हिंदू धर्म में किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए शुभअशुभ मुहूर्त का खास ध्यान दिया जाता है। जब भी लोग कोई शुभ कार्य करने जाते हैं, तो पहले पंचांग जरुर देखते हैं। पंचांग में अशुभ दिनों और मुहूर्त में कार्य करने से बचा जाता है, इन्हीं में पंचक शामिल है।
पंचक मतलब है कि पांच दिनों का अशुभ समय जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र से होकर गुजरता है, तो पंचक का असर इसके शुरुआती दिनों से जोड़ा जाता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उदहारण के तौर पर, यदि रविवार के दिन शुरु होने वाले पंचक को रोग पंचक कहा जाता है, जबकि सोमवार को शुरु पंचक का नाम राज पंचक है। आइए आपको बताते हैं सितंबर महीने में कब और किस दिन पंचक लगने जा रहा है?
सितंबर 2026 में पंचक से जुड़ी तारीखें?
हिंदू पंचांग के अनुसार, सितंबर 2026 में दो बार पंचक का संयोग बन रहा है। पहला पंचक अगस्त के अंतिम दिनों में शुरू होकर सितंबर की शुरुआत तक रहेगा। इसकी अवधि 27 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक मानी जा रही है। वहीं, महीने का दूसरा पंचक 23 सितंबर से आरंभ होगा और 28 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान पंचक से जुड़े शुभअशुभ नियमों और धार्मिक मान्यताओं का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
ज्योतिष में बुधवार या गुरुवार से शुरु होने वाले पंचक को उपयुक्त इनमें से किसी में नहीं आते हैं। इन्हें सामान्य पंचक कहा जाता है, इस पर किसी वार या दोष का नाम नहीं पड़ता है।
पंचक में किन कामों को करने से बचना चाहिए?
  पंचक के समय भूलकर भी घर में लकड़ी और इससे बने सामान, घास आदि खरीदना दोष माना जाता है।
  पंचक के दौरान चारपाई को बुनना या फिर उसको खोलना या फिर से बांधना सही नहीं होता है।
  इस दौरान छत डलवाने का कार्य भी नहीं किया जा सकता है।
  माना जाता है कि पंचक के समय दक्षिण दिशा की तरफ यात्रा करना अशुभ होता है। क्योंकि यह दिशा यम की है।
  अगर पंचक के समय किसी की मृत्यु हो जाए, तो उसका अंतिम संस्कार सामान्य से करने के बजाय पंचक शांति के साथ करना चाहिए। पंचक शांति के लिए 5 पुतले बनाकर अंतिम संस्कार किया जाता है।