
( Image Source: Instagram : Lucky Rawat )
उत्तराखंड के विकासनगर में रहने वाले 16 साल के लकी रावत एक सामान्य परिवार से आते हैं.उनके पिता किसान हैं और राशन की दुकान चलाते हैं, जबकि उनकी मां आंगनवाड़ी में काम करती हैं.बचपन से ही लकी बहुत शरारती और नई चीजें जानने के शौकीन थे.
रूस की कंपनी ‘रोसाटॉम’ ने ‘आइसब्रेकर ऑफ नॉलेज’ नाम की एक अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित की थीय.इसमें22 देशों के हजारों बच्चों ने हिस्सा लिया.लकी ने इन सभी को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल किया और वे इस यात्रा के लिए भारत से चुने गए इकलौते छात्र बने.
उत्तरी ध्रुव की अनोखी यात्रा
इस जीत के इनाम के रूप में लकी को ’50 लेट पोबेडी’ नाम के एक बहुत बड़े परमाणु ऊर्जा से चलने वाले जहाज पर 10 दिनों की यात्रा का मौका मिला.यह जहाज मोटी बर्फ को तोड़कर रास्ता बनाता है.इस यात्रा के जरिए लकी दुनिया के सबसे ऊपरी हिस्से यानी भौगोलिक उत्तरी ध्रुव (90° उत्तर) तक पहुंचे, जहां चारों तरफ सिर्फ बर्फ ही बर्फ थी.
कभी 57वीं रैंक, फिर मारी बाजी
यह प्रतियोगिता तीन चरणों (राउंड्स) में हुई. पहले राउंड में: लकी 57वें नंबर पर थे.दूसरे राउंड में: उन्होंने मेहनत की और 5वें नंबर पर आ गए.आखिरी राउंड में: उन्हें परमाणु तकनीक पर 1 मिनट का वीडियो बनाना था. 23जून को जब नतीजे आए, तो उनका चयन हो चुका था.
पढ़ाई और खेल में भी आगे
कराटे में चैंपियन: लकी सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि खेल में भी माहिर हैं.वे कराटे में ब्लैक बेल्ट हैं और 26 मेडल जीत चुके हैं.
ISRO का अनुभव: वे पहले भी भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी (ISRO) के एक 12 दिनों के प्रोग्राम में हिस्सा ले चुके हैं.
भविष्य का सपना
वे 10वीं के बाद साइंस लेकर आगे चलकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक (Space Scientist) बनना चाहते हैं. लकी का कहना है कि किसी भी काम की शुरुआत करने के लिए सिर्फ जिज्ञासा (जांचने-परखने की चाह) ही काफी है. जीतेंगे या हारेंगे, यह सोचकर रुकना नहीं चाहिए. अगर हम प्रयास ही नहीं करेंगे, तो कभी आगे नहीं बढ़ पाएंगे.
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