इंडिगो फ्यूल की बढ़ती कीमतों की भरपाई के लिए हवाई किराए बढ़ा सकती है. एयरलाइन को लगातार तीसरी तिमाही में घाटा हुआ है, जबकि इसके रेवेन्यू और ऑपरेटिंग कमाई में भारी बढ़ोतरी हुई है, जो ब्लूमबर्ग के अनुमानों से भी बेहतर रही. देश की सबसे बड़ी एयरलाइन की पैरेंट कंपनी, इंटरग्लोब एविएशन ने जुलाईसितंबर तिमाही में 1,879 करोड़ रुपए का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया. यह एक साल पहले के 2,582 करोड़ रुपए के घाटे से 27.2 फीसदी कम है. यह घाटा ब्लूमबर्ग के 2,063 करोड़ रुपए के अनुमान से कम रहा, जिसका मुख्य कारण फॉरेन एक्सचेंज से होने वाले नुकसान में कमी आना था. CEO विली वॉल्श ने कहा कि फ्यूल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है. इसकी भरपाई करने के लिए हमारे पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. इससे संकेत मिलता है कि यात्रियों को अब अधिक टिकट कीमतें चुकानी पड़ सकती हैं.

ऐसे रहे कमाई आंकड़े
ऑपरेशस से होने वाला रेवेन्यू सालाना आधार पर 25.9 फीसदी बढ़कर 23,364 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले साल 18,555 करोड़ रुपए था. यह ब्लूमबर्ग के 22,988 करोड़ रुपए के अनुमान से अधिक है. ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई 229.1 फीसदी उछलकर 1,907 करोड़ रुपए हो गई, , जो 1,663 करोड़ रुपए के अनुमान से बेहतर है. EBITDA मार्जिन एक साल पहले के 3.1 फीसदी से सुधरकर 8.2 फीसदी हो गया. ऑपरेटिंग परफॉरमेंस में यह सुधार कॉस्ट में हुई भारी बढ़ोतरी की भरपाई करने के लिए काफी नहीं था. कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, कुल खर्च सालाना आधार पर 19 फीसदी बढ़कर 26,188 करोड़ रुपए हो गया, जबकि फ्यूल की कॉस्ट 67 फीसदी बढ़कर लगभग 1 अरब डॉलर तक पहुंच गई.
फॉरेन एक्सचेंज से होने वाला नुकसान कम
फॉरेन एक्सचेंज से होने वाला नुकसान पिछले साल की इसी तिमाही के 2,892 करोड़ रुपए से घटकर 1,333 करोड़ रुपये रह गया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। विदेशी मुद्रा के प्रभाव को हटा दें, तो इंडिगो को 724 करोड़ रुपए का घाटा हुआ, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी को 104 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था. वॉल्श ने इस दबाव का कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल की बहुत अधिक कीमतें और लगातार चल रही भूराजनीतिक उथलपुथल को बताया. उन्होंने कहा कि इस साल ‘रिफाइनिंग क्रैक स्प्रेड’ औसतन लगभग 65 फीसदी रहा, जबकि ऐतिहासिक औसत लगभग 22 फीसदी है. इसी वजह से जेट फ्यूल की लागत ऊंचे स्तर पर बनी रही.
इंडिगो ने कितने पैसेंजर्स को कराया हवाई सफर
इस तिमाही के दौरान इंडिगो ने 2.75 करोड़ यात्रियों को यात्रा कराई, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 4.7 फीसदी कम है. वहीं, ‘अवेलेबल सीट किलोमीटर’ के रूप में मापी जाने वाली क्षमता 1 फीसदी घटकर 40.8 अरब रह गई. पैसेंजर ट्रैफिक 3.7 फीसदी गिरकर 32.8 अरब ‘रेवेन्यू पैसेंजर किलोमीटर’ रह गया, और पैसेंजर लोड फैक्टर 82.5 फीसदी से घटकर 80.3 फीसदी पर आ गया. हालांकि, पैसेंजर यील्ड 34.3 फीसदी बढ़कर 6.30 रुपए हो गई, जिससे यात्रियों की संख्या कम होने के बावजूद रेवेन्यू को सहारा मिला.
कितना है कंपनी पर कर्ज
वॉल्श ने बताया कि सितंबर इस तिमाही का सबसे कमजोर महीना रहा, लेकिन उन्हें त्योहारी सीजन में मांग को लेकर उम्मीद है. एयरलाइन को उम्मीद है कि दिसंबर तिमाही में क्षमता में ‘लो सिंगल डिजिट’ की वृद्धि होगी. वॉल्श ने कहा कि इंडिगो कॉस्ट को कंट्रोल करने के लिए अपने लेवल पर उपाय करती रहेगी, लेकिन कंपनी किसी बड़े ‘कॉस्टकटिंग’ कार्यक्रम की योजना नहीं बना रही है. सितंबर के अंत में एयरलाइन पर कुल कर्ज 87,303 करोड़ रुपए था, जिसमें 55,159 करोड़ रुपए की ‘कैपिटलाइज्ड ऑपरेटिंग लीज लायबिलिटीज’ शामिल हैं. वहीं, कंपनी के पास कुल कैश 52,685 करोड़ रुपए था. शॉर्ट टर्म प्रेशर के बावजूद, इंडिगो अपनी अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजनाओं और 2028 में एयरबस A350 वाइडबॉडी विमानों को शामिल करने की योजना पर पूरी तरह प्रतिबद्ध है. वॉल्श ने कहा कि हम अपनी किसी भी दीर्घकालिक योजना में देरी नहीं करने जा रहे हैं.



