराने वाली है. निकट भविष्य में पेयजल का संकट हो सकता है. ऐसी स्थिति से बचने के लिए प्रशासन ने जिले भर में बोरिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. इस व्यवस्था के तहत चाहें शहरी हो या ग्रामीण इलाका, कहीं भी नई बोरिंग नहीं की जा सकती. यहां तक कि शासकीय नलकूपों की भी खुदाई अब नहीं हो सकती.
जलाभाव ग्रस्त जिला घोषित
हालात को देखते हुए इंदौर को जलाभाव ग्रस्त जिला घोषित किया गया है. कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी शिवम वर्मा के मुताबिक अगले आदेश तक पूरे जिले में कहीं भी नई बोरिंग नहीं हो सकती. यदि कोई चोरी छुपे बोरिंग करता या कराता है तो मशीनों की जब्तीकरण के साथ ही संबंधित के खिलाफ 2 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. साथ ही संबंधित को दो साल के कारावास का भी प्रावधान किया गया है. इस नियम पर कड़ाई से अनुपालन के लिए राजस्व विभाग, पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों को पर्याप्त अधिकार दिए गए हैं.
एक्वायर हो सकते हैं पुराने जलश्रोत
जिला दंडाधिकारी के मुताबिक यह प्रतिबंध शासकीय योजनाओं के तहत होने वाली नलकूप खुदाई पर लागू नहीं होगा. जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था बनाए रखने के लिए निजी जलकूपों और अन्य निजी जलस्रोतों का अधिग्रहण भी किया जा सकेगा. उन्होंने बताया कि यह स्थिति जिले में औसत से कम बारिश और भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण बनी है. इन परिस्थितियों में जलस्तर तेजी से गिर रहा है. इसे बचाने के लिए प्रशासन ने यह कदम उठाया है.


