उत्तर प्रदेश में कुछ महीने बाद विधानसभा चुनाव कराए जाने हैं. चुनाव में भले ही अभी काफी वक्त है. लेकिन राजनीतिक दल अभी से चुनावी एजेंडा सेट करने में लग गए हैं. सत्तारुढ़ बीजेपी ही नहीं विपक्षी दल भी महिलाओं पर नजर गड़ाए हुए हैं. 2 लोकसभा चुनावों के अलावा हाल के कई विधानसभा चुनावों में महिलाएं ही जीत का आधार रही हैं. ऐसे में राज्य में महिलाओं से जुड़ी योजनाओं और सुविधाओं की बहार सी आ गई है.

राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी ने कल बुधवार को महिला समानता दिवस पर ऐलान किया कि उत्तर प्रदेश में सत्ता में आने पर पार्टी स्त्री सम्मान समृद्धि योजना लागू करेगी, और इसके जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए हर साल 40,000 रुपये दिए जाएंगे. उन्होंने यह भी वादा किया कि इस धनराशि को हर साल बढ़ाया भी जाएगा.
UP चुनाव भी महिलाओं के इर्दगिर्द
योगी सरकार भी महिलाओं से जुड़े ऐलान को लेकर पीछे नहीं रही. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना की शुरुआत करते हुए कहा कि स्नातक की पढ़ाई करने वाली 50 हजार छात्राओं को अक्टूबरनवंबर में स्कूटी बांटी जाएगी.
साथ ही रक्षाबंधन के अवसर पर 27, 28 और 29 अगस्त को महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा की सुविधा की बात करते हुए सीएम योगी ने कहा कि वह अपने एक सहयात्री के साथ फ्री में बस यात्रा कर सकती है. लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा के तहत 60 साल की उम्र से ऊपर की हर एक महिला को निशुल्क बस यात्रा की सुविधा मिलेगी. उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार की हर एक योजना बेटियों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है.
हालिया चुनावों में जीत की नायिका रहीं महिलाएं
लोकसभा चुनाव ही नहीं बल्कि बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम समेत पिछले कुछ सालों में कई राज्यों में हुए चुनाव के दौरान चुनावी सभाओं में नारों और वादों के केंद्र में महिलाएं ही रहीं. सच्चाई भी यही है कि महिलाएं ही किसी भी राज्य में जीत की राह बनी हैं.
लेकिन राजनीतिक दल जितनी सक्रियता और तन्मयता के साथ महिलाओं के कल्याण, हित और आर्थिक मजबूती की बात करते हैं, क्या उतनी ही सक्रियता राजनीति में दिखती है.
लोकसभा चुनाव में भी 33 फीसदी टिकट नहीं
शुरुआत अगर लोकसभा चुनाव से करें तो महिलाओं को लेकर दोनों चीजों में विरोधाभास दिखता है. राजनीतिक दल स्त्रियों के कल्याण की बात तो करते हैं, लेकिन चुनाव मैदान में उतारने के मामले में कंजूसी भी दिखा देते हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में ही देशभर की 543 लोकसभा सीटों पर कुल 8,360 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे जिसमें महिलाओं की संख्या महज 800 ही रही. जो कुल उम्मीदवारी का 10 फीसदी ही है.
इन 800 महिलाओं में से 279 प्रत्याशी निर्दलीय तौर पर मैदान में उतरी थीं, तो 267 प्रत्याशी गैर मान्यता प्राप्त दलों से जुड़ी महिलाएं थीं. शेष 254 प्रत्याशी मान्यता प्राप्त दलों से टिकट लेकर अपनी दावेदारी पेश की थी. इस तरह से देखा जाए तो निर्दलीय और रजिस्टर्ड लेकिन गैरमान्यता प्राप्त दलों ने महिलाओं को टिकट नहीं दिया होता तो तो यह संख्या और भी कम हो सकती थी.
UP में 2022 के चुनाव में भी दिखी कंजूसी
भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के साथसाथ कांग्रेस, आम आदमी पार्टी जैसी रजिस्टर्ड पार्टियों ने महज 254 महिलाओं को मैदान में उतारा, और कुल महिला उम्मीदवारों का 31.75% ही रहा था. कांग्रेस ने जहां 13% और बीजेपी ने 16% महिला उम्मीदवारों को ही टिकट दिया.
अब उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव की बात करें तो यहां भी स्थिति बहुत सही नहीं दिखती. साल 2022 के चुनाव में 403 सीटों वाले विधानसभा में कुल 4,442 दावेदारों ने अपनी ताल ठोंकी जिसमें 559 महिला उम्मीदवार थीं. यह कुल प्रत्याशियों की 13 फीसदी रही. 2017 की तुलना में इसमें 4 फीसदी की वृद्धि हुई.
कांग्रेस ने उतारे 155 प्रत्याशी, 1 सीट पर जीत
चुनाव में महिला बिरादरी को प्रमुखता देते हुए कांग्रेस ने ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान के तहत सबसे अधिक 155 महिला प्रत्याशियों को खड़ा किया था, इसके बाद बीजेपी ने 45 तो समाजवादी पार्टी ने 42 सीटों पर अपने महिला उम्मीदवार उतारे. मायावती की बसपा ने 38 महिलाओं को टिकट दिए.
इन 559 महिला प्रत्याशियों में सिर्फ 44 महिलाओं को चुनाव में जीत हासिल हुई और इसमें सबसे अधिक जीत बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को मिली. कांग्रेस को अपने अभियान में खास कामयाबी नहीं मिली. फिलहाल यह संख्या बढ़कर 47 हो गई है. चुनाव में बीजेपी की 29 महिला प्रत्याशियों के खाते में जीत आई. सपा की 14 और कांग्रेस की एक महिला प्रत्याशी को जीत मिली. अपना दल की 3 महिला प्रत्याशी भी विधायक बनने में कामयाब रहीं.
2017 में बीजेपी सपा ने कितने दिए टिकट
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में 485 महिलाओं ने चुनावी समर में अपनी चुनौती पेश की थी. इसमें बीजेपी ने सबसे अधिक 44 महिलाओं को टिकट दिया था. इसके बाद समाजवादी पार्टी का नंबर आता है जिसने 22 महिलाओं को मैदान में उतारा. बहुजन समाज पार्टी ने 20 तो कांग्रेस ने 11 महिलाओं को टिकट दिया.
चुनाव में 485 में से 41 महिला प्रत्याशी विजयी हुईं जिसमें बीजेपी और उसके सहयोगी अपना दल की 36 उम्मीदवारों को जीत मिली. इसके अलावा बसपा और कांग्रेस से 22 तथा सपा के एक महिला प्रत्याशी विजयी रहीं. बाद में उपचुनाव के जरिए 3 और सीटें महिलाओं के खाते में चली गईं.
2012 के चुनाव में महिलाओं की कैसी स्थिति
इसी तरह 2012 के विधानसभा चुनाव को देखें तो 6,839 उम्मीदवारों में से महज 583 महिला उम्मीदवार थीं. बीजेपी ने 44 महिलाओं को मैदान में उतारा. बीजेपी के बाद, समाजवादी पार्टी ने सबसे अधिक 33 महिलाओं को टिकट दिए.
तब राष्ट्रीय लोक दल ने 25 महिलाओं को मैदान में उतारा तो बसपा ने 19 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिए. कांग्रेस की ओर से 11 महिलाओं को टिकट दिया गया. 583 महिला प्रत्याशियों में 35 महिला विधायक बनने में कामयाब रहीं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अब देखना होगा कि महिलाओं की बात करने वाले ये राजनीतिक दल 2027 के चुनाव में टिकट बांटने के दौरान इस आधी बिरादरी पर कितना मेहरबान होते हैं.



