मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष की कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. INDIA ब्लॉक के 13 नेताओं की ओर से दाखिल संयुक्त याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया है. इसी सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए विपक्ष के मार्च को लेकर सख्त टिप्पणी की.

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी सुप्रीम कोर्ट को डराधमका नहीं सकता… ये बेकार की कोशिशें हैं और इन पर कोई ध्यान नहीं देता. CJI ने कहा कि अदालत को पता है कि बाहर क्या कहा जा रहा है और अंदर क्या कहा जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘हम किसी काल्पनिक दुनिया में नहीं रह रहे हैं… हमें हर बात की जानकारी है.’
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा, ‘आइटम 25 एक नया मामला है, जिसमें कोर्ट को औपचारिक रूप से नोटिस जारी करना पड़ सकता है… यह दोतीन मुद्दों से जुड़ा है.. पहला मुद्दा धारा 18 के तहत सामूहिक निर्णय लेने से संबंधित है.. दूसरा मुद्दा फॉर्म 6 और फॉर्म 7 का है.. यह एक अलग मामला है.’
याचिकाकर्ता से मांगा गया स्पष्टीकरण
इस पर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘नोटिस जारी करें… हम यही तो कह रहे हैं.. लेकिन इससे पहले एक आपत्ति है… हम अगली सुनवाई की तारीख पर याचिकाकर्ताओं में से एक से उसके आचरण के बारे में पूछना चाहेंगे… नोटिस जारी करने का मतलब यह नहीं है कि हम किसी चीज़ की निंदा कर रहे हैं… हम नोटिस जारी कर रहे हैं… लेकिन याचिकाकर्ताओं में से एक के संबंध में, हम इस मुद्दे पर ज़रूर विचार करेंगे… हम एक याचिकाकर्ता के मामले में, उसके आचरण के स्पष्टीकरण के आधार पर नोटिस पर विचार करेंगे.’
राहुल गांधी समेत विपक्ष की याचिका पर नोटिस
INDIA ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव आयोग के कामकाज, मुख्य चुनाव आयुक्त के अधिकारों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका दाखिल की है. याचिका में चुनाव आयोग के फैसलों और मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिका में कुल 13 याचिकाकर्ता शामिल हैं. विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, SIR से जुड़े रिकॉर्ड और फैसलों की जांच की मांग की है.



