मांस-मछली और अंडा खाने के बाद क्यों लगती है ज्यादा प्यास? हाई-प्रोटीन डाइट का क्या है कनेक्शन, डॉक्टर से जानिए

मांस, मछली या अंडे जैसी हाई-प्रोटीन डाइट (High-Protein Diet) लेने के तुरंत बाद बार-बार प्यास लगना एक बेहद नॉर्मल और स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया (Biological Process) है। अगर आपने भी कभी नॉन-वेज खाने के बाद बहुत ज्यादा डिहाइड्रेशन या सूखापन महसूस किया है, तो इसके पीछे का कारण कोई बीमारी नहीं, बल्कि आपकी किडनी (Kidneys) और मेटाबॉलिज्म (Metabolism) का काम करने का तरीका है। जब हम प्रोटीन से भरपूर फूड जैसे मांस,मछली और अंडा का सेवन करते हैं तो शरीर उसे पचाने के लिए अमीनो एसिड्स में तोड़ता है। इस प्रक्रिया के दौरान नाइट्रोजन का निर्माण होता है, जिसे शरीर से बाहर निकालने के लिए किडनी को अतिरिक्त पानी की आवश्यकता होती है। किडनी यूरिन के जरिए यूरिया और नाइट्रोजन जैसे अपशिष्ट (Nitrogenous Wastes) को बाहर निकालती है, जिससे शरीर में पानी का स्तर कम होने लगता है और ब्रेन तुरंत प्यास लगने का संकेत भेजता है।

ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल, परेल, मुंबई में जनरल मेडिसिन में सीनियर कंसल्टेंट,डॉ. मंजूषा अग्रवाल ने बताया हाई प्रोटीन डाइट जैसे प्रोटीन शेक,प्रोटीन से भरपूर फूड्स का सेवन करने के बाद कुछ लोगों को ज्यादा प्यास लगती है। हाई-प्रोटीन डाइट लेने पर शरीर में नाइट्रोजन वाले अपशिष्ट पदार्थ ज्यादा बनते हैं, जिन्हें किडनी पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकालती है। इस प्रक्रिया में शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत पड़ सकती है, जिसकी वजह से कुछ लोगों को अधिक प्यास लग सकती है और कुछ लोगों को नहीं भी लगती। हालांकि ये जरूरी नहीं है कि हाई प्रोटीन डाइट का सेवन सभी लोगों में ज्यादा प्यास को बढ़ाता है। Also Readअर्थराइटिस नहीं फिर भी घुटने, कोहनी और शरीर के दूसरे हिस्सों में दर्द? कौन सी बीमारी हो सकती है वजह, LNJP हॉस्पिटल की डॉक्टर से जानिए वजह

प्रोटीन सोर्स भी रखता है मायने

डॉ. मंजूषा अग्रवाल ने बताया प्रोटीन किस चीज से मिल रहा है, यह भी मायने रखता है। मांस, प्रोटीन पाउडर, दाल, बीन्स और डेयरी उत्पादों में प्रोटीन के साथ नमक, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट और पानी की मात्रा अलग-अलग होती है। इसलिए इनका बॉडी पर असर भी अलग हो सकता है। डॉ. मंजूषा अग्रवाल के मुताबिक प्रोसेस्ड या फ्लेवर्ड मीट और प्रोटीन पाउडर में सोडियम की मात्रा ज्यादा हो सकती है, जिससे प्यास बढ़ सकती है। वहीं दाल, बीन्स और डेयरी से प्रोटीन के साथ दूसरे पोषक तत्व भी मिलते हैं। इसलिए प्यास पर असर केवल प्रोटीन की मात्रा से ही नहीं, बल्कि पूरी डाइट और शरीर में पानी की स्थिति से भी जुड़ा हो सकता है। Also Readसिर्फ मसाला नहीं, दवा बनाने में भी काम आती है दालचीनी? शरीर पर इसके असर को समझें आयुर्वेदिक डॉक्टर से

हाई-प्रोटीन डाइट खाने के बाद कितना ज्यादा पानी पीना चाहिए?

अगर आप प्रोटीन डाइट का सेवन कर रहे हैं तो आपको नॉर्मल से थोड़ा ज्यादा पानी पीना चाहिए। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। डॉ. अग्रवाल के अनुसार आप प्यास लगने पर तुरंत पानी पिएं ताकि आपके यूरिन का कलर ठीक रहे और बॉडी हाइड्रेट रहे।
अगर आप एक्सरसाइज करते हैं, गर्म मौसम में ज्यादा वक्त गुजारते हैं या बहुत पसीना आता है, तो शरीर की पानी की जरूरत बढ़ सकती है। हालांकि, किडनी, दिल या किसी अन्य बीमारी से जूझ रहे लोगों को वाटर इनटेक बढ़ाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

कब ज्यादा प्यास को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

डाइट बदलने या ज्यादा नमकीन खाना खाने के बाद थोड़ी देर के लिए प्यास बढ़ना सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर बहुत ज्यादा या लगातार प्यास लगती रहती है, तो इसे केवल हाई-प्रोटीन डाइट का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर ज्यादा प्यास के साथ बार-बार पेशाब आना, बिना वजह वजन कम होना, थकान या धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण बॉडी में दिखाई देते हैं तो आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।