जैसे यूक्रेन ने देखा कि रूस और भारत के बीच रीलॉस समझौता हो गया, वैसे ही यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलस्की ने खुद एक्स पर पोस्ट लिखा और ऐलान कर दिया कि हम भारत के साथ सुरक्षा सहयोग का समझौता अंतिम रूप दे रहे हैं। बहुत बड़ा स्टेटमेंट है और उन्होंने कहा कि दस्तावेज तैयार हो रहे हैं और यह ऐलान ठीक उसी दिन हुआ जब 18 अप्रैल को रूस ने भारत के साथ रीलॉस समझौते के पूरे दस्तावेज अपने ऑफिशियल पोर्टल पर जारी कर दिए। यानी रीलॉस लागू होते ही 3000 सैनिक, पांच युद्धपोत और 10 लड़ाकू विमान तैनात करने की अनुमति मिलते ही यूक्रेन घबरा गया और भारत को रिझाने की कोशिश में लग गया। रूस से जारी जंग में फंसे हुए यूक्रेन को अचानक समझ में आ गया है कि अगर रूस की मार से उन्हें कोई बचा सकता है तो वो है भारत और इसीलिए जेलस्की साहब भारत को रिझाने में लग चुके हैं। तो आज भारत तक के खास शो मित्र देश में हम बात करेंगे चर्चा करेंगे कि भारत की ताकत की जिसे देखकर यूक्रेन खुद डील करने का ऐलान कर चुका है और यह सब रूस भी देखकर हैरान होगा कि भारत ने आखिरकार एक तीर से दो निशाने कैसे मारे। तो चलिए हम विस्तार से समझते हैं कि रिलॉस समझौते के दस्तावेज जारी होते ही जेलस्की ने भारत के साथ सुरक्षा समझौते का ऐलान क्यों कर दिया।
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यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलस्की ने कहा कि हम अगले सप्ताह अपने साझेदारों के साथ सुरक्षा सहयोग के बारे में बड़ा ऐलान बड़ी घोषणाएं करने वाले हैं। हवाई सुरक्षा और सेना को सपोर्ट हमारी टॉप प्रायोरिटी है और हां भारत के साथ हमारा सुरक्षा सहयोग का समझौता पहले से ही है। हम उसे फाइनल करने जा रहे हैं ताकि दस्तावेज तैयार हो जाए। बता दें कि रूस ने 18 तारीख को रिलॉस के कागजात पब्लिक कर दिए। 19 तारीख को जलस्की ने भारत का नाम ले लिया और यह संयोग नहीं है दोस्तों यह घबराहट है यूक्रेन की। यूक्रेन को लग रहा है कि भारत अब रूस के साथ इतना गहरा हो चुका है कि शायद भारत कुछ बोल दे या मध्यस्था कर दे तो रूस रुक जाए। अब रुस्तम उमेरो जो यूक्रेन के नेशनल सिक्योरिटी के सेक्रेटरी हैं। 17 अप्रैल को दिल्ली आते हैं। अजीत डोबाल और एस जयशंकर से मुलाकात करते हैं। मुलाकात में डोबाल साहब ने साफ कह दिया कि भारत शांति चाहता है।
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बातचीत से समाधान चाहता है। वहीं उमेरोव ने भी कहा कि स्थाई शांति के लिए समाधान ढूंढने पर उनकी सहमति है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। लेकिन जेलस्की ने ऐलान कर दिया इसी बीच कि समझौता फाइनल हो रहा है भारत के साथ। दोस्तों, यह दिखाता है, बताता है कि यूक्रेन रूस की मार खा कर थक चुका है। जंग चौथे साल में पहुंच गई है। पश्चिमी मदद रुक चुकी है। हथियार कम पड़ रहे हैं। ऐसे में भारत को रिझाना पड़ा है अब यूक्रेन को। रूस यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद इनमें नई गतिशीलता देखने को मिली। अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूक्रेनी यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच एक संयुक्त बयान जारी हुआ था। हमने भारत पर आपको दिखाया भी था। जिसमें द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया था और अब जेलस्की की घोषणा उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।