आरबीआई की नई स्कीम से देश में डॉलर की भारी बारिश हो रही है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से मजबूत हो रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा को आकर्षित करने के लिए शुरू की गई रियायती डॉलर स्वैप सुविधा को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। केंद्रीय बैंक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई तक देश में कुल विदेशी मुद्रा डिपॉजिट 40 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। इस पूरी प्रक्रिया में फॉरेन करेंसी नॉनरेजिडेंट यानी एफसीएनआर डिपॉजिट की सबसे बड़ी और अहम भूमिका रही है, जिसके जरिए देश में भारी मात्रा में विदेशी पूंजी आई है।

रिजर्व बैंक ने इस विशेष सुविधा की शुरुआत 8 जून को की थी। इस नई विंडो के खुलने के दो महीने से भी कम समय के भीतर, यानी 31 जुलाई तक अधिकृत डीलर बैंकों ने इस सुविधा के तहत कुल 40.8 अरब डॉलर जमा किए हैं। सेंट्रल बैंक की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस कुल राशि में एफसीएनआर डिपॉजिट के जरिए 36.7 अरब डॉलर, ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग यानी ओएफसीबी के जरिए 2.6 अरब डॉलर और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग यानी ईसीबी के जरिए 1.5 अरब डॉलर का इनफ्लो दर्ज किया गया है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। केवल एफसीएनआर डिपॉजिट के आंकड़ों पर गौर करें तो 8 जून से शुरू हुई इस सुविधा के बाद से 36.72 बिलियन डॉलर का इनफ्लो हुआ है, जो कि वर्ष 2013 में इसी तरह की योजना के तहत जुटाए गए 26 बिलियन डॉलर से काफी अधिक है।

इस योजना के तहत पिछले दो हफ्तों में अभूतपूर्व तेजी देखने को मिली है। सत्रह जुलाई 2025 को जारी किए गए पिछले आंकड़ों के मुताबिक, उस समय तक एफसीएनआर इनफ्लो 20.72 अरब डॉलर था, जो पिछले दो हफ्तों में बढ़कर सीधे 36.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस प्रकार महज दो हफ्ते की अवधि में इसमें 77 फीसदी का भारी उछाल दर्ज किया गया है। बैंक इस उपलब्ध जीरोकॉस्ट हेजिंग सुविधा के तहत इन डिपॉजिट्स को 30 सितंबर तक आरबीआई के साथ स्वैप कर सकते हैं। यह सब्सिडी वाली डॉलर स्वैप सुविधा बैंकों को नए एफसीएनआर डिपॉजिट, ओएफसीबी और ईसीबी इनफ्लो को आरबीआई के साथ एक खास दर पर स्वैप करने की अनुमति देती है, जिससे देश में विदेशी फंड जुटाने को बड़ा बढ़ावा मिलता है।

आरबीआई द्वारा उठाये गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सुदृढ़ करना है। यह विशेष रियायती स्वैप सुविधा एफसीएनआर डिपॉजिट के लिए 30 सितंबर तक और ओएफसीबी तथा ईसीबी के लिए 31 दिसंबर तक पूरी तरह उपलब्ध रहेगी। भारतीय स्टेट बैंक की शोध इकाई एसबीआई रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में अनुमान जताया है कि आगामी 30 सितंबर को इस योजना के समाप्त होने तक एफसीएनआर डिपॉजिट का यह आंकड़ा बढ़कर 65 से 70 बिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। इस योजना की सफलता से भारतीय बैंकिंग और आर्थिक क्षेत्र में विदेशी मुद्रा की तरलता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो देश की आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।