एक्टर टाइगर श्रॉफ पर मुंबई के जुहू इलाके में फायरिंग हुई. टाइगर की BMW कार पर 5 राउंड फायर किए गए थे. घटना में टाइगर को कांच के टुकड़े लगे. फिलहाल वो खतरे से बाहर हैं. हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग के अनिल पंडित ने ली है. मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कार बुलेट प्रूफ नहीं थी. बुलेट प्रूफ कार पर गोलियों का असर नहीं होता. असल में इसके लिए “बैलिस्टिक आर्मरिंग” शब्द का इस्तेमाल होता है.

आमतौर सभी कार निर्माता कंपनियां बुलेट प्रूफ कार नहीं बनातीं. कुछ चुनिंदा कंपनियां भी इसे तैयार करती हैं. हां, सामान्य कार को अलग से बुलेट प्रूफ कार में भी कंवर्ट किया जा सकता है. इस प्रक्रिया के दौरान काम में ऐसे बदलाव किए जाते हैं जो उसे खतरे रोकने लायक बनाते हैं. यह एक तय स्तर तक ही सुरक्षा देती है.
क्या कंपनियां वाकई ऐसी कारें बनाती हैं?
हां. मर्सिडीज की गार्ड सीरीज इसका बड़ा उदाहरण है. S680 गार्ड को पहली बार शुरू से ही बख्तरबंद कार के रूप में तैयार किया गया है, जबकि पहले की गाड़ियां सामान्य कारों पर कवच चढ़ाकर बनती थीं. इसे VPAM VR10 रेटिंग मिली है, जो वाहनों की बैलिस्टिक सुरक्षा का सबसे ऊंचा प्रमाण है. यह सर्टिफिकेशन जर्मनी के उल्म स्थित प्रूफ हाउस में VPAM के टेस्ट दिशानिर्देशों के मुताबिक होता है.
इन्हें आम गाड़ी की तरह खरीदा भी नहीं जा सकता. रिपोर्ट के अनुसार, डीलर से ऐसी गाड़ी नहीं मिलती, पहले यह जांच होती है कि खरीदार को वाकई इसकी जरूरत है या नहीं.
मर्सिडीजमेबैक एस600 पुलमैन गार्ड बुलेट प्रूफ कार है.
शीशा कैसे रोकता है गोली?
बुलेट प्रूफ कार का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है. कांच और पॉलीकार्बोनेट की कई परतें जोड़ी जाती हैं, जिससे गोली की एनर्जी सोखकर बिखर जाती है. बाहरी कांच की परतें टूटकर एनर्जी सोखती हैं, जबकि भीतर की पॉलीकार्बोनेट परत लचककर गोली और कांच के टुकड़ों को केबिन में आने से रोकती है. S680 गार्ड के मामले में साइड की खिड़कियों का कांच करीब चार इंच मोटा होता है.
कैसे गाड़ी को बुलेट प्रूफ बनाया जाता है?
पूरी गाड़ी खोली जाती है. पहले गाड़ी को खोलकर सिर्फ ढांचा बचाया जाता है. फिर लेजर से कटे बैलिस्टिक स्टील को छत, फर्श और चारों तरफ फिट किया जाता है. बिना शीशे वाले हिस्सों में कठोर बैलिस्टिक स्टील, अरामिड फाइबर और कंपोजिट पैनल इस्तेमाल होते हैं. पूरे कैबिन को एक सुरक्षित सेल की तरह तैयार किया जाता है. इसलिए दरवाजे, छत, पिलर और फायरवॉल की परतें एकदूसरे पर चढ़ाई जाती हैं ताकि कहीं गैप न रहे. मर्सिडीज की कारों में भी मजबूत बॉडी शेल, डबल वेल्डिंग और मोटा, मजबूत शीशा लगता है.
फ्यूल टैंक, इंजन कंट्रोल यूनिट और बैटरी जैसे जरूरी हिस्सों को भी कवर किया जाता है, ताकि हमले में भी गाड़ी चलती रहे. फ्यूल टैंक को स्टील के डिब्बे में सुरक्षित रखा जाता है. ऐसी कारों का असली फायदा भाग निकलने की क्षमता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। रनफ्लैट सिस्टम से टायर पूरी तरह पंक्चर होने पर भी गाड़ी पूरी रफ्तार से करीब एक घंटे तक चल सकती है, बुलेट प्रूफ कार बनाने वाली कंपनियां यह दावा करती हैं.
भारी कवच को देखते हुए सस्पेंशन और ब्रेकिंग सिस्टम को मजबूत किया जाता है. आम गाड़ी के मुकाबले ऐसी कार ज्यादा भारी हो जाती है. मर्सिडीज़ की एक पुलमैन गार्ड का वजन 4,815 किलो बताया गया है, जबकि सामान्य S600 का कर्ब वेट 2,165 किलो है.
टाइगर पर फायरिंग का वीडियो
This has to be one of the closest assassination attempts ever caught on camera. Just look at how closely the gunmen fired at Tiger Shroff! Its a miracle he escaped this A clear video of the firing incident has now surfaced. #TigerShroff https://t.co/0NDEjRy4lf
— Nikhil saini October 18, 2026
मर्सिडीजमेबैक S गार्ड में यह सारी सुरक्षा इस तरह जोड़ी गई कि गाड़ी का बाहरी रूप नहीं बदलता. इसके अलावा पैनिक अलार्म, ऑटोमैटिक फायर एक्सटिंग्विशर और ताजी हवा की अलग व्यवस्था जैसी सुविधाएं भी होती हैं. भारत में बुलेटप्रूफ कार रखना वैध है, लेकिन इसके लिए जरूरी सर्टिफिकेशन और संबंधित अधिकारियों की मंजूरी चाहिए.



