नांदेड़: शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित गुरुद्वारे में हुए हमले ने उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जेड प्लस सुरक्षा कवर के बावजूद हमलावर का उनके बेहद करीब पहुंच जाना जांच का अहम विषय बन गया है।

घटना 13 अगस्त को हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, हमले के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया और हमलावर को काबू में कर लिया। इस दौरान एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
धार्मिक स्थल पर सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
सुरक्षा विशेषज्ञों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि धार्मिक स्थल जैसे सार्वजनिक और संवेदनशील स्थान पर वीआईपी की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की गई। ऐसे स्थानों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था को अतिरिक्त चुनौती का सामना करना पड़ता है। सुखबीर बादल पर इससे पहले दिसंबर 2024 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में भी हमला हुआ था।
क्या सुरक्षा में हुई चूक?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि हमलावर किस स्तर की सुरक्षा चूक के कारण बादल के करीब पहुंचा। नांदेड़ पुलिस की ओर से भी घटना की जांच जारी है और सुरक्षा व्यवस्था में किसी चूक के सवाल पर अलगअलग दावे सामने आए हैं। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
इस घटना ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति की धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा व्यवस्था को कितना मजबूत बनाया जाना चाहिए। अब जांच की रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि हमलावर बादल के इतने करीब तक कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था में वास्तव में कहां कमी रह गई।



