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देवास |28 अक्टूबर 2026| मध्य प्रदेश के देवास जिले से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। कुछ दिनों पहले देवास के अलग-अलग गांवों में 13 लोगों की रहस्यमयी और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में पुलिस ने एक बहुत बड़ा पर्दाफाश किया है। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि इस पूरी साजिश का मुख्य आरोपी अजय राठौर था, जिसने किसी आम तरीके से नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद लेकर नकली और जहरीली शराब बनाने का पूरा फॉर्मूला सीखा था। इसके बाद उसने बड़े शातिर तरीके से इस खतरनाक खेल को अंजाम दिया, जिसकी वजह से कई लोगों की जान चली गई।

इंदौर के दवा बाजार से मंगवाया गया केमिकल

पुलिस की तफ्तीश में यह हैरान करने वाला सच भी बाहर आया है कि आरोपी ने नकली शराब तैयार करने के लिए इंदौर के प्रसिद्ध दवा बाजार से खास तौर पर केमिकल मंगवाया था। इसके अलावा कबाड़ियों से पुरानी और इस्तेमाल की हुई शराब की खाली बोतलें खरीदी गई थी, जिनमें इस केमिकल को पानी के साथ मिलाकर हूबहू असली शराब जैसी दिखने वाली नकली खेप तैयार की गई। आरोपी इतने शातिर दिमाग के थे कि उन्होंने इस जहरीली शराब को सीधे अलग से बेचने के बजाय लाइसेंसी शराब की दुकानों के जरिए होने वाली सप्लाई में मिलाने की चालाकी दिखाई। उन्होंने असली शराब की पेटियों के बीच में इन नकली बोतलों को खपा दिया, जो बाद में गांवों तक पहुंच गईं।

2 से 12 अक्टूबर के बीच हुई धड़ल्ले से बिक्री

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा काला कारोबार 2 अक्टूबर से लेकर 6-7 अक्टूबर के बीच चलाया गया था, जिसके बाद 7 से 12 अक्टूबर के बीच इसकी बड़े पैमाने पर बिक्री किए जाने का आरोप है।

बता दें कि इसी मिलावटी नेटवर्क के जरिए शराब की बोतलें ग्रामीण इलाकों तक पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए इंदौर के दवा बाजार में स्थित उस गोदाम को भी सील कर दिया है जहां से केमिकल की सप्लाई की गई थी। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यह गोदाम बाजार की चौथी मंजिल पर स्थित बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां अब इस बात की तह तक जाने में जुटी हैं कि आखिर यह केमिकल वहां तक किसने पहुंचाया और इस पूरे सिंडिकेट में कौन-कौन लोग पर्दे के पीछे शामिल थे।

अब तक 10 आरोपी गिरफ्तार

इस पूरे मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक कुल 10 आरोपियों को दबोच लिया है, जबकि दो अन्य साथियों की तलाश अभी भी तेजी से की जा रही है। शहर की सिटी कोतवाली पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों में से 8 को अदालत में पेश करके तीन दिन की पुलिस रिमांड पर लिया है, ताकि उनसे पूछताछ करके नेटवर्क के बाकी सदस्यों और सप्लायरों के बारे में पुख्ता जानकारी निकाली जा सके। वहीं, दो अन्य आरोपियों को कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाने की है कि यह जहरीली शराब आखिरकार किन-किन दुकानों और कौन-कौन से गांवों तक पहुंची थी।

FSL रिपोर्ट से खुलेगा मौतों का असली राज

हालांकि पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया है और पूछताछ जारी है, लेकिन गांवों में हुई इन 13 मौतों की वास्तविक वजह अभी आधिकारिक तौर पर पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। इसके लिए चंदाना और बिंजाना गांवों में हुई मौतों की जांच के लिए उज्जैन संभागायुक्त द्वारा एक विशेष समिति का गठन कर दिया गया है, जो 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। वहीं, पुलिस ने मृतकों के बिसरा, जब्त की गई शराब की बोतलों और दूसरे तमाम अहम साक्ष्यों को फॉरेंसिक साइंस लैब यानी FSL में जांच के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक FSL की फाइनल रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक मौतों के पुख्ता कारणों पर मुहर लगाना जल्दबाजी होगी, लेकिन इस खुलासे ने अवैध शराब के कारोबार की पोल जरूर खोल दी है।