अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आते ही आम लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद होती है कि पेट्रोल और डीजल भी सस्ते हो जाएंगे. लेकिन भारत में ऐसा हमेशा नहीं होता. इसकी वजह यह है कि देश में पेट्रोलडीजल की खुदरा कीमत केवल क्रूड ऑयल के दाम से तय नहीं होती, बल्कि इसके पीछे टैक्स, रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, रुपयेडॉलर की विनिमय दर और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की प्राइसिंग रणनीति समेत आठ बड़े फैक्टर काम करते हैं. सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मार्केटडिटरमाइंड हैं और इन्हें सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां तय करती हैं. जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार टैक्स ढांचे में बदलाव कर उपभोक्ताओं को राहत देती है. चलिए समझते हैं.

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ये हैं पेट्रोलडीजल की कीमत तय करने वाले 8 बड़े फैक्टर

1. अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत

पेट्रोल और डीजल बनाने का मुख्य कच्चा माल क्रूड ऑयल है. इसकी कीमत बढ़ने पर ईंधन महंगा हो सकता है और घटने पर कीमत कम होने की संभावना रहती है. हालांकि भारत में इसका असर सीधे और तुरंत नहीं दिखता.

2. रुपये और डॉलर का एक्सचेंज रेट

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है और इसका भुगतान डॉलर में होता है. यदि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है तो आयात महंगा पड़ता है. ऐसे में भले ही क्रूड ऑयल सस्ता हो, ईंधन की कीमतों में राहत सीमित रह सकती है.

3. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। रिफाइनिंग कॉस्ट

कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल में बदलने के लिए रिफाइनरियों में प्रोसेस किया जाता है. इस प्रक्रिया की लागत भी अंतिम कीमत में जुड़ती है.

4. फ्रेट और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट

रिफाइनरी से देशभर के डिपो और पेट्रोल पंप तक ईंधन पहुंचाने का खर्च भी कीमत का हिस्सा होता है. दूरी और लॉजिस्टिक्स के आधार पर इसमें अंतर हो सकता है.

5. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का मार्जिन

इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां बाजार की स्थिति, इन्वेंट्री लागत और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए कीमत तय करती हैं.

6. डीलर कमीशन

हर लीटर पेट्रोल और डीजल पर पेट्रोल पंप संचालकों को निश्चित कमीशन मिलता है. यह राशि भी खुदरा कीमत में शामिल रहती है.

7. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी

पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार उत्पाद शुल्क लगाती है. जब सरकार इस टैक्स में कटौती करती है तो आमतौर पर उपभोक्ताओं को राहत मिलती है.

8. राज्य सरकार का VAT और अन्य टैक्स

हर राज्य अपने हिसाब से वैट और अन्य स्थानीय कर लगाता है. यही कारण है कि अलगअलग राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग होती हैं.

कितने तरह के टैक्स लगते हैं?

पेट्रोल और डीजल की कीमत में सबसे बड़ा योगदान टैक्स का होता है. मुख्य रूप से दो तरह के टैक्स उपभोक्ता पर असर डालते हैं.

  • केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी
  • राज्य सरकार का VAT

इसके अलावा पेट्रोलियम सेक्टर से सरकार को कच्चे तेल पर सेस, कस्टम ड्यूटी, IGST, CGST, रॉयल्टी और अन्य शुल्कों के रूप में भी बड़ी आय होती है. संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, 202526 में पेट्रोलियम सेक्टर से केंद्र सरकार को कुल 4.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ.

पेट्रोलडीजल पर कितने तरह के टैक्स?

टैक्स/शुल्क 202526
एक्साइज ड्यूटी 3,08,381
क्रूड ऑयल सेस 17,744
कस्टम ड्यूटी 15,091
IGST 20,310
CGST 11,695
रॉयल्टी 8,214
NCCD 1,205

पेट्रोलियम सेक्टर से सरकार की कितनी कमाई?

वित्त वर्ष केंद्र सरकार को कुल राजस्व
202122 4,92,302
202223 4,28,067
202324 4,32,394
202425 4,24,827
202526 4,75,739

क्रूड ऑयल सस्ता होने पर भी क्यों नहीं घटते दाम?

यही सबसे बड़ा सवाल है. यदि क्रूड ऑयल की कीमत घट भी जाए, तब भी पेट्रोलडीजल के दाम तुरंत कम नहीं होते क्योंकि सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां केवल अंतरराष्ट्रीय कीमत नहीं देखतीं. वे टैक्स संरचना, रुपये की स्थिति, पहले से खरीदे गए महंगे क्रूड का स्टॉक, रिफाइनिंग लागत और वैश्विक अनिश्चितताओं को भी ध्यान में रखती हैं. कई बार सरकार राजस्व संतुलन बनाए रखने के लिए टैक्स में बदलाव नहीं करती, जबकि कई बार ऑयल कंपनियां पुराने स्टॉक के खत्म होने का इंतजार करती हैं. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का पूरा फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचने में समय लग सकता है.

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सरकार ने कब दी राहत?

संसद में सरकार ने बताया कि नवंबर 2021 और मई 2022 में केंद्र ने एक्साइज ड्यूटी में क्रमशः कुल 13 रुपये प्रति लीटर और 16 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी, जिसका पूरा लाभ उपभोक्ताओं को दिया गया. मार्च 2024 में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमत 2 रुपये प्रति लीटर कम की. वहीं, मार्च 2026 में पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होने पर सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाई, जिससे सरकारी राजस्व पर भी असर पड़ा.

यानी भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत केवल क्रूड ऑयल से तय नहीं होती. अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतें महत्वपूर्ण जरूर हैं, लेकिन अंतिम खुदरा मूल्य पर टैक्स, विनिमय दर, रिफाइनिंग और परिवहन लागत, डीलर कमीशन और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की रणनीति जैसे कई कारक मिलकर असर डालते हैं. यही वजह है कि कई बार दुनिया में कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल के दाम में तत्काल राहत नहीं मिल पाती.